छत्रीबाग स्थित श्री लक्ष्मी वेंकटेश देवस्थान में चल रहे ब्रह्मोत्सव एवं रथयात्रा महोत्सव के दौरान भगवान वेंकटेश का अलौकिक स्वरूप देखने को मिला। प्रभु ने पुष्प बंगले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए। गुरुवार शाम भगवान वेंकटेश की भव्य रथयात्रा निकलेगी, जिसे श्रद्धालु अपने हाथों से खींचेंगे। रथ पर विराजमान होकर प्रभु नगर भ्रमण पर निकलेंगे। इससे पहले उन्हें कुंभकोणम से आई विशेष पोशाक धारण कराई जाएगी। भगवान वेंकटेश का आकर्षक श्रृंगार भी किया जाएगा।
बुधवार रात मंदिर परिसर में पुष्प महल में भगवान वेंकटेश चंद्र सिंहासन पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए। बेंगलुरु एवं दक्षिण भारत से आए कलाकारों ने इस पुष्प बंगले को तैयार किया। वे पिछले तीन दिनों से इसकी सजावट में जुटे थे। सजावट में लगभग चार हजार किलो फूलों का उपयोग किया गया। इसमें एक हजार किलो मोगरा, एक हजार किलो गुलाब, पांच सौ किलो कनेर, पांच सौ किलो जूही तथा 400 किलो रजनीगंधा शामिल रहे। पुष्पों से जय-विजय, गौ माता, हंस एवं मयूर की आकर्षक आकृतियां भी बनाई गईं।
रथयात्रा शाम को श्री लक्ष्मी वेंकटेश देवस्थान से प्रारंभ होकर विभिन्न मार्गों से होते हुए पुनः मंदिर पहुंचेगी। यात्रा छत्रीबाग, सिलावटपुरा, शीतला माता बाजार, गोराकुंड, शक्कर बाजार, बर्तन बाजार एवं बजाज खाना चौक से होकर गुजरेगी। रथयात्रा के स्वागत के लिए जगह-जगह मंच लगाए गए हैं। 500 से अधिक स्थानों पर पुष्पवर्षा की जाएगी।
रथयात्रा के दौरान कार्यकर्ता यातायात एवं अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालेंगे। 200 से अधिक कार्यकर्ता एक जैसी कुर्ता-पायजामा वेशभूषा में नजर आएंगे। रथयात्रा में नासिक से आए युवक-युवतियां सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। इसके अलावा भजन मंडलियां तथा विभिन्न देवी-देवताओं की आकर्षक झांकियां भी शामिल रहेंगी। युवा घोड़ों पर भगवा पताकाएं लेकर यात्रा की शोभा बढ़ाएंगे। रथयात्रा में साधु-संत भी शामिल होंगे।
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