गुरुवार सुबह बादल छाए और रुक-रुक कर हल्की वर्षा हुई। एयरपोर्ट क्षेत्र में गुरुवार को 4.5 मिमी वर्षा दर्ज हुई। हालांकि दोपहर में धूप व उमस ने परेशान कि…और पढ़ें
HighLights
- गुरुवार सुबह बादल छाए और रुक-रुककर हल्की वर्षा हुई
- एयरपोर्ट क्षेत्र में गुरुवार को 4.5 मिमी वर्षा दर्ज हुई
- हालांकि दोपहर में धूप व उमस ने परेशान किया
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : गुरुवार सुबह बादल छाए और रुक-रुककर हल्की वर्षा हुई। एयरपोर्ट क्षेत्र में गुरुवार को 4.5 मिमी वर्षा दर्ज हुई। हालांकि दोपहर में धूप व उमस ने परेशान किया।
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक शुक्रवार को भी शहर में हल्के बादल छाएंगे और वर्षा होने की संभावना है। गुरुवार को शहर में अधिकतम तापमान 26.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से दो डिग्री सेल्सियस कम था। वही न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से एक डिग्री सेल्सियस अधिक था।
शहर में बादल छाए और दिन में गर्मी ने भी परेशान किया
गुरुवार को शहर में बादल छाए और दिन में गर्मी ने भी परेशान किया। सुबह के समय हल्की वर्षा हुई। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक शुक्रवार में बादल छाए और शहर में बूंदाबांदी होने की संभावना है। दिन व रात का तापमान सामान्य के आसपास रहेगा।
मालवांचल में कम वर्षा पर मंथन आज
इंदौर: देश के अन्य राज्यों में झमाझम वर्षा हो रही है, लेकिन मालवांचल में अपेक्षाकृत कम वर्षा हुई है। इसी को देखते हुए सामाजिक संस्था सेवा सुरभि सात अगस्त को शाम साढ़े चार बजे कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है। इसमें पद्मभूषण डा. अनिल प्रकाश जोशी भी शामिल होंगे।
संस्था संयोजक ओमप्रकाश नरेडा, पर्यावरणविद ओपी जोशी, अतुल शेठ अौर कुमार सिद्धार्थ के अनुसार, डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के साथ शहर के पर्यावरण प्रेमी, नागरिक और हरियाली से जुड़े प्रेमी पर्यावरण बिगड़ने, टेक्नोलाजी में लगातार आगे बढ़ने के बावजूद पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आम आदमी की उदासीनता और प्रकृति की अवहेलना जैसे मुद्दों पर मंथन करेंगे।
कार्यक्रम में पद्मश्री जनक पलटा, भूगर्भ जल विशेषज्ञ डा. सुधींद्र मोहन शर्मा, आरआर कैट के पूर्व विज्ञानी निकेतन सेठी सहित शहर के कई संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। डा. अनिल प्रकाश जोशी हरित कार्यकर्ता और हिमालयन पर्यावरण अध्ययन और संरक्षण संगठन के संस्थापक हैं, जो देहरादून स्थित एक स्वैच्छिक संगठन है। उनके काम में प्रमुख रूप से स्थायी प्रौद्योगिकियों का विकास शामिल है जो पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए पारिस्थितिकी समावेशी अर्थव्यवस्था हैं।
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