सुपर कॉरिडोर से करनावाद तक इंदौर-बैतूल हाईवे न केवल लोगों की राह आसान करेगा, बल्कि पर्यावरण के लिए भी मददगार साबित होगा। यह हाईवे देश का पहला जल संरक्षण आधारित हाईवे बनने जा रहा है।
300 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस 26 किलोमीटर लंबे मार्ग की खासियत इसका वैज्ञानिक जल प्रबंधन है। सड़क के दोनों ओर जल निकासी तंत्र, रिचार्ज पॉइंट और स्टॉर्म वॉटर चैंबर बनाए गए हैं, ताकि बारिश की एक-एक बूंद भूजल में समा सके। इसके लिए हाईवे के किनारे पांच बड़े तालाब भी तैयार किए गए हैं, जो 100 बीघा से अधिक क्षेत्र में पानी का संचयन करेंगे। इससे न केवल भूजल स्तर बढ़ेगा, बल्कि आसपास के किसानों को भी लाभ मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में भी भूजल स्तर में सुधार होगा।
ग्रामीणों की सुविधा के लिए दोनों ओर सर्विस रोड, 12 बड़े अंडरपास और 100 फीट चौड़े मार्ग बनाए गए हैं। छह बड़े पुल और 25 से अधिक पुलियों के निर्माण से आवागमन आसान होगा। इंदौर के एमआर-10 जंक्शन को इस हाईवे से जोड़ने के लिए चौड़े अंडरपास बनाए जा रहे हैं, जो अगले छह माह में तैयार हो जाएंगे।
26 किलोमीटर लंबे इस मार्ग का लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। तीन वर्ष पहले इस सड़क का निर्माण कार्य राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने शुरू किया था। वर्तमान में वाहनों को बैतूल हाईवे तक पहुंचने के लिए बायपास से देवगुराड़िया होकर जाना पड़ता है। इस 26 किलोमीटर सड़क के निर्माण से एक नया बायपास तैयार हो जाएगा और इंदौर-राऊ बायपास तथा देवगुराड़िया मार्ग पर यातायात का दबाव भी कम होगा। अगले साल तक यह सड़क बनकर तैयाार हो जाएगी।
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