देश की दो प्रमुख विमानन कंपनियां इंडिगो और एयर इंडिया ने नोएडा एयरपोर्ट को अपनी लेकर चिंता जताई जताई है। दोनों एयरलाइन कंपनियों ने भारतीय हवाई अड्डा आर्थिक नियामक प्राधिकरण (एईआरए) को बताया है कि यहां की अधिक लागत उनके लिए चुनौती बन सकती है। इसके साथ ही दोनों कंपनियों ने यह भी कहा है कि हवाई अड्डे तक पहुंचने के लिए सार्वजनिक परिवहन की सुविधा अभी पर्याप्त नहीं है। कमजोर कनेक्टिविटी यात्रियों और एयरलाइंस दोनों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।
इंडिगो ने कहा, दिल्ली हवाई अड्डे से ज्यादा शुल्क होने पर खर्च बढ़ेगा। इससे हवाई किराया महंगा होगा और नोएडा हवाई अड्डा लोगों को कम पसंद आएगा। एयर इंडिया का कहना है जब तक अच्छी और आसान जमीनी कनेक्टिविटी नहीं होगी। तब तक कॉरपोरेट यात्री इस हवाई अड्डे से दूरी बनाए रखेंगे। टाटा समूह की इस एयरलाइन ने नवी मुंबई हवाई अड्डे का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी ज्यादा शुल्क के कारण विकास की रफ्तार प्रभावित हो रही है।
अभी एईआरए 2026 से 2031 के लिए नोएडा हवाई अड्डे के शुल्क तय कर रहा है। इसमें लैंडिंग, पार्किंग और यूजर डेवलपमेंट फीस शामिल हैं।ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की सहायक कंपनी यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (वाईआईएपीएल) नोएडा हवाई अड्डे का संचालन करती है। उसने इस साल की शुरुआत में एईआरए को शुल्क का प्रस्ताव दिया था। इंडिगो और एयर इंडिया ने सात अप्रैल को पत्र भेजकर इस प्रस्ताव का विरोध किया।
इंडिगो ने अपने पत्र में कहा कि नोएडा और दिल्ली हवाई अड्डे दोनों एनसीआर के यात्रियों को सेवा देंगे। यानी दोनों के बीच काफी समानता होगी। लेकिन कंपनी का कहना है कि, नोएडा हवाई अड्डे के प्रस्तावित शुल्क, दिल्ली हवाई अड्डे से काफी ज्यादा हैं।
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