अमेरिका की तरफ से जब 28 फरवरी को ईरान पर ताबड़तोड़ हमले बोले गए, तब किसी ने उम्मीद भी नहीं की थी कि साढ़े तीन महीने बाद हमला करने वाले को ही हमला झेलने वाले देश के नुकसान की भरपाई करनी पड़ेगी। हालांकि, हुआ कुछ ऐसा ही। 22 जून को अमेरिका का वित्त मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन जारी कर ईरान को 60 दिन तक तेल का उत्पादन करने, उसे बेचने और बाकी देशों को ईरानी तेल खरीदने की छूट दे दी। यानी जिस ईरान के तेल को करीब एक दशक तक खरीदने पर पाबंदी लगी रही, युद्ध के बाद उसी तेल को एक बार फिर वैश्विक बाजार में पहुंचाने की शुरुआत अमेरिका ने ही कर दी। इस पूरे घटनाक्रम से उन देशों को सबसे ज्यादा फायदे की उम्मीद है, जो तेल के बड़े आयातक हैं। खासकर चीन और भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश, जिनके लिए ईरान पारंपरिक तौर पर ईंधन का बड़ा सप्लायर रहा है।
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