इंदौर के वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉ. ओ.पी. अग्रवाल ने शहर में पत्रकारों से चर्चा के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक दावा किया है। उन्होंने वैश्विक स्तर की विभिन्न रिसर्च रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2050 तक दुनिया का हर दूसरा बच्चा आंखों से जुड़ी किसी न किसी गंभीर परेशानी का सामना कर रहा होगा। डॉ. अग्रवाल के अनुसार, बच्चों में मोबाइल फोन देखने की लगातार बढ़ती लत और घरों से बाहर जाकर खेलने की आदतों में आई भारी कमी इसके मुख्य कारण हैं। इन वजहों से बच्चों की आंखों की रोशनी बेहद तेजी से कम हो रही है, जो आने वाले समय में संपूर्ण मेडिकल साइंस और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनने जा रहा है।
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बदलती जीवनशैली, एसी और डायबिटीज से बढ़ रहा है ड्राई आई का खतरा
नेत्र रोग विशेषज्ञों की इस परिचर्चा में मोबाइल एडिक्शन और कंप्यूटर के अत्यधिक उपयोग के साथ-साथ तेजी से बदल रही लाइफस्टाइल के दुष्प्रभावों पर भी विस्तार से बात की गई। डॉ. ओ.पी. अग्रवाल ने बताया कि आधुनिक घरों और दफ्तरों में लगातार चलने वाले एयर कंडीशनर तथा तेजी से फैल रही डायबिटीज की बीमारी के कारण लोगों में आंखों के सूखेपन यानी ड्राई आई की समस्या बहुत तेजी से पैर पसार रही है। उन्होंने सचेत किया कि भविष्य में डायबिटीज एक ऐसा प्रमुख कारण बनने वाला है, जिसकी वजह से सबसे ज्यादा लोगों की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली जाएगी। इस महत्वपूर्ण चर्चा में डॉ. रोहित अग्रवाल, डॉ. पलक अग्रवाल और डॉ. रक्षित अग्रवाल ने भी उपस्थित होकर आंखों की सेहत से जुड़े विभिन्न तकनीकी विषयों पर अपनी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
एक महीने का विशेष सेवा अभियान
इस अवसर पर डॉ. ओ.पी. अग्रवाल ने संस्थान की एक बड़ी उपलब्धि साझा करते हुए बताया कि रोहित आई हॉस्पिटल ने चिकित्सा क्षेत्र में अपनी स्थापना के 35 गौरवशाली वर्ष सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक 35वीं वर्षगांठ को समाज के प्रति आभार व्यक्त करने के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत 14 जुलाई से 15 अगस्त 2026 तक पूरे एक महीने का विशेष 35वीं वर्षगांठ सेवा अभियान आयोजित किया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत आम जनता को राहत देने के लिए विशेष रियायती दरों पर नेत्र परामर्श और विस्तृत जांच शिविरों का आयोजन किया जाएगा। डॉक्टरों का मानना है कि चिकित्सा विज्ञान में लगातार बदलाव हो रहे हैं और आधुनिक तकनीकों का समावेश आज की सबसे बड़ी जरूरत है। जनता के 35 वर्षों के अटूट विश्वास का सम्मान करने के लिए ही यह अभियान शुरू किया गया है।
अब तक एक लाख से अधिक जरूरतमंदों का किया जा चुका है मुफ्त इलाज
अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व को निभाना हमेशा से उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। इसी सेवा भावना के परिणामस्वरूप संस्थान द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में लगाए गए नि:शुल्क नेत्र परीक्षण शिविरों के माध्यम से अब तक 1 लाख से अधिक लोगों की आंखों की सफल जांच की जा चुकी है। इसके साथ ही, लगभग 10,000 से अधिक आर्थिक रूप से कमजोर और पिछड़े वर्ग के मरीजों की या तो पूरी तरह नि:शुल्क अथवा बेहद रियायती दरों पर सफल नेत्र सर्जरी की गई है। संस्थान ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों तक अत्याधुनिक नेत्र चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है, और इसके साथ ही नेत्रदान व नेत्र स्वास्थ्य से जुड़ी जागरूकता फैलाने में भी सक्रिय योगदान दे रहा है।
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