रहवासियों के मन में कितना आक्रोश है यह इसी से समझा जा सकता है कि उन्होंने घर के बाहर बैनर टांग दिए हैं जिस पर लिखा है हमें जिंदा छोड़ देने के लिए धन्य …और पढ़ें
HighLights
- छावनी और जिंसी के वो पुराने मकान जो कभी इन क्षेत्रों की पहचान थे, अब इतिहास बन चुके हैं
- रहवासियों का कहना है कि निगम ने पीढ़ियों से बसे परिवारों की जिंदगी उजाड़ दी है
- जो मकान तोड़े गए हैं, वो वैध थे, वर्षों पुराने थे
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। धूल के गुबार गुजर चुके हैं। मलबे के ढेर भी अब गाड़ियों को आवाजाही के लिए जगह दे रहे हैं। माहौल में खामोशी पसरी है। चेहरों पर दहशत साफ दिख रही है। छावनी और जिंसी के वो पुराने मकान जो कभी इन क्षेत्रों की पहचान थे अब इतिहास बन चुके हैं।
निगम ने रहवासियों को उस कसूर की सजा सुनाई है जो उन्होंने कभी किया ही नहीं। बरसों पुराने घर और दुकान टूटने का दर्द लोगों की जुबान पर आने लगा है। कार्रवाई को लेकर रहवासियों के मन में कितना आक्रोश है यह इसी से समझा जा सकता है कि उन्होंने घर के बाहर बैनर टांग दिए हैं जिस पर लिखा है हमें जिंदा छोड़ देने के लिए इंदौर नगर निगम और प्रशासन का धन्यवाद।
जो मकान तोड़े गए हैं, वो वैध थे, वर्षों पुराने थे
रहवासियों का कहना है कि निगम ने पीढ़ियों से बसे परिवारों की जिंदगी उजाड़ दी है। कई परिवारों के घर टूट गए, कारोबार ठप हो गया। जो मकान तोड़े गए हैं, वो वैध थे, वर्षों पुराने थे। इधर नगर निगम ने दवा बाजार के सामने से सड़क निर्माण शुरू कर दिया है।
सप्ताहभर पहले नगर निगम ने छावनी और जिंसी क्षेत्र में रिमूवल की कार्रवाई की थी। मास्टर प्लान में ये सड़कें 80 फीट चौड़ी बनना थी जिसे बाद में 60 फीट कर दिया गया। इन सड़कों पर कई मकान ऐसे थे जो 100 साल से भी ज्यादा पुराने थे। निगम की कार्रवाई में ये मकान पूरी तरह से जमींदोज हो गए हैं। मलबे में बदल चुके ये मकान आज भी अपने वैध होने की गवाही दे रहे हैं। कार्रवाई के बाद पांच दिन तक तो मलबा तक नहीं उठाया गया। पिछले दो दिन में मलबा तो उठ गया लेकिन कई सवाल पीछे छोड़ गया।
हमने तो कोई अतिक्रमण नहीं किया था
जिंसी और छावनी दोनों ही जगह रहवासियों का दर्द एक हैं कि आखिर हमारा कसूर क्या था। हमने न अतिक्रमण किया, न अवैध निर्माण किया। उनका कहना है कि वे तो दशकों से यहां रह रहे थे। नगर निगम ने विकास के नाम पर हमारे आशियाने उजाड़े दिए। निगम की कार्रवाई ने हमें सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है।
सालों पहले जहां हुई थी तोड़फोड़, वहां आज भी अधूरे खड़े हैं मकान
करीब एक दशक पहले निगम ने ऐसी ही तोड़फोड़ गणेशगंज क्षेत्र में भी की थी। उस वक्त भी हंगामा हुआ था, लेकिन कुछ नहीं हुआ। उस वक्त कार्रवाई में तोड़े गए मकान आज भी अधूरे खड़े हैं। लोग उनकी मरम्मत तक नहीं करवा पा रहे हैं।
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