इंदौर में नकली प्लास्टर बांधकर आरोपियों का जुलूस निकालने के मामले की जांच तेज हो गई। डॉक्टर के बयान के बाद गिरफ्तारी प्रक्रिया और रिश्वत के आरोपों की …और पढ़ें
HighLights
- नकली प्लास्टर मामले में जांच ने नया मोड़ ले लिया।
- डॉक्टर के बयान से पुलिस के दावे पर सवाल उठे।
- गिरफ्तारी प्रक्रिया और जुलूस निकालने की जांच जारी है।
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। तोड़फोड़ के आरोपियों को नकली प्लास्टर (पट्टा) बांधकर जुलूस निकालने के मामले में नया मोड़ आया है। अधिकारियों ने डॉक्टर के बयान दर्ज करने के बाद जांच की दिशा बदल दी है। अब वह आरोपियों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया और रुपये लेकर जुलूस निकालने के आरोपों की भी जांच कर रहे हैं।
इंदौर के हीरानगर थाना पुलिस ने आरोपी मयंक और शोभित को कार में तोड़फोड़ और मारपीट के आरोप में गिरफ्तार किया था। दोनों आरोपियों के हाथ-पैर में फ्रैक्चर होने का दावा करते हुए पुलिसकर्मियों ने उनका जुलूस निकालकर और फोटो-वीडियो बनवाए, लेकिन दूसरे दिन सेंट्रल जेल के बाहर आरोपियों के हाथ पैर पर बंधे पट्टे खोल दिए।
पिटाई न करने के बदले लिए 20 हजार
26 जुलाई को इंटरनेट मीडिया पर इसका एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें पुलिस कर्मी आरोपियों के हाथ की पट्टी खुलवाते देखे गए। वीडियो में आरोपियों से 20 हजार रुपये लेने की बात भी सामने आई है। आरोप है कि पुलिस कर्मियों ने यह रुपये आरोपियों की पिटाई नहीं करने के बदले लिए थे।
दर्ज किए गए पुलिसकर्मियों के बयान
पुलिस आयुक्त के निर्देश पर एडीसीपी जोन-3 ओमप्रकाश ने एसीपी रुबिना मिजवानी, टीआइ सुशील पटेल, एएसआइ दिनेश त्रिपाठी सहित कई पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए।
डॉक्टर के बयान से बढ़ी समस्या
टीआइ ने दावा किया कि आरोपी तोड़फोड़ की घटना में घायल हुए थे। उन्होंने सूरज अस्पताल में उनका इलाज और एमवाय हास्पिटल में एमएलसी कराने की बात कही, लेकिन एडीसीपी ने गुरुवार को संबंधित अस्पताल के डॉक्टर से पूछताछ की तो उसने आरोपियों का इलाज करने की पुष्टि तो की, लेकिन पुलिसकर्मियों की मौजूदगी से इन्कार किया।
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