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तापसी पन्नू – फोटो : इंस्टाग्राम-@taapsee
विस्तार
तापसी ने अपने आपको थकाया
तापसी पन्नू ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर बताया ‘मुझे याद है कि मुझे सपाट पेट पाने का जुनून था, क्योंकि बड़े होते समय मैं बहुत ज्यादा फिट थी, लेकिन मुझे कभी समझ नहीं आया कि पेट के निचले हिस्से की चर्बी हमेशा क्यों बनी रहती थी। इसे कम करने के लिए मैंने इतनी ज्यादा कसरत की कि मैंने खुद को हद से ज्यादा थका दिया। यह बात बिल्कुल सही है कि जब आप खुद को हद से ज्यादा थकाते हैं, तो आपके दिमाग में एक खतरे की घंटी बजती है कि आपके शरीर को सुरक्षा की जरूरत है।’
मुंबई। इंतज़ार की घड़ियाँ अब और भी रोमांचक हो चुकी हैं। ;;ठुकरा के मेरा प्यार सीज़न 2 का ट्रेलर आ चुका है, जो दर्शकों को सीधे एक ऐसी दुनिया में ले जाता है, जहाँ मोहब्बत मासूम नहीं रह जाती, बल्कि ताकत की कीमत व्यक्तिगत रूप से चुकानी पड़ती है।
धवल ठाकुर एक ऐसे इंसान कुलदीप कुमार का किरदार निभाते हुए वापसी कर रहे हैं जो अपराधबोध और जुनून के बीच जूझ रहा है। एक ऐसा इंसान जिसने कभी कोई एक ऐसी गलती की थी, जिससे सब कुछ तहस-नहस हो गया और अब एक बार फिर वह खुद को राजनीति, सत्ता और अधूरी भावनाओं के खतरनाक जाल में खिंचता हुआ पाता है।

संचिता बसु, शानविका चौहान के रूप में और भी ज्यादा धाकड़, दमदार और शक्तिशाली बनकर उभरती हैं। सत्ता के बेरहम गलियारों से गुज़रते हुए वह नियमों को मानने से साफ़ तौर पर इंकार कर देती है, भले ही इसके लिए उसे इस रास्ते में रिश्तों की परिभाषा को ही क्यों न बदलना पड़े।
यह ट्रेलर इस सीज़न की एक ऐसी झलक दिखाता है, जो हाई-स्टेक्स पॉलिटिकल ड्रामे, सुलगते हुए बदले, इमोशनल टकराहट और टकरावों से भरा हुआ है। ;;जैसे ही सीतापुर महत्वाकांक्षा और विश्वासघात की रणभूमि बन जाता है, कुलदीप और शानविका खुद को एक ऐसे खेल के विपरीत छोर पर पाते हैं… जहाँ भरोसा बेहद नाज़ुक होता है और इरादे कभी वैसे नहीं होते जैसे दिखाई देते हैं। यह सीज़न जज़्बातों के उस तूफ़ान को और भी ज़्यादा गहरा करता है जिसने पहले सीज़न को एक मिसाल बनाया था, वही दिल का टूटना, वही बदले की आग और एक कमतर आंके गए कमजोर इंसान का हर दीवार लांघकर उभरना… लेकिन इस बार, यह खेल एक बहुत बड़े और कहीं ज़्यादा ख़तरनाक कैनवास पर रचा गया है।
इस बारे में संचिता बसु ने कहा कि “सीज़न 2 शानविका को एक ऐसे मोड़ पर ले जाता है जो जज़्बाती तौर पर अनकही और अप्रत्याशित है। वह अब पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत है, खुद को समेटकर रखने वाली और सतर्क है साथ ही लगातार इस उलझन में है कि जब खेल में सत्ता और धोखा शामिल हो जाए, तो फिर प्यार के असली मायने क्या रह जाते हैं। इस सीज़न में जिस चीज़ ने मुझे सबसे ज़्यादा रोमांचित किया, वो यह है कि यहाँ कुछ भी पूरी तरह सही या गलत नहीं है… हर इमोशन अपने साथ एक अंजाम लेकर आता है।
कुलदीप कुमार के रूप में वापसी कर रहे धवल ठाकुर ने इस अवसर पर कहा कि, “कुलदीप इस सीज़न में अपने अतीत का बोझ उठाता है। वह इमोशनल होने के साथ ही एक अजीब तरह के द्वंद्व में है, वह जो महसूस करता है और जो दुनिया उससे उम्मीद करती है, उसके बीच लगातार फंसा हुआ रहता है। यह ट्रेलर केवल एक झलक दिखाता है कि इस बार उनकी यात्रा जज्बाती और निजी हो जाती है। इस बार कहानी का दायरा भले ही बहुत बड़ा हो गया हो, लेकिन इसके जज़्बातों की जो बुनियाद और आत्मा है, उतनी ही सच्ची और ज़मीनी है।" 'ठुकरा के मेरा प्यार' – सीज़न 2 स्ट्रीम होगा 19 जून, 2026 से जियोहॉटस्टार पर।
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A Game of Power, Politics, Unfulfilled Love, Trailer,Thukra Ke Mera Pyaar,Season 2, Hindi news">
मुंबई। इंतज़ार की घड़ियाँ अब और भी रोमांचक हो चुकी हैं। ;;ठुकरा के मेरा प्यार सीज़न 2 का ट्रेलर आ चुका है, जो दर्शकों को सीधे एक ऐसी दुनिया में ले जाता है, जहाँ मोहब्बत मासूम नहीं रह जाती, बल्कि ताकत की कीमत व्यक्तिगत रूप से चुकानी पड़ती है।
धवल ठाकुर एक ऐसे इंसान कुलदीप कुमार का किरदार निभाते हुए वापसी कर रहे हैं जो अपराधबोध और जुनून के बीच जूझ रहा है। एक ऐसा इंसान जिसने कभी कोई एक ऐसी गलती की थी, जिससे सब कुछ तहस-नहस हो गया और अब एक बार फिर वह खुद को राजनीति, सत्ता और अधूरी भावनाओं के खतरनाक जाल में खिंचता हुआ पाता है।

संचिता बसु, शानविका चौहान के रूप में और भी ज्यादा धाकड़, दमदार और शक्तिशाली बनकर उभरती हैं। सत्ता के बेरहम गलियारों से गुज़रते हुए वह नियमों को मानने से साफ़ तौर पर इंकार कर देती है, भले ही इसके लिए उसे इस रास्ते में रिश्तों की परिभाषा को ही क्यों न बदलना पड़े।
यह ट्रेलर इस सीज़न की एक ऐसी झलक दिखाता है, जो हाई-स्टेक्स पॉलिटिकल ड्रामे, सुलगते हुए बदले, इमोशनल टकराहट और टकरावों से भरा हुआ है। ;;जैसे ही सीतापुर महत्वाकांक्षा और विश्वासघात की रणभूमि बन जाता है, कुलदीप और शानविका खुद को एक ऐसे खेल के विपरीत छोर पर पाते हैं… जहाँ भरोसा बेहद नाज़ुक होता है और इरादे कभी वैसे नहीं होते जैसे दिखाई देते हैं। यह सीज़न जज़्बातों के उस तूफ़ान को और भी ज़्यादा गहरा करता है जिसने पहले सीज़न को एक मिसाल बनाया था, वही दिल का टूटना, वही बदले की आग और एक कमतर आंके गए कमजोर इंसान का हर दीवार लांघकर उभरना… लेकिन इस बार, यह खेल एक बहुत बड़े और कहीं ज़्यादा ख़तरनाक कैनवास पर रचा गया है।
इस बारे में संचिता बसु ने कहा कि “सीज़न 2 शानविका को एक ऐसे मोड़ पर ले जाता है जो जज़्बाती तौर पर अनकही और अप्रत्याशित है। वह अब पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत है, खुद को समेटकर रखने वाली और सतर्क है साथ ही लगातार इस उलझन में है कि जब खेल में सत्ता और धोखा शामिल हो जाए, तो फिर प्यार के असली मायने क्या रह जाते हैं। इस सीज़न में जिस चीज़ ने मुझे सबसे ज़्यादा रोमांचित किया, वो यह है कि यहाँ कुछ भी पूरी तरह सही या गलत नहीं है… हर इमोशन अपने साथ एक अंजाम लेकर आता है।
कुलदीप कुमार के रूप में वापसी कर रहे धवल ठाकुर ने इस अवसर पर कहा कि, “कुलदीप इस सीज़न में अपने अतीत का बोझ उठाता है। वह इमोशनल होने के साथ ही एक अजीब तरह के द्वंद्व में है, वह जो महसूस करता है और जो दुनिया उससे उम्मीद करती है, उसके बीच लगातार फंसा हुआ रहता है। यह ट्रेलर केवल एक झलक दिखाता है कि इस बार उनकी यात्रा जज्बाती और निजी हो जाती है। इस बार कहानी का दायरा भले ही बहुत बड़ा हो गया हो, लेकिन इसके जज़्बातों की जो बुनियाद और आत्मा है, उतनी ही सच्ची और ज़मीनी है।" 'ठुकरा के मेरा प्यार' – सीज़न 2 स्ट्रीम होगा 19 जून, 2026 से जियोहॉटस्टार पर।
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A Game of Power, Politics, Unfulfilled Love, Trailer,Thukra Ke Mera Pyaar,Season 2, Hindi news">‘‘ठुकरा के मेरा प्यार’’ सीजन 2 के ट्रेलर में पावर, पॉलिटिक्स और अधूरी मोहब्बत का खेल
मुंबई। इंतज़ार की घड़ियाँ अब और भी रोमांचक हो चुकी हैं। ;;ठुकरा के मेरा प्यार सीज़न 2 का ट्रेलर आ चुका है, जो दर्शकों को सीधे एक ऐसी दुनिया में ले जाता है, जहाँ मोहब्बत मासूम नहीं रह जाती, बल्कि ताकत की कीमत व्यक्तिगत रूप से चुकानी पड़ती है।
धवल ठाकुर एक ऐसे इंसान कुलदीप कुमार का किरदार निभाते हुए वापसी कर रहे हैं जो अपराधबोध और जुनून के बीच जूझ रहा है। एक ऐसा इंसान जिसने कभी कोई एक ऐसी गलती की थी, जिससे सब कुछ तहस-नहस हो गया और अब एक बार फिर वह खुद को राजनीति, सत्ता और अधूरी भावनाओं के खतरनाक जाल में खिंचता हुआ पाता है।

संचिता बसु, शानविका चौहान के रूप में और भी ज्यादा धाकड़, दमदार और शक्तिशाली बनकर उभरती हैं। सत्ता के बेरहम गलियारों से गुज़रते हुए वह नियमों को मानने से साफ़ तौर पर इंकार कर देती है, भले ही इसके लिए उसे इस रास्ते में रिश्तों की परिभाषा को ही क्यों न बदलना पड़े।
यह ट्रेलर इस सीज़न की एक ऐसी झलक दिखाता है, जो हाई-स्टेक्स पॉलिटिकल ड्रामे, सुलगते हुए बदले, इमोशनल टकराहट और टकरावों से भरा हुआ है। ;;जैसे ही सीतापुर महत्वाकांक्षा और विश्वासघात की रणभूमि बन जाता है, कुलदीप और शानविका खुद को एक ऐसे खेल के विपरीत छोर पर पाते हैं… जहाँ भरोसा बेहद नाज़ुक होता है और इरादे कभी वैसे नहीं होते जैसे दिखाई देते हैं। यह सीज़न जज़्बातों के उस तूफ़ान को और भी ज़्यादा गहरा करता है जिसने पहले सीज़न को एक मिसाल बनाया था, वही दिल का टूटना, वही बदले की आग और एक कमतर आंके गए कमजोर इंसान का हर दीवार लांघकर उभरना… लेकिन इस बार, यह खेल एक बहुत बड़े और कहीं ज़्यादा ख़तरनाक कैनवास पर रचा गया है।
इस बारे में संचिता बसु ने कहा कि “सीज़न 2 शानविका को एक ऐसे मोड़ पर ले जाता है जो जज़्बाती तौर पर अनकही और अप्रत्याशित है। वह अब पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत है, खुद को समेटकर रखने वाली और सतर्क है साथ ही लगातार इस उलझन में है कि जब खेल में सत्ता और धोखा शामिल हो जाए, तो फिर प्यार के असली मायने क्या रह जाते हैं। इस सीज़न में जिस चीज़ ने मुझे सबसे ज़्यादा रोमांचित किया, वो यह है कि यहाँ कुछ भी पूरी तरह सही या गलत नहीं है… हर इमोशन अपने साथ एक अंजाम लेकर आता है।
कुलदीप कुमार के रूप में वापसी कर रहे धवल ठाकुर ने इस अवसर पर कहा कि, “कुलदीप इस सीज़न में अपने अतीत का बोझ उठाता है। वह इमोशनल होने के साथ ही एक अजीब तरह के द्वंद्व में है, वह जो महसूस करता है और जो दुनिया उससे उम्मीद करती है, उसके बीच लगातार फंसा हुआ रहता है। यह ट्रेलर केवल एक झलक दिखाता है कि इस बार उनकी यात्रा जज्बाती और निजी हो जाती है। इस बार कहानी का दायरा भले ही बहुत बड़ा हो गया हो, लेकिन इसके जज़्बातों की जो बुनियाद और आत्मा है, उतनी ही सच्ची और ज़मीनी है।" 'ठुकरा के मेरा प्यार' – सीज़न 2 स्ट्रीम होगा 19 जून, 2026 से जियोहॉटस्टार पर।
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Supreme Court Judgment on Sex Work: देश में देहव्यापार (सेक्स वर्क) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि यदि कोई बालिग महिला अपनी मर्जी से और अकेले आजीविका चलाने के लिए यह कार्य करती है, तो उसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट (ITPA) का असली मकसद सेक्स वर्क को पूरी तरह प्रतिबंधित करना नहीं, बल्कि इसके व्यावसायिक दोहन और संगठित सिंडिकेट को रोकना है।
निजी आवास 'कोठा' नहीं
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने लगभग 298 पन्नों के इस ऐतिहासिक फैसले में कानून की एक नई लकीर खींची है। अदालत ने कहा कि यदि कोई महिला अपने जीवनयापन के लिए अकेले यह कार्य कर रही है, तो उसके घर को कानूनन ‘ब्रोथल’ (कोठा) नहीं माना जा सकता। अगर उस परिसर में कोई दूसरी सेक्स वर्कर या कोई बिचौलिया (दलाल) शामिल नहीं है, तो पुलिस केवल इस आधार पर वहां छापेमारी या कार्रवाई नहीं कर सकती।
व्यावसायीकरण पर रोक उद्देश्य
कोर्ट ने समझाया कि 1956 का यह कानून संगठित रूप से चलाए जा रहे अवैध धंधों और मानव तस्करी को रोकने के लिए है, न कि किसी के निजी जीवन को नियंत्रित करने के लिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कानून की धारा 7 और 8 की व्याख्या करते हुए यह भी साफ किया कि इस राहत का दायरा कहां सीमित हो जाता है।
अदालत ने कहा कि खुलेआम सार्वजनिक स्थलों, सड़कों या धार्मिक स्थलों के पास ग्राहकों को आकर्षित करना या देहव्यापार को प्रदर्शित करना इस कानून के तहत अब भी दंडनीय अपराध है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह कृत्य सार्वजनिक शालीनता और सामाजिक नैतिकता के दायरे का उल्लंघन करता है। लेकिन निजी दायरे में अपनी मर्जी से आजीविका चलाने वाली महिला पर यह कड़ाई लागू नहीं होती।
मर्जी के खिलाफ सुधार गृह में रखने पर सख्त निर्देश
इस फैसले में पुलिस और मजिस्ट्रेट की कार्यप्रणाली को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि किसी भी संदिग्ध ठिकाने पर छापेमारी के दौरान वहां मौजूद हर महिला को अपराधी या पीड़ित की तरह ट्रीट न किया जाए। मजिस्ट्रेट को सबसे पहले यह जांचना होगा कि महिला बालिग है या नहीं और क्या वह अपनी मर्जी से इस पेशे में है।
कोर्ट ने कहा कि जो बालिग महिलाएं स्वेच्छा से यह काम कर रही हैं, उन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ जबरन ‘रेस्क्यू’ करके सुधार गृहों या शेल्टर होम्स में कैद नहीं रखा जा सकता। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि राज्य के पास पुनर्वास की योजनाएं लाने का अधिकार जरूर है, लेकिन वह किसी भी बालिग नागरिक पर उसकी इच्छा के विरुद्ध सुधार या पुनर्वास को जबरन थोप नहीं सकता।
यह कानून मूल रूप से 1956 में पारित किया गया था, तब इसका नाम 'सप्रेशन ऑफ इम्मोरल ट्रैफिक इन विमेन एंड गर्ल्स एक्ट' (SITAL) था। वर्ष 1986 में इस कानून में बड़ा संशोधन किया गया और इसका नाम बदलकर 'इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट' (ITPA) कर दिया गया। इस संशोधन के तहत कानून के दायरे को और व्यापक बनाया गया, ताकि न सिर्फ महिलाओं, बल्कि पुरुषों और किसी भी लिंग के व्यक्ति के साथ होने वाली तस्करी और शोषण को इसके तहत रोका जा सके।
इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट?
यह कानून मूल रूप से 1956 में पारित किया गया था, तब इसका नाम 'सप्रेशन ऑफ इम्मोरल ट्रैफिक इन विमेन एंड गर्ल्स एक्ट' (SITAL) था। वर्ष 1986 में इस कानून में बड़ा संशोधन किया गया और इसका नाम बदलकर 'इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट' (ITPA) कर दिया गया। इस संशोधन के तहत कानून के दायरे को और व्यापक बनाया गया, ताकि न सिर्फ महिलाओं, बल्कि पुरुषों और किसी भी लिंग के व्यक्ति के साथ होने वाली तस्करी और शोषण को इसके तहत रोका जा सके।
भारत के कानून के तहत यदि कोई बालिग व्यक्ति (18 वर्ष से ऊपर) पूरी तरह से अपनी मर्जी (स्वेच्छा) से और अकेले अपने निजी दायरे में देहव्यापार करता है, तो वह सीधे तौर पर अपराध नहीं है। हालांकि एक्ट की धारा 7 और 8 के तहत किसी भी धार्मिक स्थल, स्कूल, अस्पताल या सार्वजनिक स्थान के 200 मीटर के दायरे में देहव्यापार का संचालन करना प्रतिबंधित है। सार्वजनिक स्थानों, सड़कों या गलियों में इशारे करके या खुलेआम ग्राहकों को आकर्षित करना या देहव्यापार का प्रदर्शन करना दंडनीय अपराध है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
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