इंदौर। बदलती जीवनशैली और भाग-दौड़ भरे दैनिक जीवन के कारण शारीरिक श्रम लगातार कम होता जा रहा है। इसके चलते ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और जोड़ों के दर्द जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ रही है। एक अनुमान के अनुसार शहर की लगभग 25 से 30 प्रतिशत आबादी ब्लड प्रेशर या डायबिटीज जैसी समस्याओं से जूझ रही है। चिकित्सक भी ऐसे मरीजों को नियमित व्यायाम और योग करने की सलाह देते हैं।
योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि मन और चित्त को एकाग्र करने का माध्यम भी है। लंबे समय तक बैठकर काम करने के कारण युवा वर्ग भी जोड़ों के दर्द और शारीरिक अकड़न की समस्या से प्रभावित हो रहा है। यही वजह है कि अब कई कॉर्पोरेट संस्थानों में कर्मचारियों को फिटनेस और योग के लिए विशेष समय दिया जाने लगा है। विश्व योग दिवस पर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में योग संबंधी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
क्या कहते हैं योग प्रशिक्षक
स्पोर्ट्स क्लब, निजी नशा मुक्ति केंद्रों तथा विभिन्न संस्थानों में योग और जुम्बा प्रशिक्षण देने वाले राम यादव का कहना है कि व्यस्ततम दिनचर्या में भी प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य के लिए कम से कम 30 मिनट अवश्य निकालने चाहिए। उनके अनुसार वर्तमान समय में स्वास्थ्य और फिटनेस के प्रति लोगों की जागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
योग प्रशिक्षक साधना पटेल बताती हैं कि उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से योग में डिग्री प्राप्त की है। वे विद्यालय में नौकरी करने के साथ-साथ सुबह और शाम योग एवं जुम्बा की कक्षाएं संचालित करती हैं। उनका कहना है कि योग न केवल बेहतर स्वास्थ्य का माध्यम है, बल्कि यह उनकी आय का भी प्रमुख स्रोत बन चुका है।
योग साधकों का अनुभव
करीब तीन दशकों तक टेबल टेनिस खेलने वाले राजेंद्र तिवारी पिछले पांच वर्षों से नियमित योग कर रहे हैं। उनका कहना है कि पहले उन्हें शरीर में सामान्य दर्द की शिकायत रहती थी, लेकिन नियमित योगाभ्यास से यह समस्या काफी हद तक समाप्त हो गई है। योग निद्रा से उनकी एकाग्रता भी बढ़ी है।
वहीं अर्चना मिरदवाल और अनीता जोशी, जिन्होंने ऑनलाइन योग कक्षाएं ज्वाइन कर रखी हैं, बताती हैं कि पहले वे जमीन पर ठीक से बैठ भी नहीं पाती थीं। लगातार अभ्यास के बाद अब उन्हें जोड़ों में आराम मिला है और वे सहजता से पालथी मारकर बैठ सकती हैं।
विदेशों में भी लोकप्रिय हो रहा योग
योग भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। प्राचीन ऋषि-मुनियों द्वारा विकसित यह विधा आज केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के अनेक देशों में लोकप्रिय हो चुकी है। शहर के कई योग प्रशिक्षक विदेशों में ऑनलाइन योग प्रशिक्षण दे रहे हैं।
योग विशेषज्ञ वेदिका वर्मा आयरलैंड में योग प्रशिक्षण के लिए जा चुकी हैं और वर्तमान में अमेरिका के समयानुसार भारत से ऑनलाइन योग सत्र संचालित कर रही हैं। उनके साथ कई विदेशी साधक जुड़े हुए हैं, जो नियमित रूप से योग कर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का प्रयास कर रहे हैं। डबलिन में रहने वाली इंदौर मूल की श्रेया भी प्रतिदिन ऑनलाइन योग करती हैं। इससे स्पष्ट है कि स्वास्थ्य और फिटनेस के प्रति लोगों की जागरूकता लगातार बढ़ रही है।
योग और संगीत का अनूठा संबंध
योग केवल आसनों तक सीमित नहीं है। संगीत, नृत्य और सकारात्मक गतिविधियां भी मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होती हैं। विजयनगर क्षेत्र की सर्विस रोड पर ‘गीत-संगीत ग्रुप’ के बैनर तले कैलाशचंद्र बुर्रे के नेतृत्व में सौ से अधिक सदस्य नियमित रूप से एकत्र होते हैं। समूह के सदस्य गीत-संगीत के साथ नृत्य भी करते हैं। उनका मानना है कि नृत्य और संगीत भी फिटनेस बनाए रखने का प्रभावी माध्यम हैं। समूह के सदस्य कहते हैं, “नाचना-गाना ही हमारा योग है।”
होल्कर रियासत में भी थी फिटनेस के प्रति जागरूकता
होल्कर शासनकाल में भी स्वास्थ्य और शारीरिक व्यायाम को विशेष महत्व दिया जाता था। होल्कर शासक स्वयं कुश्ती और पहलवानी के शौकीन थे तथा उन्होंने इस खेल को भरपूर प्रोत्साहन दिया। रियासत में कई नामी पहलवान हुए। शहर में स्थित कैदी बाग में कैदियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच नियमित रूप से सैर कराई जाती थी।
कब से मनाया जा रहा है योग दिवस
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस प्रतिवर्ष 21 जून को मनाया जाता है। यह वर्ष का सबसे लंबा दिन माना जाता है। 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भारत के प्रस्ताव पर 177 देशों के समर्थन से 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था। यह संयुक्त राष्ट्र में सबसे कम समय में स्वीकृत होने वाले प्रस्तावों में से एक था। पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया था। तब से प्रत्येक वर्ष यह दिवस पूरे विश्व में उत्साह के साथ मनाया जाता है।
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