नारद जयंती के मौके पर इंदौर में विश्व संवाद केंद्र और इंदौर प्रेस क्लब द्वारा भारतीय मीडिया में स्व का जागरण विषय पर एक परिचर्चा रखी गई। मुख्य वक्ता अमिताभ अग्निहोत्री ने कहा कि सेनाएं भूगोल जीता करती है, इतिहास नहीं जीत सकती। किसी ने कहा है कि यदि किसी देश को कमजोर करना हो तो उस देश के नागरिकों का आत्मबल कमजोर कर दो। हमारे देश के नागरिकों के स्व को भी कुचलने की कोशिश सदियों तक की गई।
उन्होंने कहा कि पहले मन खड़ा करना होगा , तब देश खड़ा होगा। हमारे पास मित्र बोध होना अच्छा है, लेकिन शत्रु बोध यदि नहीं होगा तो हम जीती बाजी हार जाएंगे। इस बोध के कम होने की कीमत हमने कई बार चुकाई।
अग्निहोत्री ने कहा कि नागरिकों में स्व का जागरण होता तो अयोध्या मंदिर को बनाने में पांच सौ साल नहीं लगते। 1952 में ही मंदिर बन जाता लेकिन हमारे देश के लोगों में कमतरी के अहसास को कम नहीं होने दिया गया।
उन्होंने कहा कि समाज की आत्मशक्ति जागृत होगी तो हर क्षेत्र में स्व का जागरण होगा। रामायण काल की तरह हमें भी समुद्र लांघना होगा। इसके लिए मीडिया को जामवंत की तरह उत्प्रेरक का काम करना होगा। देश में धर्म को बचाने के लिए भगवान ने अवतार लिए, लेकिन हमने अपने नायकों का किस्से कहानियों में समेट दिया।मुगलों की इसमें बड़ी भूमिका रही। इस कारण भारत में मूर्खता का अखंड सम्राज्य वर्षों तक चला।
हमारे पौराणिक साहित्य के साथ छेड़खानी की गई।भजनों में श्याम को चूड़ी बेचने वाला और काला बताया गया। हमने अपनी शक्ति और सामर्थ को जगाने के लिए कोई उल्लेखनीय काम नहीं किया। इस बात का हमें अहसास भी नहीं है।उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में सनातन धर्म ही ऐसा है, जिसका कोई फाउंडर नहीं है। धर्म के स्थापना की कोई तारीख नहीं है और न ही कोई रुल बुक है। भारत का स्व सनातन है। इसे फिर से जन जन में स्थापित करना होगा।
सानंद न्यास के अध्यक्ष जयंत भिसे ने कहा कि नारद देवों के भी ऋषि थे। उनसे भगवान अपनी समस्याओं का हल जानने आते थे। वे संवाद और संचार विधा के आदिपुरुष थे। मंच पर प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक कर्दम भी मौजूद थे। परिचर्चा का संचालन अनुभूति निगम ने किया। आभार पत्रकार अरविंद तिवारी ने माना।
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