चिकित्सा सेवा का वास्तविक ध्येय केवल किसी बीमारी या शारीरिक समस्या का इलाज करना नहीं होता, बल्कि किसी व्यक्ति को एक सामान्य, स्वस्थ और आत्मनिर्भर जीवन प्रदान करना भी होता है। इसी मानवीय विचार का एक अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक उदाहरण हाल ही में देखने को मिला, जब जन्मजात क्लबफुट यानी टेलीप्स इक्वाइनो वेरस नामक बीमारी से पीड़ित रही रश्मि (बदला हुआ नाम) लगभग 25 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अपने परिवार और बच्चे के साथ वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रमोद पी. नीमा से मिलने पहुंचीं। बचपन के दौर में हुई सफल सर्जरी के कारण आज वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं और एक खुशहाल तथा सामान्य जीवन व्यतीत कर रही हैं।
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