इंदौर में कर्बला मेले की अनुमति को लेकर निगमायुक्त और मेयर के बीच तालमेल की कमी नजर आई। मेले की जमीन का केस जीतने के बाद इस जमीन पर नगर निगम का स्वामित्व है। हर साल ताजिए ठंडे करने के बाद मैदान में मेला लगाया जाता था। इस साल मेले की अनुमति मेयर की ओर से नहीं दी गई थी। फिलहाल मेयर पुष्यमित्र भार्गव शहर से बाहर हैं।
इस बीच आयोजकों ने निगमायुक्त क्षितिज सिंघल से मुलाकात की और मेले की अनुमति ले ली। इसे लेकर देर शाम मेयर पुष्यमित्र भार्गव की अध्यक्षता में मेयर-इन-काउंसिल की वर्चुअल बैठक हुई, जिसमें धोबी घाट पर मेले की अनुमति निरस्त करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। परिषद ने स्पष्ट किया कि स्थल पर केवल ताजिए ठंडे करने की अनुमति रहेगी।
महापौर ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली थी कि ताजिए ठंडे करने के साथ मेले के आयोजन की भी अनुमति दे दी गई है। इसके बाद मामले की समीक्षा के लिए विशेष बैठक बुलाई गई।
बैठक में पिछले वर्ष के अनुभवों पर चर्चा हुई, जिसमें पाया गया कि आयोजकों ने अनुमति की शर्तों का पालन नहीं किया था। साथ ही मेले से संबंधित निर्धारित राशि भी नगर निगम में जमा नहीं कराई गई थी।
इन परिस्थितियों को देखते हुए मेयर-इन-काउंसिल ने सख्त रुख अपनाते हुए मेले की अनुमति तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का निर्णय लिया। परिषद ने कहा कि धोबी घाट पर केवल धार्मिक परंपरा के तहत ताजिए ठंडे करने की अनुमति दी जाएगी।
उधर, शाम को निगमायुक्त से अनुमति मिलने के बाद कर्बला इंतजामिया कमेटी ने मौके पर मेले की तैयारियां शुरू कर दी थीं।आपको बता दें कि कर्बला मैदान में एक हनुमान प्रतिमा पेड़ के नीचे स्थापित है और वहां एक चबूतरा भी बना हुआ है। हर मंगलवार को वहां आरती होती है। मेले के दौरान जब मंगलवार पड़ता था, तब विवाद की स्थिति पैदा हो जाती थी। लगभग दस वर्ष पहले दो बार धारा 144 लागू कर प्रशासन ने मेला स्थल खाली कराकर पूजा संपन्न कराई थी।
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