रीवा/भोपाल। मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी एक पदस्थापना आदेश के बाद प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। विभाग ने उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के निजी सहायक (पीए) राजीव कुमार तिवारी को शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, भोलगढ़ (जिला रीवा) से स्थानांतरित कर शासकीय अध्यापक शिक्षा महाविद्यालय, रीवा में पदस्थ किया है। इस आदेश के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और शिक्षा जगत में कई सवाल उठाए जा रहे हैं।
- राजीव तिवारी की शिक्षा महाविद्यालय में पदस्थापना पर विवाद, शिक्षा विभाग के आदेश पर उठे सवाल
आलोचकों का दावा है कि राजीव तिवारी ने भोलगढ़ में पदस्थापना के दौरान विद्यालय में नियमित रूप से शिक्षण कार्य नहीं किया और अब उन्हें ऐसे संस्थान में पदस्थ किया गया है, जहां भविष्य के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाता है। इसी आधार पर सवाल उठाया जा रहा है कि “जो शिक्षक स्वयं विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने नहीं गए, वे अब शिक्षकों को प्रशिक्षण कैसे देंगे?”
शिक्षा विभाग के आदेश से बढ़ा विवाद
29 जून 2026 को स्कूल शिक्षा विभाग, भोपाल द्वारा जारी आदेश में राजीव कुमार तिवारी सहित चार अधिकारियों की पदस्थापना में परिवर्तन किया गया है। आदेश के अनुसार राजीव तिवारी को शासकीय अध्यापक शिक्षा महाविद्यालय, रीवा में स्थानांतरित किया गया है।
यह आदेश सामने आने के बाद विभिन्न शिक्षक संगठनों और सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस शुरू हो गई है। कई लोगों का कहना है कि अध्यापक शिक्षा महाविद्यालय जैसे संस्थानों में ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए जिनका शिक्षण अनुभव उत्कृष्ट रहा हो और जिन्होंने विद्यालय स्तर पर प्रभावी कार्य किया हो।
उठ रहे हैं कई सवाल
विवाद के केंद्र में यह आरोप है कि राजीव तिवारी लंबे समय तक प्रशासनिक और राजनीतिक जिम्मेदारियों में सक्रिय रहे तथा विद्यालय में नियमित शिक्षण कार्य नहीं किया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो आवश्यक कार्रवाई की जाए।
सरकार या विभाग की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल स्कूल शिक्षा विभाग अथवा राजीव तिवारी की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि विभाग इस पदस्थापना के पीछे कोई प्रशासनिक या शैक्षणिक कारण बताता है, तो उससे स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
पारदर्शिता की मांग
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में नियुक्तियां पूरी तरह योग्यता, अनुभव और पारदर्शी प्रक्रिया के आधार पर होनी चाहिए। इससे शिक्षा की गुणवत्ता और भविष्य के शिक्षकों का प्रशिक्षण प्रभावित होता है। ऐसे मामलों में सरकार को तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार की आशंका या भ्रम की स्थिति न बने।
राजीव तिवारी की नई पदस्थापना को लेकर उठे सवालों ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर हैं। यदि आरोप तथ्यात्मक हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है, और यदि आरोप निराधार हैं तो विभाग को भी सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही ही जनता का विश्वास बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
#Madhya #Pradesh #School #Education #News #शकषक #क #गर #बन #रजव #तवर #पदसथपन #क #लकर #उठ #सवल #शकष #वभग #क #आदश #पर #मच #ववद #Vindhya #Bhaskar



Post Comment