इंदौर के जिंसी क्षेत्र में विकास कार्यों को गति देने के लिए स्थानीय निवासियों ने एक अनूठी मिसाल पेश की है। क्षेत्र की दूसरी प्रस्तावित सड़क का निर्माण कार्य सुनिश्चित करने के लिए नागरिकों ने अपने मकानों के बाधक हिस्सों को खुद ही तोड़ना शुरू कर दिया है। वर्तमान में क्षेत्र के लगभग चालीस मकानों में भूस्वामियों द्वारा स्वयं तोड़फोड़ की जा रही है। इस सकारात्मक पहल को देखते हुए सड़क मार्ग में आने वाले अन्य मकान मालिक भी अपना निर्माण हटाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो गए हैं।
मास्टर प्लान के तहत दो सड़कों का निर्माण प्रस्तावित
नगर निगम द्वारा जिंसी क्षेत्र में मास्टर प्लान के प्रावधानों के अनुसार दो प्रमुख सड़कों के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इनमें से पहली सड़क जिंसी चौराहा से लेकर महारानी लक्ष्मीबाई प्रतिमा तक बनाई जा रही है। इस मार्ग को पूरी तरह से क्लीयर करने के लिए नगर निगम ने पिछले दिनों सड़क चौड़ीकरण की राह में बाधक बन रहे अवैध और अतिरिक्त निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की थी। इस पहली सड़क के मामले में भी नगर निगम की औपचारिक कार्रवाई से पहले ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने स्वेच्छा से अपने निर्माण हटा लिए थे। अब इस मार्ग पर सड़क निर्माण के लिए पूरा रास्ता साफ हो चुका है, जिसके बाद नगर निगम ने ठेकेदार के माध्यम से खुदाई का कार्य भी प्रारंभ करवा दिया है।
नेमीनाथ जैन मंदिर से जिंसी चौराहे तक बनेगी दूसरी सड़क
जिंसी क्षेत्र के अंतर्गत दूसरी प्रस्तावित सड़क नेमीनाथ जैन मंदिर से शुरू होकर जिंसी चौराहे तक जाएगी। इस सड़क के निर्माण को लेकर नगर निगम द्वारा संबंधित मकान मालिकों को नोटिस जारी करने के साथ ही सेंट्रल लाइन डालने और तोड़फोड़ के दायरे को चिह्नित करने के लिए निशान लगाने का कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। इसके बाद से ही निगम प्रशासन लगातार क्षेत्र के नागरिकों से यह आग्रह कर रहा था कि वे स्वयं ही अपने बाधक निर्माणों को हटाने का कार्य कर लें। अधिकारियों की इसी समझाइश और पहल के परिणामस्वरूप अब तक करीब चालीस मकानों में लोगों ने खुद ही हथौड़े चलाकर निर्माण हटाना शुरू कर दिया है।
जनहित में मास्टर प्लान की चौड़ाई 80 से घटाकर 60 फीट की गई
नगर निगम के इस सड़क प्रोजेक्ट के प्रभारी अधिकारी ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस पूरे चिन्हित क्षेत्र में कुल 123 मकानों में तोड़फोड़ की जानी है। इस इलाके में बहुत ही छोटे आकार के मकान बने हुए हैं, यही मुख्य वजह है कि प्रभावित होने वाले मकानों की संख्या यहां काफी ज्यादा नजर आ रही है। शुरुआत में मास्टर प्लान के मुताबिक इस सड़क की चौड़ाई 80 फीट तय की गई थी। हालांकि, क्षेत्र के नागरिकों की बेहद घनी आबादी और उनकी विशेष मांग को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने संवेदनशीलता दिखाई और यहां केवल 60 फीट चौड़ाई में ही सड़क निर्माण करने का निर्णय लिया। नगर निगम के इस फैसले के परिणामस्वरूप बहुत सारे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के निर्माण पूरी तरह से टूटने से बच गए हैं।
निगम अधिकारियों की व्यक्तिगत समझाइश और मशीन के नुकसान का डर
सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे बचे हुए निर्माणों के मालिकों ने भी अब खुद ही आगे बढ़कर ढांचों को हटाने और नगर निगम के विकास कार्य में सहयोग करने की पहल शुरू कर दी है। नगर निगम के आला अधिकारियों का मानना है कि अगले एक से दो दिनों के भीतर शेष बचे हुए मकानों के मालिक भी अपने स्तर पर निर्माण को तुड़वाना प्रारंभ कर देंगे। इसके लिए निगम की टीमें एक-एक मकान मालिक से व्यक्तिगत रूप से संपर्क साध रही हैं और उनसे निर्माण हटाने का विनम्र आग्रह कर रही हैं। इन संवादों के दौरान मकान मालिकों को यह व्यावहारिक बात भी समझाई जा रही है कि यदि वे खुद अपने हाथों से निर्माण नहीं हटाएंगे, तो अंततः नगर निगम की भारी पोकलेन और जेसीबी मशीनों को आकर कार्रवाई करनी होगी। स्थानीय लोग भी इस बात से भली-भांति वाकिफ हैं कि यदि निगम की मशीनों द्वारा बलपूर्वक निर्माण तोड़ा गया, तो झटके के कारण उनके मकान का बाकी हिस्सा भी बेहद कमजोर हो जाएगा। इसी सुरक्षात्मक सोच के चलते पूरे क्षेत्र में इस समय मलबे के ढेर नजर आने लगे हैं। लोग मजदूर चौक से विशेष रूप से कुशल मजदूरों को बुलाकर उनके माध्यम से सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से अपने आशियानों के बाधक हिस्सों को तुड़वा रहे हैं।
वरिष्ठ नेता कृपाशंकर शुक्ला ने भी सहयोग किया
इस पूरे घटनाक्रम में खास बात यह है कि इस क्षेत्र में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पंडित कृपाशंकर शुक्ला का भी निवास स्थान आता है। जनहित और शहर के विकास को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने भी अपने मकान के उस हिस्से को तुड़वाना शुरू कर दिया है जो सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहा था। पिछले दिनों जब नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे क्षेत्र का मैदानी दौरा करने पहुंचे थे, तब शुक्ला ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा था कि वे दो से तीन दिनों के भीतर स्वयं ही अपना निर्माण तोड़ना शुरू कर देंगे। नगर निगम के अधिकारियों से किए गए इसी वादे के अनुरूप उन्होंने अपने वादे को निभाते हुए काम शुरू करवा दिया है। क्षेत्र के एक इतने बड़े और रसूखदार नेता द्वारा खुद आगे बढ़कर अपना मकान तोड़े जाने के कारण स्थानीय नागरिकों के बीच एक बेहद सकारात्मक संदेश गया है, जिसने पूरे क्षेत्र में स्वयं ही निर्माण हटाने का एक सहयोगात्मक माहौल तैयार कर दिया है।
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