नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। आईडीए की स्कीम 97 यानी रेत मंडी के पास बन रही उच्चदाब 132 केवी बिजली ग्रिड के भूमिपूजन का मुहूर्त दो साल बाद भी नहीं निकला पा रहा है।
पहले ग्रिड के लिए जमीन नहीं मिल रही थी। फिर जमीन कम पड़ गई। अतिरिक्त जमीन आवंटन हुआ तो नामांतरण को लेकर परेशानी आई। अब जमीन की सारी कागजी औपचारिकता पूरी हो गई तो भी ग्रिड निर्माण का काम शुरू नहीं हो सका। अब राजा रमन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केंद्र (कैट) और बिजली ट्रांसमिशन कंपनी के बीच सहमति बनने तक ग्रिड का काम शुरू नहीं हो सकेगा।
प्रदेश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहर इंदौर में विद्युत अधोसंरचना को मजबूती देने के लिए शहर के दूसरे हिस्से में 132 केवी का बिजली सब स्टेशन बनाया जाना है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस सब स्टेशन से शहर के राजेंद्रनगर से लेकर पूरे राऊ, बायपास क्षेत्र व दक्षिण और पश्चिमी सिरे की बसाहट को बेहतर बिजली सुविधा मिल सकेगी।
इंदौर में लगातार बढ़ रहे विद्युत भार को देखते हुए इस उपकेंद्र की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। उपकेंद्र के निर्माण से लोड बैलेंसिंग बेहतर होगी, वोल्टेज प्रोफाइल में सुधार आएगा तथा किसी फॉल्ट या आपात स्थिति में वैकल्पिक विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना आसान होगा। इससे लाखों घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।
मप्र पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) इस ग्रिड का निर्माण करेगी। इंदौर में महंगी होती जमीन और सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होने से ग्रिड का काम शुरू नहीं हुआ। 2024 से जमीन को लेकर इंदौर विकास प्राधिकरण से चर्चा शुरू हुई। आइडीए ने पहले 1 हेक्टेयर जमीन देने पर सहमति दी। इसके बाद ट्रांसको ने और जमीन की आवश्यकता बताई। इसके बाद फिर से 0.6 हेक्टेयर जमीन आवंटित की गई।
अब दूसरी रुकावट
जमीन मिलने के बाद भी ट्रांसको ने ग्रिड निर्माण का काम शुरू नहीं किया। इस पर आरोप लगने लगे कि सरकारी लेटलतीफी जारी है। इस पर ट्रांसको ने बताया कि ग्रिड निर्माण के लिए आने वाला फंड और प्रोजेक्ट तब तक शुरू नहीं हो सकता जब तक जमीन कागजों पर या तो प्रदेश के उर्जा विभाग या ट्रांसमिशन कंपनी के नाम ना चढ़ जाए। दो महीने पहले आइडीए ने प्रक्रिया कर जमीन आवंटन कर दी। साथ इसे शासन के उर्जा विभाग के नाम भी कर दिया। इसके बाद भी ग्रिड का निर्माण अब तक शुरू नहीं हुआ तो सवाल खड़े होने लगे।
ट्रांसमिशन कंपनी ने कहा है कि ग्रिड निर्माण के लिए वे पूरी तैयारी कर चुके हैं। जहां ग्रिड बन रही हैं वहीं भारत सरकार के अतिमहत्वपूर्ण संस्थानों में शामिल कैट है। कैट के भीतर एक ग्रिड है। नई बनने वाली ग्रिड में उस ग्रिड से एक लाइन आना है। साथ नई ग्रिड से कैट को भी दोहरी लाइन देना है। ताकि आपास स्थिति में भी वहां बिजली आपूर्ति बाधित न हो। कैट और केंद्रीय स्तर पर इस बारे में प्रस्ताव दिया है। जब तक कैट की स्वीकृति नहीं मिल जाती तब तक इस ग्रिड का काम शुरू नहीं हो सकता।
कैट से मंजूरी मिलते ही काम शुरू
एमपी ट्रांसको इंदौर के अतिरिक्त मुख्य अभियंता अनिल लाठी के अनुसार अहीरखेड़ी (रेतीमंडी) क्षेत्र में प्रस्तावित 132 केवी एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशन को विद्युत आपूर्ति देने के लिए वर्तमान 132 केवी साउथ जोन–घाटाबिल्लौद ट्रांसमिशन लाइन का उपयोग किया जाना प्रस्तावित है।सबस्टेशन के नजदीक से ही 132 केवी साउथ जोन-केट के दो सर्किट जा रहे हैं। जिसमें से एक सर्किट को भी प्रस्तावित सबस्टेशन पर लाइन इन- लाइन आउट (लिलो ) किये जाने का प्रस्ताव है।
इस व्यवस्था से नए 132 केवी सबस्टेशन को विद्युत आपूर्ति उपलब्ध होने के साथ-साथ केट क्षेत्र को भी इंदौर के साउथ जोन के अलावा धार जिले से भी एक और अतिरिक्त एवं अधिक विश्वसनीय बिजली आपूर्ति का लाभ मिलेगा। अतिरिक्त मुख्य अभियंता के अनुसार इस संबंध में एमपी ट्रांसको और केट प्रशासन के बीच आवश्यक तकनीकी एवं प्रशासनिक स्तर पर चर्चा जारी है। केट प्रशासन से अनुमति प्राप्त होते ही प्रस्तावित 132 केवी सबस्टेशन तथा उससे संबंधित ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण कार्य प्रारंभ किए जा सकेंगे।
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