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Indore News: इंदौर से उज्जैन जाने के लिए तीन सड़कों का निर्माण, चौथी सड़क का काम होल्ड पर

Indore News: इंदौर से उज्जैन जाने के लिए तीन सड़कों का निर्माण, चौथी सड़क का काम होल्ड पर

सिंहस्थ में सबसे अधिक भक्त इंदौर होते हुए उज्जैन जाएंगे। प्रयागराज महाकुंभ के दौरान कुंभ क्षेत्र से जुड़े मार्गों पर हुए ट्रैफिक जाम को देखते हुए इंदौर से उज्जैन जाने के लिए तीन मार्ग तैयार किए जा रहे हैं। चौथा मार्ग भानगढ़ से होकर बनना था, लेकिन फिलहाल उसे होल्ड पर रखा गया है।

इंदौर से उज्जैन जाने के लिए सबसे प्रमुख सड़क इंदौर-उज्जैन सिक्स-लेन रोड है। इसका लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। सांवेर और उससे आगे के हिस्सों में पुलों का निर्माण जारी है। यह सिक्स-लेन सड़क बनने के बाद इंदौर से उज्जैन की यात्रा 35 से 40 मिनट में पूरी की जा सकेगी, जबकि पहले इसमें एक घंटे से अधिक समय लगता था। इस सड़क के निर्माण पर एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत आई है। मौजूदा फोर-लेन सड़क को सिक्स-लेन में विकसित किया गया है। पिछले सिंहस्थ के दौरान इसी मार्ग को फोर-लेन बनाया गया था।

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इसके अलावा इंदौर के हातोद से चंद्रावतीगंज होते हुए उज्जैन तक एक ग्रीनफील्ड सड़क बनाई जा रही है। इसका निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है। सड़क निर्माण के लिए किसानों ने काफी विरोध किया था, लेकिन मुआवजे से जुड़े प्रावधानों में बदलाव के बाद निर्माण कार्य शुरू हो गया है। यह सड़क उज्जैन के चिंतामन गणेश मार्ग से जुड़ेगी। इसके अलावा इंदौर से देवास होते हुए उज्जैन जाने वाले मार्ग का भी सिंहस्थ के दौरान व्यापक उपयोग होगा। इस मार्ग को भी फोर-लेन बनाया गया है। बड़ी संख्या में लोग इंदौर आने-जाने के लिए इस मार्ग का उपयोग कर रहे हैं।

इंदौर से उज्जैन को जोड़ने के लिए भानगढ़ (चंद्रगुप्त मौर्य प्रतिमा चौराहा) से इंदौर-देवास हाईवे को जोड़ने वाली एक सड़क भी प्रस्तावित है। सरकार ने इस परियोजना को नए सिरे से परीक्षण के लिए लोक निर्माण विभाग के पास भेजा है। उज्जैन की तीन दिशाओं से बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध होने के कारण इस परियोजना को फिलहाल होल्ड पर रखा गया है।

इस सड़क के निर्माण पर लगभग 150 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह सड़क 40 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित थी। मार्ग का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध है, लेकिन शेष 30 प्रतिशत हिस्से की चौड़ाई में अतिक्रमण है। इन्हें हटाने के लिए सरकार को भूमि अधिग्रहण के साथ मुआवजा भी देना पड़ता, इसलिए परियोजना की प्रगति प्रभावित हुई है।

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