हाईकोर्ट ने 4 मई को फैसला सुनाते हुए कहा कि, ‘अनुकंपा नियुक्ति कोई विरासत में मिलने वाली संपत्ति या संपत्ति का अधिकार नहीं जो उत्तराधिकार के ज़रिए मिलती हो। ये नियोक्ता द्वारा दी गई एक रियायत है, ताकि शोक संतप्त परिवार को अचानक आई आर्थिक तंगी से बचाया जा सके।’ कोर्ट ने आदेश में ये भी कहा कि, ‘ये अदालत अनुकंपा नियुक्ति नीति में बाद में हुए उस संशोधन से भी अवगत है जो 2023 में लागू हुआ था। इस संशोधन ने ये स्पष्ट कर दिया कि, विवाहित और अविवाहित लड़की के बीच कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। तथापि, ये संशोधन विवाहित पुत्री के बचाव में नहीं आता, क्योंकि मृतक की मृत्यु साल 2020 में हुई थी और याचिकाकर्ता ने स्पष्ट रूप से 2021 में आवेदन किया था। अतः निसंदेह याचिकाकर्ता को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए।’
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