रीवा। जिले के गढ़ थाना अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक क्यौटी किला की सुरक्षा व्यवस्था इस समय गंभीर सवालों के घेरे में है। ऐतिहासिक महत्व के इस स्थल पर राजस्थान फोर्ट एंड पैलेस प्राइवेट लिमिटेड के अनुबंध पर ‘मैट्रिक्स मैक्स सिक्योरिटी एंड कमर्शियल सर्विसेज (प्राइ) लिमिटेड’ नामक निजी सुरक्षा एजेंसी द्वारा नियमों को ताक पर रखकर सुरक्षाकर्मी तैनात करने का मामला सामने आया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उक्त सुरक्षा एजेंसी के पास मप्र का निजी सुरक्षा एजेंसी (विनियमन) अधिनियम- पसारा का कोई वैध लाइसेंस नहीं है। इसके बावजूद कंपनी द्वारा अवैध रूप से किले में 6 सुरक्षा गार्ड और 1 गनमैन की तैनाती कर दी गई है। बता दे की राजस्थान फोर्ट एंड पैलेस प्राइवेट लिमिटेड किले को हेरिटेज बनाने के लिए कार्य कर रहा है।
बिना वेरिफिकेशन गनमैन की तैनाती से बढ़ा जोखिम
सुरक्षा विशेषज्ञों और स्थानीय सजग नागरिकों का मानना है कि किसी ऐतिहासिक या सार्वजनिक स्थल पर बिना उचित पुलिस सत्यापन (वेरिफिकेशन) के गनमैन को तैनात करना सुरक्षा के लिहाज से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला है। इस संबंध में समाचार पत्रों में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया जा चुका है कि बिना उचित प्रशिक्षण और नियमों की अनदेखी कर तैनात किए जा रहे सुरक्षा गार्ड्स के कारण पूरे निजी सुरक्षा उद्योग की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर संकट मंडरा रहा है।
शिकायत के बाद भी पुलिस प्रशासन बेपरवाह
इस पूरे अवैध संचालन को लेकर स्थानीय स्तर पर आक्रोश है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में दो बार लालगांव पुलिस चौकी और हाल ही में गढ़ थाना प्रभारी को लिखित रूप से शिकायत सौंपी जा चुकी है। शिकायतकर्ता अजीत सिंह ने इस संबंध में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई है।
हैरानी की बात यह है कि लिखित शिकायतें देने और मामला पुलिस के संज्ञान में होने के बावजूद, गढ़ थाना पुलिस द्वारा ‘मैट्रिक्स मैक्स सिक्योरिटी कंपनी’ के संचालकों के विरुद्ध आज दिनांक तक कोई वैधानिक कार्रवाई या निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की गई है।
निष्पक्ष जांच और दंडात्मक कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और सजग समाज ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। बिना वैध पसारा लाइसेंस के हथियारों के साथ सुरक्षा सेवाएं देने वाली इस अवैध एजेंसी के संचालकों पर तत्काल सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और भविष्य में किसी बड़ी अप्रिय घटना को टाला जा सके।
ट्रेनिंग के बिना गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों पर संकट
- रीवा के निजी सुरक्षा उद्योग की गुणवत्ता इस समय गंभीर संकट में है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि कई सुरक्षा एजेंसियां नियमों को ताक पर रखकर बिना प्रशिक्षित सुरक्षा गार्डों को सीधे ड्यूटी पर तैनात कर देती हैं।
- कानून की स्पष्ट अवहेलना: प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी (रेगुलेशन) अधिनियम, 2005 (पसारा) के तहत मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण केंद्र से निर्धारित ट्रेनिंग प्राप्त करना हर गार्ड के लिए अनिवार्य है।
- आपातकालीन स्थितियों में असक्षम: बिना उचित प्रशिक्षण के तैनात किए गए गार्ड आपातकालीन स्थिति, आगजनी, प्राथमिक उपचार, भीड़ नियंत्रण और आधुनिक सुरक्षा तकनीकों को समझने में पूरी तरह अक्षम होते हैं।
- हथियारों का दुरुपयोग: बिना कठोर प्रशिक्षण और मानसिक मूल्यांकन के गनमैन को संवेदनशील स्थलों पर तैनात करना किसी बड़ी अनहोनी को खुला आमंत्रण देने जैसा है।
प्रशिक्षण केंद्रों की अनदेखी से गिर रहा है स्तर
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षण और सत्यापन की यह अनदेखी न केवल क्यौटी किले जैसी ऐतिहासिक धरोहरों को खतरे में डाल रही है, बल्कि पूरे सुरक्षा उद्योग की साख को भी बट्टा लगा रही है। आज जमीनी स्तर पर स्थिति यह है कि कई एजेंसियां सीधे भर्ती कर गार्ड तैनात कर रही हैं, जिससे प्रशिक्षित जवानों को मिलने वाला सम्मान और उचित वेतन भी प्रभावित हो रहा है।
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