दस दिन की वर्षा ने सिद्ध कर दिया कि वर्षाकाल से पहले शहर की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के नगर निगम का दावा कोरा आश्वासन था। थोड़ी सी वर्षा ने निगम के …और पढ़ें
HighLights
- थोड़ी सी वर्षा ने निगम के दावे की पोल खोलकर रख दी है
- पैचवर्क के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद हालत यह है कि सड़कों पर धूल उड़ रही है
- निगम हर साल पैचवर्क के नाम पर करीब आठ करोड़ रुपये खर्च करता है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। दस दिन की वर्षा ने सिद्ध कर दिया कि वर्षाकाल से पहले शहर की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के नगर निगम का दावा कोरा आश्वासन था। थोड़ी सी वर्षा ने निगम के दावे की पोल खोलकर रख दी है। पैचवर्क के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद हालत यह है कि सड़कों पर धूल उड़ रही है।
पैचवर्क उखड़ चुका है। निगम हर साल पैचवर्क के नाम पर करीब आठ करोड़ रुपये खर्च करता है। इसमें से आधे से ज्यादा राशि खर्च की भी जा चुकी है। शहर के मुख्य मार्गों पर डामर उखड़ चुका है। गड्ढे दोबारा दिखाई पड़ने लगे हैं। वाहन चालक जान हथेली में रखकर वाहन चला रहे हैं।
वर्षाकाल में भी चल रही है खोदाई
मानसूनकाल में दुर्घटनाओं की आशंका के चलते टेलीकाम कंपनियों सहित सभी एजेंसियों के सड़क खोदने पर पूरी तरह से रोक लगी रहती है, लेकिन फिलहाल हालत यह है कि शहर में कई जगह खोदाई चल रही है। विजय नगर चौराहा पर मेट्रो पिलर के पास खोदाई चल रही है। इसके अलावा कई अन्य चौराहे भी हैं जहां विकास कार्य के नाम पर खोदाई हो रही है। चौराहों पर खोदाई की वजह से सड़क सकरी हो गई है। वाहन गुत्थम-गुत्था हो रहे हैं। शाम के समय तो ज्यादातर चौराहों पर जाम की स्थिति बन रही है।
सिर्फ आश्वासन मिल रहा है शहरवासियों को
नगर निगम ने दावा किया था कि मानसून शुरू होने से पहले शहर की सड़कों का पैचवर्क कर दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति की अध्यक्षता वाली समिति ने भी इंदौर में बैठक के दौरान निर्देश दिए थे कि वर्षाकाल से पहले के और वर्षाकाल में पैचवर्क आवश्यक रुप से किया जाए, लेकिन शहर की सड़कें देखकर ऐसा लग नहीं रहा।
नईदुनिया ने मानसून ऑडिट के दौरान शहर की सड़कों पर पैचवर्क नहीं होने और खस्ताहाल सड़कें वर्षाकाल में परेशानी का सबब बनने का मुद्दा उठाया था। उस वक्त भी जिम्मेदारों ने जवाब दिया था कि वर्षाकाल से पहले सड़कों की हालत सुधार ली जाएगी, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
वर्षाकाल में भी पैचवर्क का दावा था, मशीनें नजर नहीं आ रहीं
नगर निगम ने पिछले वर्ष भी दो करोड़ रुपये की लागत से वर्षाकाल में पैचवर्क के लिए मशीनें बुलवाई थीं, लेकिन ये मशीनें कहीं नजर नहीं आ रहीं। इस वर्ष भी नगर निगम ने करोड़ों खर्च कर पेंचवर्क का दावा किया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ। हालत यह है पूरे शहर में सड़कें बदहाल हैं।
जल्द ही फिर शुरू होगा पैचवर्क
जहां-जहां ठेकेदारों ने पैचवर्क किया था, वहां उन्हें ही दोबारा करना होगा। पैचवर्क की एक वर्ष की गारंटी है। वर्षाकाल में कोल्ड मिक्स पद्धति से गड्ढों को सुधरवाया जाएगा। -अभय राजनगांवकर, अपर आयुक्त नगर निगम
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