इंदौर शहर में गहराते जल संकट को लेकर आज जनता का आक्रोश सड़कों पर फट पड़ा। नगर निगम के 22 जोन कार्यालयों पर विरोध प्रदर्शन हुए। लोगों ने मटके फोड़े और अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर नगर निगम प्रशासन और भारतीय जनता पार्टी का घेराव किया। नगर निगम मुख्यालय पर कांग्रेसी धरने पर बैठ गए और उन्हें रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल लगाया गया। शहर में पानी की किल्लत और अव्यवस्थित वितरण व्यवस्था के विरोध में कांग्रेस ने बड़े आंदोलन की रणनीति तैयार की थी। गुरुवार को पूरे शहर में इसका व्यापक असर देखने को मिला। इस आंदोलन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम के सभी 22 जोनल कार्यालयों का घेराव किया और पानी की समस्या के प्रति प्रशासन को जगाने के लिए मटके फोड़कर अपना विरोध दर्ज करवाया।
आधी आबादी बूंद-बूंद पानी को तरसी, गंदे पानी की सप्लाई से जनता में आक्रोश
इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए कहा कि निगम प्रबंधन की नाकामियों के कारण आज पूरा शहर भीषण जल संकट के दौर से गुजर रहा है। चौकसे के अनुसार, शहर की लगभग आधी आबादी तक नर्मदा का पानी आज भी नहीं पहुंच पा रहा है। जिन इलाकों में पाइपलाइन मौजूद है और पानी की सप्लाई हो भी रही है, वहां भी स्थिति बेहद खराब है। वहां न तो पानी का दबाव पर्याप्त है और न ही तय समय सीमा के अनुसार आपूर्ति की जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी उजागर किया कि शहर के कई क्षेत्रों में लंबे समय से गंदा और दूषित पानी आने की समस्या बनी हुई है। उन्होंने बेहद कड़े लहजे में आरोप लगाया कि दूषित पानी के कारण 35 लोगों की मौत हो जाने जैसी गंभीर घटना के बाद भी नगर निगम प्रशासन ने स्थिति में सुधार के लिए कोई ठोस या प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं।
भाजपा के 27 साल के निगम शासन की खुली पोल
जल संकट के इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी के दीर्घकालिक स्थानीय शासन को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि नगर निगम में भाजपा के पिछले 27 वर्षों के निरंतर शासन के बाद भी शहर के प्रत्येक नागरिक तक नर्मदा का जल पहुंचाने की बुनियादी व्यवस्था क्यों नहीं की जा सकी। चिंटू चौकसे ने पूर्व के दावों की याद दिलाते हुए कहा कि जब नर्मदा परियोजना के तीसरे चरण की शुरुआत की गई थी, तब प्रशासन और सत्ताधारी दल द्वारा यह बड़े-बड़े दावे किए गए थे कि यह परियोजना साल 2040 तक की अनुमानित आबादी के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने में पूरी तरह सक्षम रहेगी। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है और वर्तमान में साल 2026 की आबादी को भी दैनिक उपयोग के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है, जिससे सारे दावों की पोल खुल गई है।
सूखे बोरिंग और खराब मोटर ने बढ़ाई मुसीबत, ठेका व्यवस्था पर उठाए सवाल
कांग्रेस ने शहर के उन क्षेत्रों की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की है जहां अभी तक नर्मदा की पाइपलाइन नहीं बिछाई जा सकी है। इन इलाकों में रहने वाले लोग पूरी तरह से बोरिंग के पानी पर निर्भर हैं। भीषण और तेज गर्मी के कारण वर्तमान में कई क्षेत्रों के बोरिंग सूख चुके हैं या फिर उनकी मोटरें खराब हो गई हैं। चौकसे ने आरोप लगाया कि नगर निगम के नियंत्रण वाले सरकारी बोरिंगों की स्थिति निजी बोरिंगों से भी ज्यादा बदतर है। उन्होंने नगर निगम की ठेका प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूरे शहर की मोटरों को सुधारने का जिम्मा केवल एक ही ठेकेदार को सौंप दिया गया है। वह ठेकेदार भी अब काम छोड़ने की बात कह चुका है, लेकिन इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन ने समय रहते कोई वैकल्पिक या दूसरी व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की, जिससे आम जनता की परेशानी और ज्यादा बढ़ गई है।
जल वितरण में वीआईपी संस्कृति का आरोप, महंगे टैंकर खरीदने को मजबूर लोग
आंदोलन की रूपरेखा साझा करते हुए कांग्रेस ने नगर निगम पर जल वितरण में पक्षपात और असमानता बरतने का बड़ा आरोप लगाया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि शहर में पानी का बंटवारा समान रूप से नहीं हो रहा है। कुछ रसूखदार और वीआईपी क्षेत्रों में बहुत लंबे समय तक और अत्यधिक दबाव के साथ पानी की सप्लाई की जा रही है, जबकि दूसरी तरफ शहर की आम जनता पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रही है और परेशान हो रही है। इस अव्यवस्था के कारण आम नागरिकों को अपनी जेब ढीली कर निजी टैंकरों से बहुत महंगे दामों पर पानी खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। दूसरी ओर, पार्षदों को जनता की सेवा के लिए जो सरकारी टैंकर उपलब्ध कराए गए हैं, वे भी हाइड्रेंट बंद होने के कारण पर्याप्त पानी नहीं भर पा रहे हैं क्योंकि शहर के कई प्रमुख हाइड्रेंट इस समय बंद पड़े हैं।
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