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Home Loan EMI: सरफेसी एक्ट को हथियार बनाकर लोगों को निकाला जा रहा उनके घर से बाहर

Home Loan EMI: सरफेसी एक्ट को हथियार बनाकर लोगों को निकाला जा रहा उनके घर से बाहर

होम लोने की दो-तीन किस्तें बाकी होने पर भी बैंक और फाइनेंस देने वाली कंपनियां सरफेसी एक्ट के जरिए मकान को कब्जे में लेकर उसे नीलाम कर देती हैं। इंदौर शहर में ऐसी कई शिकायतें जिला प्रशासन के पास पहुंच रही हैं। इस दौरान फाइनेंसर किसी भी तरह की राहत देने को तैयार नहीं होते।

By Prashant Pandey

Publish Date: Fri, 06 Jun 2025 03:00:18 PM (IST)

Updated Date: Fri, 06 Jun 2025 03:07:58 PM (IST)

प्रेम जाट, नईदुनिया इंदौर। सरफेसी अधिनियम आमजन और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। यह कानून बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को ऋण न चुका पाने की स्थिति में ऋणी की संपत्ति को बगैर कोर्ट की अनुमति के जब्त कर बेचने की अनुमति देता है। अब फाइनेंसर इस अधिनियम का दुरुपयोग कर आमजन का आशियाना छीन रहे हैं।

दो या तीन किस्तें बाकी होने पर भी करोड़ों के मकान पर कब्जा कर बेच दिया जाता है। ऋणी को ओवरड्यू राशि जमा करने का अवसर भी नहीं देते हैं। इंदौर में ऐसे सैकड़ों लोग शिकायतें लेकर जिला प्रशासन के पास पहुंच रहे हैं। प्रशासन के हस्तक्षेप से कुछ मामलो में बकाया जमा कर दिया जाता है, लेकिन अधिकांश लोगों को यह सुविधा नहीं मिल पाती है।

फाइनेंसर किसी तरह की राहत देने को तैयार नहीं होते

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किस्तें बाकी होते ही फाइनेंसर ऑनलाइन भुगतान रोक देते हैं और सरफेसी अधिनियम के तहत मकान को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर देते हैं। वहीं पीड़ित राहत पाने के लिए परेशान होते रहते हैं, मगर फाइनेंसर किसी तरह की राहत देने की तैयार नहीं होते हैं।

ओवरड्यू राशि भी ऋणी से नहीं ली जाती है। ऋणी को बकाया राशि जमा करने का अवसर नहीं देकर सभी समाधान के रास्ते भी बंद कर दिए जाते हैं। जूनी इंदौर तहसीलदार प्रीति भिसे का कहना है कि सरफेसी एक्ट में हुए आदेश के अनुसार कुर्की की प्रक्रिया नियमानुसार की जाती है।

बकाया राशि नहीं की जाती है जमा

छोटी खजरानी निवासी शिवम गांगले का कहना है निजी फाइनेंस कंपनी से करीब साढ़े आठ लाख का लोन लिया था। व्यापार में परेशानी आने पर बीते साल कुछ किस्तें जमा नहीं कर पाए। मई में नोटिस मिलने के बाद से बकाया किस्तें भरने की कोशिश की जा रही है, लेकिन फाइनेंसर किस्तें जमा नहीं कर रहे। ऑनलाइन जमा सुविधा भी बंद कर दी है।

बकाया 85 हजार रुपये एकमुश्त जमा करना चाहता हूं, लेकिन फाइनेंसर राशि जमा करने की अपेक्षा मकान पर कब्जा करना चाहते हैं। शिवम का कहना है कि बीते छह माह की सभी किस्तें नकद में भरी जा रही है, लेकिन बकाया राशि जमा नहीं की जा रही है।

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नहीं दिया जा रहा समय

सांई श्रद्धा पैलेस कालोनी में भूखंड खरीदने वाले विनोद राठौर भी कुर्की की प्रक्रिया से परेशान हैं। उन्होंने भी निजी फाइनेंस कंपनी से लोन लिया था। किसी कारण कुछ किस्तें नहीं चुका पाए, तो कुर्की की प्रक्रिया शुरू हो गई। अब बकाया राशि जमा करना चाहते हैं, लेकिन फाइनेंसर कंपनी द्वारा राशि जमा नहीं की जा रही है।

सुनवाई के बाद कुर्की के आदेश होते हैं

बैंक द्वारा सरफेसी एक्ट की धारा 13/2 के तहत ऋणी को नोटिस जारी किए जाते हैं। नोटिस के 60 दिन बाद अपर कलेक्टर न्यायालय में प्रकरण लगाते हैं। यहां से सुनवाई के बाद कुर्की के आदेश होते हैं। यदि आदेश के बाद भी कोई ऋणी समय चाहता है या राशि जमा कराना चाहता है तो कलेक्टर के यहां आवेदन कर सकता है। – निशा डामोर, अपर कलेक्टर

कलेक्टर से की जा सकती है शिकायत

प्राइवेट फाइनेंसर द्वारा सर्वाधिक कब्जे के प्रकरण लगाए जाते हैं और इनके लोग ही मकानों को नीलामी में औने-पौने दाम पर खरीद लेते हैं। ऋणी यदि बकाया राशि जमा करना चाहता है, लेकिन बैंक या फाइनेंसर राशि नहीं ले रहे हैं तो कलेक्टर के यहां शिकायत की जा सकती है। एक पत्र बनाकर पत्र याचिका के रूप में उच्च न्यायालय को भी भेज सकते हैं। उच्च न्यायालय द्वारा पहले कई अच्छे निर्णय दिए गए हैं। – प्रमोद द्विवेदी, वरिष्ठ वकील

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