स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाने के उध्देश्य से मध्य प्रदेश में पहली बार इंदौर से ‘आई सपोर्ट माय फ्रेंड्स’ …और पढ़ें
HighLights
- स्कूली बच्चों को सीखाएंगे मित्र में मानसिक तनाव के संकेत की कैसे करें पहचान
- स्कूल जाने वाले कई बच्चे परीक्षा का दबाव, पारिवारिक तनाव, बुलिंग, अकेलापन, आत्मविश्वास की कमी और अन्य मानसिक चुनौतियों से जूझते हैं
- अधिकांश बच्चे अपनी परेशानी माता-पिता या शिक्षकों से साझा करने के बजाय चुप रहना पसंद करते हैं
विनय यादव, नईदुनिया, इंदौर। स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाने के उध्देश्य से मध्य प्रदेश में पहली बार इंदौर से ‘आई सपोर्ट माय फ्रेंड्स’ अभियान शुरू किया जा रहा है। यह कार्यक्रम यूनिसेफ, मध्य प्रदेश इंडियन एकेडमी आफ पीडियाट्रिक्स और मध्य प्रदेश शासन के संयुक्त सहयोग से संचालित होगा।
विशेषज्ञों ने बताया कि स्कूल जाने वाले कई बच्चे परीक्षा का दबाव, पारिवारिक तनाव, बुलिंग, अकेलापन, आत्मविश्वास की कमी और अन्य मानसिक चुनौतियों से जूझते हैं। चिंता की बात यह है कि अधिकांश बच्चे अपनी परेशानी माता-पिता या शिक्षकों से साझा करने के बजाय चुप रहना पसंद करते हैं। ऐसे में उनका सबसे भरोसेमंद साथी अक्सर उनका दोस्त ही होता है। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए यह अभियान तैयार किया गया है। इंदौर में 19 जुलाई को ब्रिलियंट कंवेंशन सेंटर में अभियान की शुरूआत होगी।
तनाव के संकेत पहचानने का मिलेगा प्रशिक्षण
कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जाएगा कि यदि उनका कोई मित्र लगातार उदास दिखाई दे, डर में रहे, व्यवहार में अचानक बदलाव आए या मानसिक तनाव के संकेत दिखें, तो उसकी पहचान कैसे करें। साथ ही उन्हें यह भी सिखाया जाएगा कि ऐसे दोस्त से बिना आलोचना किए, संवेदनशीलता के साथ कैसे बातचीत करें और जरूरत पड़ने पर उसे शिक्षक, अभिभावक, काउंसलर या किसी अन्य विश्वसनीय वयस्क तक कैसे पहुंचाएं।
प्रशिक्षण को विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त
इस प्रशिक्षण का आधार विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त ‘देखो, सुनो और जोड़ो’ सिद्धांत है। इसमें बच्चों को सिखाया जाएगा कि किसी भी मानसिक परेशानी से जूझ रहे साथी की बात धैर्य से सुनना, उसकी भावनाओं का सम्मान करना और उसे उचित सहायता से जोड़ना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। विशेषज्ञों के मुताबिक मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की समय रहते पहचान होने पर गंभीर परिस्थितियों को काफी हद तक रोका जा सकता है। इंदौर से शुरू होने वाले अभियान को प्रदेश के अन्य जिलों के स्कूलों तक भी विस्तार दिया जाएगा।
बच्चों में मानसिक समस्या तेजी से बढ़ते जा रही है
आजकल बच्चों में मानसिक समस्या तेजी से बढ़ते जा रही है। कई बच्चे इसके चलते आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं। आई सपोर्ट माय फ्रेंड्स अभियान के माध्यम से बच्चों को प्रशिक्षित किया जाएगा। बच्चों को सीखाया जाएगा कि मानसिक तनाव के संकेत दिखें, तो उसकी पहचान कैसे करें। – डॉ. राजीव संघवी, अध्यक्ष, मप्र इंडियन एकेडमी आफ पीडियाट्रिक्स
बच्चों की समस्याओं को समझना और सही समय पर सहायता करना बहुत जरूरी है
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