अपने संबोधन के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यदि आप सभी को अधिकार दिलाने की बात करते हैं और कोई एक व्यक्ति भी उन अधिकारों को पाने में सफल नहीं होता तो आप फेल हो जाते हैं। इसलिए सभी को समान अधिकार मिलें यह सुनिश्चित करना बहुत आवश्यक है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जब कोई न्याय के लिए आता है तो आपका व्यवहार उसके प्रति कैसा है, आप उसे कितना सम्मान देते हैं, यह उसकी परेशानियों को आधा कम कर देता है। यदि आप उसकी परेशानी को सही तरीके से नहीं समझेंगे तो आपको उसका निदान करने में भी मुश्किल आएगी। इसलिए सही तरीके से संवाद करना सबसे जरूरी है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा जिस तरह से डॉक्टर मरीज से बहुत शांत होकर, सकारात्मक तरीके से बात करते हैं और मरीज को विश्वास दिलाते हैं कि वे जल्द ठीक हो जाएंगे। इसी तरह न्याय प्रक्रिया से जुड़े सभी विभागों और व्यवस्थाओं के लोगों को पीड़ित से इस तरह से संवाद करना चाहिए ताकि उसकी परेशानी कम हो।
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