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इंदौर में चोरी के लिए बिजली गुल की, डिवाइस से डिकोड कर कारें चुराईं, फर्जी नंबर प्लेट लगाकर भागे

इंदौर में चोरी के लिए बिजली गुल की, डिवाइस से डिकोड कर कारें चुराईं, फर्जी नंबर प्लेट लगाकर भागे

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : कार चोरी करने वाले चोर अब सिर्फ मास्टर चाबी या पारंपरिक औजारों पर निर्भर नहीं हैं। राजेंद्रनगर पुलिस ने ऐसे हाईटेक अंतरराज्यीय कार चोर गिरोह को पकड़ा है, जो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की मदद से कार के लाकिंग सिस्टम को डिकोड कर चोरी की वारदात को अंजाम देता था।

वारदात से पहले इलाके की बिजली सप्लाई बंद कर दी जाती थी, ताकि सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो जाए। चोरी के बाद कार पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर उसे दूसरे शहर या राज्य में पहुंचा दिया जाता था। चोर एक महिला की मदद लेते थे। आरोपितों के कब्जे से चोरी की दो कार, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, मैगनेट, कटर और कार चोरी में इस्तेमाल होने वाले अन्य टूल्स बरामद हुए हैं।

डीसीपी जोन-1 नरेंद्रसिंह रावत के अनुसार 29 जुलाई से 31 जुलाई के मध्य राजेंद्र नगर थाना अंतर्गत आने वाले वीआइपी परस्पर नगर,दामोदर नगर और विज्ञान नगर में चार पहिया वाहन चोरी हुए थे।

जांच में पता चला वाहन चोरों ने कॉलोनी के ट्रांसफॉर्मर से पूरे इलाके की बिजली सप्लाई बंद की और मिनटो में कार चोरी कर रफुचक्कर हो गए। पुलिस ने करीब 500 स्थानों से सीसीटीवी फुटेज खंगाले और चोरों की कड़ियां जोड़ी और आरोपित इमरान निवासी गोपालपुर रानीगंज प्रतापगढ़ (राजस्थान), मोहम्मद तौफिक निवासी नरसिंहपुर पट्टी प्रतापगढ,वर्षा निवासी निलजे शिलकल्याण रोड़ डोंबीवली पूर्व मुंबई और राजीव सूरी निवासी धर्मा नगर सोसायटी नेहरु नगर मुंबई को गिरफ्तार कर लिया।

डीसीपी के मुताबिक गैंग में महिला की भूमिका भी महत्वपूर्ण सामने आई है। आरोपित महिला को साथ रखकर घूमते थे, ताकि आम लोगों और पुलिस को उन पर आसानी से शक न हो। कार में महिला की मौजूदगी को सामान्य परिवार या परिचितों की आवाजाही समझकर कई बार लोग नजरअंदाज कर देते थे।

टोलनाका के सीसीटीवी फुटेज से राजस्थान पहुंची पुलिस

पुलिस ने कईं दिनों तक चोरों पर नजर रखी। आगरा-बाम्बे रोड और पीथमपुर टोल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। जांच के दौरान चोरी की एक कार पीथमपुर में फोर्स मोटर्स के पास लावारिस हालत में मिली। पुलिस ने चोरी की कार मिलने के बाद उसे तत्काल जब्त करने के बजाय उस पर निगरानी शुरू कर दी। टीम ने करीब 36 घंटे तक कार पर नजर रखी।

पुलिस को इंतजार था कि कार लेने के लिए गिरोह का कोई सदस्य जरूर आएगा। आखिरकार तीन पुरुष और एक महिला कार के पास पहुंचे। चारों कार में बैठे और पीथमपुर ब्रिज की ओर रवाना होने लगे। इसी दौरान पहले से घात लगाए पुलिसकर्मियों ने घेराबंदी कर चारों को दबोच लिया।

चोरी के तीन तरीके

  • पाश कॉलोनियों की रैकी करते थे। घरों के बाहर खड़ी कार की जानकारी निकाल ली जाती थी।
  • चोरी के पूर्व कालोनी में लगे ट्रांसफार्मर से बिजली सप्लाई बंद कर कालोनी के सीसीटीवी कैमरे ही बंद कर देते थे।
  • कार चुरा कर बाहर निकलते ही फर्जी नंबर प्लेट लगा लेते थे ताकि पुलिस से बचा जा सके।

ट्रांसफॉर्मर का सर्किट ब्रेक कर होती है बिजली बंद

बिजली कंपनी के सहायक यंत्री केपी सिंह के अनुसार ट्रांसफॉर्मर में इन और आउट लाइन होती है। एक सर्किट के जरिए इन आउट लाइन को कनेक्ट कर ट्रांसफॉर्मर में आने वाली विद्युत को संबंधित उपभोक्ताओं को वितरित किया जाता है। इस सर्किट में एक डीओ स्विच होता है।

यह किसी भी घर के फ्यूट की तरह होता है। जो अधिक लोड होने पर वायर को गलाकर सर्किट ब्रेक कर विद्युत आपूर्ति रोक देता है। इस कटआउट को निकालने से आपूर्ति रुक जाती है। इसी तरह एक फेज वायर भी होता है इसे हटाने से भी सर्किट ब्रेक हो जाता है और विद्युत आपूर्ति रुक जाती है।

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