उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। उज्जैन का नाम पहले अधिसूचना में लिखे जाने सहित अन्य बिंदुओं को याचिका में उठाया गया है। इसके अलावा अधिसूचना को भी याचिकाकर्ता ने चुनौती दी है। अब कोर्ट इस मामले में सुनवाई करेगी।
याचिकाकर्ता ने कहा कि मेट्रोपॉलिटन एरिया के गठन में कई महत्वपूर्ण प्रावधान व कानूनी पहलुओं को नजरअंदाज किया गया है। इसके अलावा नामकरण में इंदौर को प्राथमिकता नहीं दिए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है। याचिका में कहा गया कि इंदौर को प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहा जाता है।
सबसे ज्यादा राजस्व प्रदेश को इंदौर से मिलता है। इसके बावजूद इंदौर का नाम पीछे रखा गया है, जबकि इंदौर की आबादी 100 प्रतिशत एरिया में शामिल है, जबकि उज्जैन की 59 प्रतिशत आबादी शामिल रखी गई है। अब मामले की सुनवाई की जाएगी।
उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया में 16 हजार वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र शामिल किया गया है। इसमें इंदौर, उज्जैन, धार, शाजापुर, देवास सहित छह जिले शामिल किए गए हैं। हाल ही में इस एरिया में शामिल गांवों की अधिसूचना भी शासन ने जारी की है, जिसमें 38 तहसीलों के 2781 गांव जुड़े हैं।
शासन मेट्रोपॉलिटन सिटी का विकास अलग-अलग चरणों में करेगा। इंदौर का नाम एरिया में पीछे रखे जाने को लेकर इंदौर के कई लोग नाराज हैं। जल्दी ही इस मामले में आंदोलन की रणनीति भी बनाई जा रही है। हालांकि, इस मुद्दे पर शहर के जनप्रतिनिधि खामोश हैं। उनकी तरफ से इंदौर को प्राथमिकता नहीं दिए जाने पर कोई विरोध नहीं हुआ।
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