इस चालू सीजन में आम जनता को तेज गर्मी की मार से राहत मिलती हुई नजर नहीं आ रही है। शहर के दिन के तापमान में भले ही बहुत मामूली गिरावट दर्ज की जा रही है, लेकिन लगातार तीखी धूप निकलने और रात का तापमान काफी अधिक बने रहने के कारण दोपहर के समय सड़कों पर लू जैसी गंभीर स्थिति निर्मित हो रही है। रविवार के दिन शहर का अधिकतम पारा 40.9 डिग्री सेल्सियस पर दर्ज किया गया, जबकि शनिवार की रात का न्यूनतम तापमान 28.2 डिग्री सेल्सियस रहा।
इससे ठीक एक दिन पहले शनिवार को अधिकतम तापमान 41 सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ था, जो सामान्य औसत से एक डिग्री अधिक पाया गया था। हालांकि शुक्रवार को यही तापमान 41.4 डिग्री सेल्सियस पर था। वहीं शुक्रवार की रात का न्यूनतम तापमान 27.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य से दो डिग्री ज्यादा रहा। इस बीच आज से नौतपा की औपचारिक शुरुआत होने जा रही है और वर्तमान में चल रही तेज ठंडी हवाओं के चलते मौसम विभाग को यह उम्मीद है कि आने वाले दिनों में तापमान में कुछ कमी आएगी। केवल इंदौर ही नहीं बल्कि प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों में भी भीषण गर्मी का दौर लगातार जारी है।
प्री मानसून गतिविधियों का अभाव
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल मई के महीने में शहर में करीब 8 इंच के आसपास भारी बारिश दर्ज की गई थी, जिसके विपरीत इस साल मई का महीना अब तक पूरी तरह सूखा रहा है और अब तक पानी की एक बूंद भी नहीं गिरी है। आमतौर पर वातावरण के मिजाज में बड़ा बदलाव लाने वाली प्री-मानसून गतिविधियां बीस मई के बाद से मैदानी इलाकों में सक्रिय होने लगती हैं, लेकिन इस वर्ष वर्तमान समय तक ऐसा कोई भी प्रभावी और मजबूत वेदर सिस्टम सक्रिय नहीं हो पाया है। इसी मुख्य वजह से 8 मई से लेकर अब तक लगातार शहर का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के स्तर से ऊपर ही बना हुआ है जिससे गर्मी का असर कम नहीं हो रहा है।
नौतपा के दौरान राहत की उम्मीद
मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार नौतपा की समयावधि के दौरान अधिकतम तापमान के 43 से 44 डिग्री सेल्सियस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने की संभावना बेहद कम नजर आ रही है। मौसम विशेषज्ञों का नया अनुमान है कि इस बार नौतपा के दौरान इंदौर का अधिकतम तापमान 39 से 41 डिग्री सेल्सियस के दायरे के बीच ही सीमित बना रहेगा, जिससे आम लोगों को भीषण लू जैसी जानलेवा स्थिति से कुछ हद तक राहत मिल सकती है। वर्षा ऋतु का आधिकारिक तौर पर आगमन एक जून से स्वीकार किया जाता है और सामान्य परिस्थितियों में मई के अंतिम सप्ताह में कुछ स्थानों पर हल्की प्री-मानसून बारिश की फुहारें शुरू हो जाती हैं, परंतु इस बार पूरा मई का महीना लगभग पूरी तरह से सूखा बीतने की प्रबल आशंका है। राहत की बात यह है कि जून के पहले सप्ताह से आसमान में बादलों की आवाजाही तेजी से बढ़ेगी, जिससे जून के शुरुआती दिनों में ही गरज-चमक की स्थिति बनने के साथ हल्की बारिश होने या बौछारें पड़ने की अच्छी संभावना जताई जा रही है।
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