नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। रिक्शा चालक को कुचलने वाले हाथी को लेकर शुक्रवार को इंदौर वनमंडल ने कार्रवाई आगे बढ़ा दी है। नौलखा स्थित इंदौर रेंज कार्यालय में महावत रामजी और मालिक संदीप निर्मोही पहुंचे। उन्होंने हाथी का उज्जैन में पंजीयन और लाइसेंस जारी होना बताया। यहां तक कि उज्जैन से हैदराबाद के बीच ट्रांजिट पास (परिवहन अनुमति) भी दिखाया। मगर नांदेड़ से हाथी को पैदल लाया गया।
इस दौरान इंदौर में भी रुके, लेकिन दस्तावेजों में इंदौर की अनुमति नहीं मिली है। इसके चलते अब वन विभाग महावत और मालिक के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने में लगा है।
26 जुलाई की घटना और प्रशासनिक कार्रवाई
26 जुलाई को राज नगर में रिक्शा चालक विजय होलकर हाथी को गुड़ खिलाने की कोशिश करता रहा। इस दौरान हाथी ने सूंड में लपेटकर विजय को फेंक दिया और सिर पर पैर रख दिया। इलाज के दौरान विजय की मौत हो गई।
इसके बाद चंदन नगर थाने ने महावत रामजी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया। घटना के बाद कलेक्टर शिवम वर्मा ने इंदौर वनमंडल के डीएफओ लाल सुधाकर सिंह को कार्रवाई के लिए निर्देश दिए।
दस्तावेज और पूछताछ में सामने आए तथ्य
चार दिन बाद महावत रामजी और मालिक संदीप निर्मोही व हेमंत दास ने वन विभाग के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत किए। हाथी का पंजीयन निर्मोही अखाड़ा के नाम पर किया गया है। यहां तक कि लाइसेंस संदीप निर्मोही के नाम पर मिला है। ट्रांजिट पास उज्जैन से हैदराबाद और हैदराबाद से उज्जैन के लिए जारी की गई। इसकी अवधि महीनेभर की रखी थी, जो 28 जुलाई को खत्म हुई।
इसे लेकर इंदौर रेंजर संगीता ठाकुर, डिप्टी रेंजर कोमल परिहार और वनरक्षक आशीष कुशवाहा ने पूछताछ की तो संदीप ने बताया कि हाथी को शूटिंग के लिए हैदराबाद लेकर गए थे। वहां से 28 जून को निकल गए थे, लेकिन नांदेड़ में ट्रक का टायर फट गया।
इस बीच ट्रक का नया टायर लगाया, लेकिन हाथी ट्रक में सवार नहीं हुआ। फिर पैदल लेकर जाना तय किया। रोजाना 13 से 15 किमी की दूरी तय करते थे। 24 जुलाई को इंदौर पहुंचे और पंचकुईया के राम गोपाल दास आश्रम पर रुके।
डेढ़ लाख दिए पीड़ित को
हेमंत दास ने बताया कि रिक्शा चालक शराब पिए हुए था और वह जबर्दस्ती गुड खिलाने की जिद कर रहा था। शराब की गंध से हाथी विचलित हुआ था। महावत ने उसे दूर रहने को कहा। बावजूद इसके लिए वह बार-बार हाथी के नजदीक आ रहा था। वैसे पीड़ित को अस्पताल में इलाज भी आश्रम से करवाया था। लगभग डेढ़ लाख रुपये इलाज व दवाइयों के लिए दिए थे।
पैदल लाने की नहीं थी अनुमति
रेंजर संगीता ठाकुर के मुताबिक हाथी को लेकर उज्जैन-हैदराबाद के बीच परिवहन की अनुमति मिली थी। दस्तावेजों की जांच के बाद पाया कि अनुमति भी ट्रक से परिवहन की वन विभाग उज्जैन ने दी थी। पैदल लाने को लेकर अनुमति से जुड़े कोई दस्तावेज नहीं मिले है। इस संबंध में अखाड़ा संचालक व महावत सहित अन्य लोगों के बयान दर्ज किए गए है। अभी कुछ और दस्तावेज मांगे गए है।
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महावत को सुपुर्दगी पर दिया हाथी
हाथी से जुड़े दस्तावेज महावत और मालिक ने प्रस्तुत किए है। पंजीयन-लाइसेंस और ट्रांजिट पास सहित अन्य दस्तावेजों का अध्ययन किया है। वैसे हाथी को महावत को सुपुर्दगी पर दिया है, क्योंकि उसे रखने के लिए इंदौर वनमंडल में पर्याप्त जगह नहीं है।- लाल सुधाकर सिंह, डीएफओ, इंदौर वनमंडल
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