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Indore News: जेल के अंदर बनी हनीट्रैप की साजिश, कई बड़े व्यापारियों-नेताओं को फंसाया, करोड़ों वसूले

Indore News: जेल के अंदर बनी हनीट्रैप की साजिश, कई बड़े व्यापारियों-नेताओं को फंसाया, करोड़ों वसूले

इंदौर के बहुचर्चित हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग कांड में पुलिस की विस्तृत जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह ठाकुर उर्फ चिंटू ठाकुर से एक करोड़ रुपये की मोटी रंगदारी मांगने वाले इस शातिर गिरोह की मुख्य सूत्रधार भोपाल की रहने वाली श्वेता विजय जैन बताई जा रही है। पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि श्वेता जैन और अवैध शराब की तस्करी के मामलों से जुड़ी अलका दीक्षित की पहली मुलाकात जिला जेल के भीतर हुई थी। इसी दौरान दोनों महिलाओं के बीच संपर्क स्थापित हुए और वहीं पर इस पूरे हनीट्रैप नेटवर्क को संचालित करने की अंतिम रूपरेखा तैयार की गई थी।

क्राइम ब्रांच द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जिला जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद दोनों महिला आरोपियों ने मिलकर बड़े राजनेताओं, रसूखदार कारोबारियों और समाज के प्रभावशाली लोगों को हुस्न के जाल में फंसाकर ब्लैकमेलिंग और अवैध उगाही का धंधा बड़े पैमाने पर शुरू कर दिया। पुलिस अधिकारियों का पुख्ता दावा है कि यह गिरोह पिछले दो वर्षों से लगातार सक्रिय था और इस दौरान कई हाईप्रोफाइल व्यक्तियों को अपनी साजिश का शिकार बना चुका है। हालांकि, समाज में बदनामी और प्रतिष्ठा धूमिल होने के डर से इस गिरोह के कई पीड़ित खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं व न ही पुलिस में शिकायत दर्ज करा रहे हैं।

अदालत ने पांचों आरोपियों को छह दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा

डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम) राजेश त्रिपाठी के मुताबिक पुलिस टीम ने मंगलवार को मुख्य आरोपी श्वेता जैन, अलका दीक्षित, जयदीप दीक्षित, लाखन चौधरी और जितेंद्र पुरोहित को स्थानीय अदालत के समक्ष पेश किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने सभी संबंधित आरोपियों को छह दिन की पुलिस रिमांड पर क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है। ताकि आगे की सघन पूछताछ की जा सके। पुलिस अभिरक्षा में की गई पूछताछ के दौरान श्वेता जैन ने खुद स्वीकार किया कि वर्ष 2019 के बहुचर्चित हनीट्रैप मामले में जेल में रहने के दौरान उसकी मुलाकात अलका दीक्षित से हुई थी। उस समय अलका दीक्षित शराब तस्करी के एक संगीन मामले में जेल की सलाखों के पीछे बंद थी। दोनों की दोस्ती जेल के भीतर ही गहरी हुई और वहां से रिहा होने के बाद भी उनका आपस में लगातार संपर्क बना रहा।

फंसाओ और वसूली करो की तर्ज पर काम करता था शातिर गैंग

जांच अधिकारियों के अनुसार अलका दीक्षित पहले से ही अनैतिक गतिविधियों और अवैध शराब की तस्करी के धंधे में लिप्त रही है। पुलिस का आरोप है कि जेल से बाहर आने के बाद श्वेता जैन के सीधे दिशा-निर्देशों पर अलका दीक्षित रसूखदार लोगों को अपने जाल में फंसाने का काम करती थी और बाद में उनके आपत्तिजनक फोटो व वीडियो तैयार कर ब्लैकमेलिंग के जरिए मोटी रकम वसूल की जाती थी। जांच दल के मुताबिक यह गैंग मुख्य रूप से राजनेताओं, बड़े व्यापारियों और प्रशासनिक रसूख रखने वाले लोगों को अपना निशाना बनाता था। क्राइम ब्रांच को यह भी गहरा संदेह है कि वर्ष 2019 के मूल हनीट्रैप कांड से जुड़े कुछ अन्य संदिग्ध लोग भी इस नए नेटवर्क के साथ लगातार संपर्क में बने हुए थे।

कथित नेता का फर्जी चोला पहनकर शिकार ढूंढता था लाखन

पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मामले का एक अन्य आरोपी लाखन चौधरी मूल रूप से औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर का रहने वाला है। वह खुद को एक राजनैतिक दल का कथित वरिष्ठ पदाधिकारी बताकर लोगों पर धौंस जमाता था। वह मुख्य रूप से प्रॉपर्टी के कारोबार की आड़ लेकर रसूखदार लोगों से जान-पहचान बढ़ाता था। फिर उनमें से संभावित शिकार तलाश कर गिरोह की महिला सदस्यों को इसकी जानकारी देता था। पुलिस जांच में ये गंभीर तथ्य सामने आया है कि शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह उर्फ चिंटू ठाकुर को अपने जाल में फंसाने के बाद अलका दीक्षित ने मध्य प्रदेश पुलिस की इंटेलिजेंस शाखा में पदस्थ प्रधान आरक्षक विनोद शर्मा से कानूनी और तकनीकी सलाह ली थी। इतना ही नहीं, अलका ने पीड़ित कारोबारी के कुछ गोपनीय फोटो भी उक्त पुलिसकर्मी के मोबाइल पर साझा किए थे।

इंटेलिजेंस के प्रधान आरक्षक और कथित पत्रकार की भूमिका जांच के घेरे में

क्राइम ब्रांच की पूछताछ के दौरान इंटेलिजेंस शाखा के प्रधान आरक्षक विनोद शर्मा ने अलका दीक्षित के साथ अपने निरंतर संपर्क में होने की बात को स्वीकार कर लिया है। पुलिस को संदेह है कि सरकारी पद पर रहते हुए वह आरोपियों को ब्लैकमेलिंग करने और पीड़ितों पर मानसिक दबाव बनाने के कानूनी दांव-पेंच व तरीके सिखा रहा था। इसके अलावा देवास के रहने वाले जितेंद्र पुरोहित का नाम भी जांच में प्रमुखता से आया है, जो खुद को एक मीडियाकर्मी के रूप में पेश करता था। पुलिस का कहना है कि जितेंद्र पुरोहित ने भी अलका दीक्षित को डरा-धमकाकर पीड़ितों से बड़ी रकम वसूलने के विभिन्न तरीके सुझाए थे और वह इस पूरे आपराधिक षड्यंत्र में बराबर का भागीदार था।

दिल्ली के बड़े राजनेताओं को भी ब्लैकमेल करने की रची गई साजिश

मास्टरमाइंड श्वेता विजय जैन ने पूछताछ में खुलासा किया है कि उसका नेटवर्क केवल मध्य प्रदेश तक ही सीमित नहीं था, बल्कि उसने देश की राजधानी दिल्ली के कई बड़े राजनेताओं को भी अपने जाल में फंसाने की पुरजोर कोशिश की थी। पुलिसिया पूछताछ में उसने कई बड़े राजनीतिक राज खोले हैं। उसने सबसे पहले रेशू नाम की एक शातिर महिला का जिक्र किया, जो अपनी ऊंची पहुंच के बल पर बेहद आसानी से बड़े नेताओं और रसूखदार लोगों के सरकारी आवासों तक पहुंच बना लेती थी। श्वेता ने पुलिस को बताया कि रेशू ने बीते दिनों दीपावली के त्योहार के दौरान दिल्ली के एक नामचीन नेता से करीब डेढ़ करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि वसूली थी। इस अवैध राशि से उसने बाद में आलीशान लग्जरी कारें खरीदीं और रियल एस्टेट प्रॉपर्टी में बड़ा निवेश किया। इसके बाद उसने निमाड़ क्षेत्र के कुछ स्थानीय नेताओं के भी गोपनीय वीडियो बनाने का काम शुरू कर दिया था।

नेताओं से करोड़ों वसूलने की तैयारी थी

श्वेता के दावों के अनुसार, रेशू किसी भी बड़े नेताओं को बहुत कम समय में अपने विश्वास में ले लेती थी। मध्य प्रदेश कांग्रेस का एक बेहद बड़ा और कद्दावर नेता भी उसके सीधे संपर्क में था और कुछ आपत्तिजनक वीडियो क्लिप्स उन तक पहुंच भी चुकी थीं। अब पुलिस की विशेष टीमें फरार आरोपी रेशू की सरगर्मी से तलाश कर रही हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि रेशू द्वारा तैयार किए गए कुछ वीडियो श्वेता जैन के पास पहुंचे थे, जिसके बाद श्वेता ने यह संवेदनशील जानकारी अलका दीक्षित के साथ साझा की थी। इन दोनों महिलाओं ने मिलकर उन वीडियो के जरिए संबंधित नेताओं से करोड़ों रुपये वसूलने की पूरी योजना तैयार की थी, लेकिन वे अपने इस मकसद में पूरी तरह सफल नहीं हो सकीं।

अलका प्रधान आरक्षक विनोद को बुलाती थी जीजा, एआई वीडियो की आशंका

इसी ब्लैकमेलिंग की योजना के दौरान अलका दीक्षित ने खुफिया विभाग के प्रधान आरक्षक विनोद शर्मा से संपर्क साधा था। उसने रेशू द्वारा भेजे गए वीडियो विनोद के पास ट्रांसफर किए और पूछा कि इन वीडियो का इस्तेमाल कर किस तरह से रकम वसूली जा सकती है। अलका बातचीत में विनोद शर्मा को जीजा कहकर संबोधित करती थी। पुलिस का आरोप है कि कानून का रखवाला होने के बावजूद विनोद ने अलका को इस गैरकानूनी काम से रोकने के बजाय उल्टा मोटी रकम वसूलने के लिए उकसाया। इसके ठीक बाद इस खेल में लाखन चौधरी की एंट्री कराई गई। इन सभी आरोपियों ने मिलकर एक बड़ी प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त का बहाना बनाकर इंदौर के प्रतिष्ठित शराब कारोबारी चिंटू ठाकुर को अपने जाल में फंसाने की चक्रव्यूह रचना शुरू कर दी।

इंदौर पुलिस फिलहाल सभी गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन और लैपटॉप को जब्त कर उसमें सुरक्षित रखे गए वीडियो और डेटा को रिकवर करने में जुटी हुई है। हालांकि साइबर सेल के वरिष्ठ अफसरों का यह भी कहना है कि तकनीकी जांच के बिना कुछ नहीं कहा जा सकता, क्योंकि आशंका है कि कुछ वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई तकनीक के जरिए डीपफेक तैयार किए गए हो सकते हैं। जांच में शामिल उच्चाधिकारियों के मुताबिक श्वेता जैन के पास वर्ष 2019 के पुराने हनीट्रैप मामले से जुड़े कई बेहद संवेदनशील वीडियो और मध्य प्रदेश के कई बड़े नेताओं व नौकरशाहों की निजी जानकारियां अब भी सुरक्षित मौजूद हैं। मामले में पुरानी एसआईटी जांच से जुड़े कुछ अधिकारियों के संबंध में भी आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है।

जांच के दायरे में सोशल मीडिया और बैंक खाते, कई बड़े चेहरे बेनकाब होने की उम्मीद

क्राइम ब्रांच की विशेष टीमें इस समय सभी आरोपियों के मोबाइल फोन कॉल डिटेल्स, व्हाट्सएप चैट, सोशल मीडिया कनेक्शंस और बैंक खातों के वित्तीय लेनदेन की बारीकी से स्क्रूटनी कर रही हैं। पुलिस को पूरी आशंका है कि आने वाले दिनों में इस जांच के दायरे में कई अन्य हाईप्रोफाइल नाम भी आधिकारिक रूप से सामने आ सकते हैं। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार इंदौर, भोपाल और उज्जैन के कई रसूखदार कारोबारी तथा राजनीतिक रसूख रखने वाले लोग इस गैंग के सीधे संपर्क में थे, लेकिन वे अपने सामाजिक सम्मान और बदनामी के डर के कारण पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं।

कार रोककर सुपर कॉरिडोर पर दी थी जान से मारने और बदनाम करने की धमकी

दर्ज एफआईआर और पुलिस जांच के अनुसार, शिकायतकर्ता शराब कारोबारी चिंटू ठाकुर की मुलाकात करीब एक महीना पहले अलका दीक्षित नाम की महिला से हुई थी। अलका और उसके पुरुष साथियों ने मुलाकात के बाद कारोबारी पर उनकी जमीनों के सौदों और निजी व्यापार में बिना कोई निवेश किए सीधे 50 फीसदी की पार्टनरशिप यानी हिस्सेदारी देने का लगातार दबाव बनाया। जब कारोबारी ने इस अनुचित मांग को साफ तौर पर खारिज कर दिया, तो इस पूरे गैंग ने मिलकर उन्हें हनीट्रैप के जाल में फंसाने की खौफनाक साजिश रच डाली। गिरोह ने एक अन्य युवती के माध्यम से चिंटू ठाकुर के कुछ आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरें चुपके से तैयार कर लीं। इसके बाद अलका दीक्षित, लाखन चौधरी, जयदीप और जितेंद्र पुरोहित ने इंदौर के सुपर कॉरिडोर पर कारोबारी की कार को बीच रास्ते में जबरन रुकवाया और उन्हें हथियार दिखाकर धमकाते हुए एक करोड़ रुपए की रंगदारी मांगी। रकम तत्काल न देने पर उक्त वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर पूरी तरह बदनाम करने की सीधी चेतावनी दी गई।

जेल में बैठकर रसूखदारों को फंसाने और ब्लैकमेल करने की ली थी प्रोफेशनल ट्रेनिंग

क्राइम ब्रांच की तफ्तीश में यह बात पूरी तरह साफ हो चुकी है कि 2019 के हनीट्रैप मामले में लंबे समय तक जेल काट चुकी श्वेता जैन ने ही जेल के भीतर अलका दीक्षित और उसके अन्य साथियों को समाज के प्रभावशाली और अमीर लोगों को अपने हुस्न के जाल में फंसाने के तरीके सिखाए थे। पुलिस को संदेह है कि यह गिरोह एक संगठित सिंडिकेट की तरह लंबे समय से बड़े-बड़े उद्योगपतियों, नामचीन प्रॉपर्टी डीलरों और रसूखदार राजनीतिक हस्तियों को अपना निशाना बनाकर उनसे करोड़ों रुपए वसूल रहा था।

ड्रग्स और अवैध हथियारों के बड़े नेटवर्क से भी जुड़े गैंग के तार

डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस क्राइम ब्रांच राजेश कुमार त्रिपाठी के आधिकारिक बयान के मुताबिक पीड़ित शराब कारोबारी की लिखित शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए तुरंत उच्च स्तरीय जांच दल का गठन किया। शुरुआती तकनीकी जांच में ही मुख्य आरोपी अलका दीक्षित के अंतरराज्यीय ड्रग्स माफिया और अवैध हथियारों की तस्करी करने वाले कुख्यात अपराधियों के साथ सीधे संपर्क होने की बेहद चौंकाने वाली जानकारी पुलिस के हाथ लगी। इसके तुरंत बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए 40 से ज्यादा पुलिस अधिकारियों और साइबर एक्सपर्ट्स की सात अलग-अलग विशेष टीमें गठित की गईं, जिन्होंने इंदौर और भोपाल के कई संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस सुनियोजित कार्रवाई के दौरान पुलिस ने पांच मुख्य आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की।

उज्जैन के एक पुराने जमीन विवाद से शुरू हुआ था ब्लैकमेलिंग का खेल

क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इस पूरे आपराधिक नेटवर्क की शुरुआत अलका दीक्षित के उज्जैन के एक बड़े रसूखदार कारोबारी के साथ हुए पुराने जमीन विवाद से हुई थी। उक्त जमीन के सौदे का पूरा भुगतान नहीं मिलने के बाद अलका ने श्वेता जैन के संपर्क में आकर हनीट्रैप गैंग के माध्यम से समाज के अमीर और प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इस गैंग ने योजनाबद्ध तरीके से भोपाल, इंदौर और उज्जैन के कई प्रतिष्ठित कारोबारियों और क्षेत्रीय नेताओं से नजदीकी बढ़ाकर उन्हें ब्लैकमेल करने का प्रयास किया। विभिन्न जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि इस बड़े अंतरराज्यीय रैकेट में कुछ सफेदपोश लोग और अन्य महिलाएं भी शामिल हो सकती हैं, जिन्हें लेकर पुलिस जल्द ही कुछ और बड़े खुलासे कर सकती है।

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