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Indore News: मुख्यमंत्री के सामने CJI सूर्यकांत ने क्यों कहा, कोई परेशानी लेकर आए तो सही तरीके से संवाद करें?

Indore News: मुख्यमंत्री के सामने CJI सूर्यकांत ने क्यों कहा, कोई परेशानी लेकर आए तो सही तरीके से संवाद करें?

भारत एक विविधता वाला देश हैं। हर क्षेत्र और स्थान के अनुसार परेशानियों का प्रकार भी बदलता रहता है। जिस क्षेत्र में जो परेशानी आ रही है हमें उसी क्षेत्र की भाषा, व्यवहार और प्रकृति के अनुसार संवाद करना चाहिए। जो न्याय की आस में आपके पास आया है, उसकी आधी परेशानी सिर्फ आपके व्यवहार से ही दूर हो जाती है। यदि आप उससे उसी की भाषा में सही तरह से संवाद करेंगे तो वह सहज होने लगेगा और आपके ऊपर उसका विश्वास बढ़ता जाएगा। यह बातें भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने इंदौर में आयोजित वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस में कही। वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस ‘Enhancing Access to Justice’ विषय पर केंद्रित है। कार्यक्रम का उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के संरक्षक प्रमुख जस्टिस सूर्यकांत और मुख्यमंत्री मोहन यादव के द्वारा किया गया।




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CJI सूर्यकांत
– फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर


अपने संबोधन के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यदि आप सभी को अधिकार दिलाने की बात करते हैं और कोई एक व्यक्ति भी उन अधिकारों को पाने में सफल नहीं होता तो आप फेल हो जाते हैं। इसलिए सभी को समान अधिकार मिलें यह सुनिश्चित करना बहुत आवश्यक है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जब कोई न्याय के लिए आता है तो आपका व्यवहार उसके प्रति कैसा है, आप उसे कितना सम्मान देते हैं, यह उसकी परेशानियों को आधा कम कर देता है। यदि आप उसकी परेशानी को सही तरीके से नहीं समझेंगे तो आपको उसका निदान करने में भी मुश्किल आएगी। इसलिए सही तरीके से संवाद करना सबसे जरूरी है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा जिस तरह से डॉक्टर मरीज से बहुत शांत होकर, सकारात्मक तरीके से बात करते हैं और मरीज को विश्वास दिलाते हैं कि वे जल्द ठीक हो जाएंगे। इसी तरह न्याय प्रक्रिया से जुड़े सभी विभागों और व्यवस्थाओं के लोगों को पीड़ित से इस तरह से संवाद करना चाहिए ताकि उसकी परेशानी कम हो। 


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CJI ने नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के वेस्टर्न जोन के क्षेत्रीय सम्मेलन को संबोधित किया।
– फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर


पिछले दशकों की तुलना में कोर्ट केस का बैकलॉग कम हुआ 

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि देश में कोर्ट केस का बैकलॉग अब वैसा नहीं है जैसा 10 या 20 साल पहले था, और केस के तेज़ी से निपटारे के लिए टेक्नोलॉजी के ज़रिए बनाई गई अलग-अलग योजनाओं के “बहुत अच्छे नतीजे” मिले हैं। कोर्ट में लंबे समय से लंबित केस के बारे में पूछे जाने पर CJI ने पत्रकारों से कहा कि केस के बैकलॉग के कई कारण हैं और उन्हें धीरे-धीरे व्यवस्थित तरीके से सुलझाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश में केस का बैकलॉग अब वैसा नहीं है जैसा 10 या 20 साल पहले था। CJI ने कहा, “हमने टेक्नोलॉजी के जरिए केस के तेजी से निपटारे के लिए कई योजनाएं बनाई हैं, और इनके बहुत अच्छे नतीजे मिले हैं।”

मुख्यमंत्री बोले- न्याय की धरती पर यह आयोजन होना गर्व की बात

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि इंदौर की नगरी माता अहिल्याबाई होल्कर के न्याय के लिए जानी जाती है। उन्होंने न्याय के लिए अपने पुत्र और प्रजा में भी भेद नहीं किया। अपने पुत्र को भी दंड दिया और समाज को न्याय की सही परिभाषा दी। इसी तरह महाराज विक्रमादित्य ने भी अपनी धर्मपत्नी के भाई को मृत्युदंड दिया और समाज में न्याय स्थापित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की पुरातन संस्कृति और सभ्यता न्याय आधारित रही है। पंच परमेश्वर से लेकर राजा-महाराजा तक प्रजा को सही तरह से न्याय दिलाने में पूर्ण यकीन रखते थे। आज भारत में न्याय सभी की पहुंच में हो और सही समय पर मिले हम इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इसके लिए सरकार और न्यायपालिका मिलकर काम कर रहे हैं। 

न्यायाधीशों ने रखे अलग-अलग विषयों पर अपने विचार

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि नालसा की शिक्षा स्कीम और साइन लैंग्वेज में थीम सॉन्ग न्याय की पहुंच को जन-जन तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगा। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा कि न्याय केवल विधायी कानून के पुलिंदों और न्यायालयों के परिभाषित करने से संभव नहीं होता है। यह एक विश्वास है कि जब भी कोई मुश्किल में है, तो वह फोरम तक पहुंचे और समाधान प्रक्रिया की सहायता प्राप्त कर सके, जहां उसे न्याय मिलेगा। केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था में न्याय केवल न्यायालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक इसकी पहुंच हो, यह हमारी प्रतिबद्धता है। दुनिया में भारत की पहचान लोकतंत्र की जननी के तौर पर है। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक रुसिया ने कहा कि मालवा की पावन धरती और लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की धरती पर यह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इंदौर शहर अपनी सांस्कृतिक विरासत, अतुलनीय आतिथ्य, जीवंत परंपरा ही नहीं बल्कि अपनी संवेदनशीलता और सहनशीलता के लिए भी देश में विशेष पहचान रखता है। यह सम्मेलन हमारे संकल्प को नई दिशा प्रदान करेगा। हम सभी के एकीकृत प्रयासों से ही न्याय सभी के लिए समान रूप से आशा और उम्मीद की किरण बनेगा। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा, न्यायाधीश न्यायमूर्ति विजय विश्नोई, न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक आराधे, न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागु, न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, उच्च न्यायालय गुजरात की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल सहित विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशगण, विधिक सेवा प्राधिकरणों के वरिष्ठ पदाधिकारी, न्यायिक अधिकारी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित अनेक प्रतिष्ठित नागरिक और बड़ी संख्या में पैरा लीगल वॉलेंटियर्स उपस्थित थे।

दो दिन चलेगी कॉन्फ्रेंस 

इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में 8 और 9 अगस्त को वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है। कॉन्फ्रेंस का आयोजन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली (नालसा), मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर (सालसा) और मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस 2 दिवसीय कॉन्फ्रेंस का विषय ‘इन्हेंसिंग एक्सेस टू जस्टिस’ तथा इसकी थीम ‘एकजुट आवाज, सशक्त भविष्य : संवाद, गरिमा और समावेशन के माध्यम से न्याय तक पहुंच’ रखी गई है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने नालसा की शिक्षा स्कीम तथा नालसा के थीम सॉन्ग को इंडियन साइन लैंग्वेज में लांच किया। कॉन्फ्रेंस में नालसा के थीम सॉन्ग का प्रदर्शन कर इसकी योजनाओं के हिंदी संस्करण और ब्रेल लिपि में गाइड का विमोचन किया गया। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, मुख्यमंत्री डॉ. यादव सहित अन्य सभी अतिथियों ने ‘जस्टिस टू चिल्ड्रन लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम’ तथा मध्यस्थता पर सर्टिफिकेट कोर्स – विवाद से सहमति की ओर का भी शुभारंभ किया। केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुनराम मेघवाल सहित अन्य न्यायमूर्तियों ने कॉन्फ्रेंस में आयोजकों द्वारा तैयार की गई ‘न्याय के स्वर’ नामक पुस्तक का विमोचन किया।


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