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आज से देखिए 10 साल के लीप के साथ क्योंकि सास भी कभी बहू थी का नया अध्याय   ;'हर परिवार को एक तुलसी की ज़रूरत होती है' — स्मृति ईरानी ने बताया क्यों आज भी उतना ही खास है यह आइकॉनिक किरदार

समय के साथ परिवार बदल जाते हैं, रिश्तों में दूरियां आ जाती हैं और हर पीढ़ी दुनिया को अपने-अपने नज़रिए से देखने लगती है। लेकिन हर परिवार को आखिरकार किसी ऐसे इंसान की ज़रूरत होती है, जो सबको साथ जोड़कर रख सके। जो लड़ाई की जगह समझदारी चुने, नाराज़गी की जगह माफ़ी दे और कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं, अपने परिवार को फिर से एक करने की कोशिश कभी न छोड़े। करोड़ों दर्शकों के लिए तुलसी हमेशा ऐसी ही रही है। आज से क्योंकि सास भी कभी बहू थी 10 साल के लीप के साथ अपनी कहानी के एक नए और अहम अध्याय की शुरुआत कर रहा है। ऐसे में स्मृति ईरानी बताती हैं कि उनके मुताबिक आज भी हर परिवार को तुलसी जैसी शख्सियत की क्यों ज़रूरत है और यह किरदार आज भी पहले जितना ही प्रासंगिक क्यों है।

शो के इस नए चैप्टर के बारे में बात करते हुए स्मृति ईरानी कहती हैं

"बीते कई सालों में मुझे सबसे खूबसूरत बात तब सुनने को मिली, जब लोगों ने कहा कि तुलसी उन्हें अपनी मां, दादी या नानी की याद दिलाती है। मुझे लगता है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि हर परिवार को, चाहे समय कितना भी बदल जाए, आखिर में किसी ऐसे इंसान की ज़रूरत होती है जो रिश्तों को तोड़ने नहीं, बल्कि जोड़ने की कोशिश करे। जो लोगों को समझे, उनकी बात सुने और उन्हें बिना किसी फैसले के अपनाए।

यह नया चैप्टर मेरे लिए बहुत खास है। दस साल बाद तुलसी अपने परिवार में लौटती है। इस दौरान परिवार बदल चुका है, रिश्ते पहले से ज़्यादा उलझ गए हैं और अपनों के बीच दूरियां भी बढ़ गई हैं। लेकिन तुलसी का विश्वास आज भी वही है कि हर रिश्ते को एक और मौका मिलना चाहिए और हर परिवार फिर से एक हो सकता है।



तुलसी की सबसे बड़ी खासियत हमेशा यही रही है कि वह कभी यह नहीं मानती कि किसी समस्या का सिर्फ एक ही हल होता है। हर नई पीढ़ी अपने साथ नई चुनौतियां लेकर आती है और उन चुनौतियों का सामना करने के लिए समझदारी, हिम्मत और एक-दूसरे को समझने की इच्छा सबसे ज़्यादा ज़रूरी होती है।

इस सफर में कई ऐसे पल आएंगे, जिनकी किसी ने उम्मीद नहीं की होगी। लेकिन इसकी सबसे बड़ी ताकत परिवार, माफ़ी और उम्मीद की भावना है। मुझे उम्मीद है कि दर्शकों को तुलसी की इस नई कहानी में अपने परिवार और अपनी ज़िंदगी की झलक देखने को मिलेगी और वे इस नए चैप्टर का भरपूर आनंद लेंगे।Mother-in-law was also once a daughter-in-law, TV Serlal, Smriti Irani

आज से देखिए 10 साल के लीप के साथ क्योंकि सास भी कभी बहू थी का नया अध्याय

आज से देखिए 10 साल के लीप के साथ क्योंकि सास भी कभी बहू थी का नया अध्याय   ;'हर परिवार को एक तुलसी की ज़रूरत होती है' — स्मृति ईरानी ने बताया क्यों आज भी उतना ही खास है यह आइकॉनिक किरदार

समय के साथ परिवार बदल जाते हैं, रिश्तों में दूरियां आ जाती हैं और हर पीढ़ी दुनिया को अपने-अपने नज़रिए से देखने लगती है। लेकिन हर परिवार को आखिरकार किसी ऐसे इंसान की ज़रूरत होती है, जो सबको साथ जोड़कर रख सके। जो लड़ाई की जगह समझदारी चुने, नाराज़गी की जगह माफ़ी दे और कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं, अपने परिवार को फिर से एक करने की कोशिश कभी न छोड़े। करोड़ों दर्शकों के लिए तुलसी हमेशा ऐसी ही रही है। आज से क्योंकि सास भी कभी बहू थी 10 साल के लीप के साथ अपनी कहानी के एक नए और अहम अध्याय की शुरुआत कर रहा है। ऐसे में स्मृति ईरानी बताती हैं कि उनके मुताबिक आज भी हर परिवार को तुलसी जैसी शख्सियत की क्यों ज़रूरत है और यह किरदार आज भी पहले जितना ही प्रासंगिक क्यों है।

शो के इस नए चैप्टर के बारे में बात करते हुए स्मृति ईरानी कहती हैं

"बीते कई सालों में मुझे सबसे खूबसूरत बात तब सुनने को मिली, जब लोगों ने कहा कि तुलसी उन्हें अपनी मां, दादी या नानी की याद दिलाती है। मुझे लगता है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि हर परिवार को, चाहे समय कितना भी बदल जाए, आखिर में किसी ऐसे इंसान की ज़रूरत होती है जो रिश्तों को तोड़ने नहीं, बल्कि जोड़ने की कोशिश करे। जो लोगों को समझे, उनकी बात सुने और उन्हें बिना किसी फैसले के अपनाए।

यह नया चैप्टर मेरे लिए बहुत खास है। दस साल बाद तुलसी अपने परिवार में लौटती है। इस दौरान परिवार बदल चुका है, रिश्ते पहले से ज़्यादा उलझ गए हैं और अपनों के बीच दूरियां भी बढ़ गई हैं। लेकिन तुलसी का विश्वास आज भी वही है कि हर रिश्ते को एक और मौका मिलना चाहिए और हर परिवार फिर से एक हो सकता है।



तुलसी की सबसे बड़ी खासियत हमेशा यही रही है कि वह कभी यह नहीं मानती कि किसी समस्या का सिर्फ एक ही हल होता है। हर नई पीढ़ी अपने साथ नई चुनौतियां लेकर आती है और उन चुनौतियों का सामना करने के लिए समझदारी, हिम्मत और एक-दूसरे को समझने की इच्छा सबसे ज़्यादा ज़रूरी होती है।

इस सफर में कई ऐसे पल आएंगे, जिनकी किसी ने उम्मीद नहीं की होगी। लेकिन इसकी सबसे बड़ी ताकत परिवार, माफ़ी और उम्मीद की भावना है। मुझे उम्मीद है कि दर्शकों को तुलसी की इस नई कहानी में अपने परिवार और अपनी ज़िंदगी की झलक देखने को मिलेगी और वे इस नए चैप्टर का भरपूर आनंद लेंगे।Mother-in-law was also once a daughter-in-law, TV Serlal, Smriti Irani

;'हर परिवार को एक तुलसी की ज़रूरत होती है' — स्मृति ईरानी ने बताया क्यों आज भी उतना ही खास है यह आइकॉनिक किरदार

समय के साथ परिवार बदल जाते हैं, रिश्तों में दूरियां आ जाती हैं और हर पीढ़ी दुनिया को अपने-अपने नज़रिए से देखने लगती है। लेकिन हर परिवार को आखिरकार किसी ऐसे इंसान की ज़रूरत होती है, जो सबको साथ जोड़कर रख सके। जो लड़ाई की जगह समझदारी चुने, नाराज़गी की जगह माफ़ी दे और कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं, अपने परिवार को फिर से एक करने की कोशिश कभी न छोड़े। करोड़ों दर्शकों के लिए तुलसी हमेशा ऐसी ही रही है। आज से क्योंकि सास भी कभी बहू थी 10 साल के लीप के साथ अपनी कहानी के एक नए और अहम अध्याय की शुरुआत कर रहा है। ऐसे में स्मृति ईरानी बताती हैं कि उनके मुताबिक आज भी हर परिवार को तुलसी जैसी शख्सियत की क्यों ज़रूरत है और यह किरदार आज भी पहले जितना ही प्रासंगिक क्यों है।

शो के इस नए चैप्टर के बारे में बात करते हुए स्मृति ईरानी कहती हैं

"बीते कई सालों में मुझे सबसे खूबसूरत बात तब सुनने को मिली, जब लोगों ने कहा कि तुलसी उन्हें अपनी मां, दादी या नानी की याद दिलाती है। मुझे लगता है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि हर परिवार को, चाहे समय कितना भी बदल जाए, आखिर में किसी ऐसे इंसान की ज़रूरत होती है जो रिश्तों को तोड़ने नहीं, बल्कि जोड़ने की कोशिश करे। जो लोगों को समझे, उनकी बात सुने और उन्हें बिना किसी फैसले के अपनाए।

यह नया चैप्टर मेरे लिए बहुत खास है। दस साल बाद तुलसी अपने परिवार में लौटती है। इस दौरान परिवार बदल चुका है, रिश्ते पहले से ज़्यादा उलझ गए हैं और अपनों के बीच दूरियां भी बढ़ गई हैं। लेकिन तुलसी का विश्वास आज भी वही है कि हर रिश्ते को एक और मौका मिलना चाहिए और हर परिवार फिर से एक हो सकता है।

तुलसी की सबसे बड़ी खासियत हमेशा यही रही है कि वह कभी यह नहीं मानती कि किसी समस्या का सिर्फ एक ही हल होता है। हर नई पीढ़ी अपने साथ नई चुनौतियां लेकर आती है और उन चुनौतियों का सामना करने के लिए समझदारी, हिम्मत और एक-दूसरे को समझने की इच्छा सबसे ज़्यादा ज़रूरी होती है।

इस सफर में कई ऐसे पल आएंगे, जिनकी किसी ने उम्मीद नहीं की होगी। लेकिन इसकी सबसे बड़ी ताकत परिवार, माफ़ी और उम्मीद की भावना है। मुझे उम्मीद है कि दर्शकों को तुलसी की इस नई कहानी में अपने परिवार और अपनी ज़िंदगी की झलक देखने को मिलेगी और वे इस नए चैप्टर का भरपूर आनंद लेंगे।

Mother-in-law was also once a daughter-in-law, TV Serlal, Smriti Irani

;'हर परिवार को एक तुलसी की ज़रूरत होती है' — स्मृति ईरानी ने बताया क्यों आज भी उतना ही खास है यह आइकॉनिक किरदार

समय के साथ परिवार बदल जाते हैं, रिश्तों में दूरियां आ जाती हैं और हर पीढ़ी दुनिया को अपने-अपने नज़रिए से देखने लगती है। लेकिन हर परिवार को आखिरकार किसी ऐसे इंसान की ज़रूरत होती है, जो सबको साथ जोड़कर रख सके। जो लड़ाई की जगह समझदारी चुने, नाराज़गी की जगह माफ़ी दे और कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं, अपने परिवार को फिर से एक करने की कोशिश कभी न छोड़े। करोड़ों दर्शकों के लिए तुलसी हमेशा ऐसी ही रही है। आज से क्योंकि सास भी कभी बहू थी 10 साल के लीप के साथ अपनी कहानी के एक नए और अहम अध्याय की शुरुआत कर रहा है। ऐसे में स्मृति ईरानी बताती हैं कि उनके मुताबिक आज भी हर परिवार को तुलसी जैसी शख्सियत की क्यों ज़रूरत है और यह किरदार आज भी पहले जितना ही प्रासंगिक क्यों है।

शो के इस नए चैप्टर के बारे में बात करते हुए स्मृति ईरानी कहती हैं

"बीते कई सालों में मुझे सबसे खूबसूरत बात तब सुनने को मिली, जब लोगों ने कहा कि तुलसी उन्हें अपनी मां, दादी या नानी की याद दिलाती है। मुझे लगता है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि हर परिवार को, चाहे समय कितना भी बदल जाए, आखिर में किसी ऐसे इंसान की ज़रूरत होती है जो रिश्तों को तोड़ने नहीं, बल्कि जोड़ने की कोशिश करे। जो लोगों को समझे, उनकी बात सुने और उन्हें बिना किसी फैसले के अपनाए।

यह नया चैप्टर मेरे लिए बहुत खास है। दस साल बाद तुलसी अपने परिवार में लौटती है। इस दौरान परिवार बदल चुका है, रिश्ते पहले से ज़्यादा उलझ गए हैं और अपनों के बीच दूरियां भी बढ़ गई हैं। लेकिन तुलसी का विश्वास आज भी वही है कि हर रिश्ते को एक और मौका मिलना चाहिए और हर परिवार फिर से एक हो सकता है।

तुलसी की सबसे बड़ी खासियत हमेशा यही रही है कि वह कभी यह नहीं मानती कि किसी समस्या का सिर्फ एक ही हल होता है। हर नई पीढ़ी अपने साथ नई चुनौतियां लेकर आती है और उन चुनौतियों का सामना करने के लिए समझदारी, हिम्मत और एक-दूसरे को समझने की इच्छा सबसे ज़्यादा ज़रूरी होती है।

इस सफर में कई ऐसे पल आएंगे, जिनकी किसी ने उम्मीद नहीं की होगी। लेकिन इसकी सबसे बड़ी ताकत परिवार, माफ़ी और उम्मीद की भावना है। मुझे उम्मीद है कि दर्शकों को तुलसी की इस नई कहानी में अपने परिवार और अपनी ज़िंदगी की झलक देखने को मिलेगी और वे इस नए चैप्टर का भरपूर आनंद लेंगे।

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#आज #स #दखए #सल #क #लप #क #सथ #कयक #सस #भ #कभ #बह #थ #क #नय #अधयय

Ali Khamenei funeral, Mojtaba Khamenei, Iran Supreme Leader funeral, Indian delegation to Iran, India Iran relations, Tehran news, Iran latest news, Middle East news, Ayatollah Khamenei funeral, India delegation Iran 2026, global news, Iran funeral ceremony, अयातुल्ला अली खामेनेई, खामेनेई अंतिम संस्कार, मोजतबा खामेनेई, ईरान समाचार, भारत का प्रतिनिधिमंडल ईरान, ईरान-भारत संबंध, खामेनेई फ्यूनरल, तेहरान समाचार, ईरान ताजा खबर, मध्य पूर्व समाचार, भारत ईरान डेलिगेशन, विश्व समाचार">अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल क्यों नहीं होंगे मोजतबा, जानिए भारत से कौन-कौन पहुंचा ईरान
								

		
		
		
		
				


					
							
																								
											
								
								
																			
																	
																	
																ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शुक्रवार से शुरू हुए  कार्यक्रम में दुनिया के करीब 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। 86 वर्षीय अली खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमले में मौत हो गई थी। यह हमला उनके आवास पर किया गया था और इसे अमेरिका-इजराइल तथा ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध का पहला बड़ा सैन्य अभियान माना गया। 																								
																														
																																												
	इस बीच, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई सुरक्षा कारणों से अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि आयतुल्ला हकीम इलाही ने बताया कि इज़राइल की ओर से संभावित खतरे और निगरानी की आशंका को देखते हुए उनकी सार्वजनिक मौजूदगी को जोखिम भरा माना गया है।																									
																
																
																														
																														
																																																											
																														
																																			बताया गया कि मोजतबा खामेनेई इससे पहले अपनी पत्नी ज़हरा हद्दाद-अदेल के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हुए थे। उनकी पत्नी की भी 28 फरवरी के उसी अमेरिकी-इज़राइली हवाई हमले में मौत हुई थी। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 4 जुलाई से 9 जुलाई तक ईरान और इराक के विभिन्न शहरों में आयोजित किए जाएंगे।																								
																														
																																			
	 
	भारत से कौन-कौन होगा शामिल 

	ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारत सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शुक्रवार को ईरान पहुंच गए हैं। भारत सरकार की ओर से बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्रा मार्गेरिटा अंतिम संस्कार समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। वहीं कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ईरान जाएंगे। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती भी अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ईरान पहुंच गई हैं।
	
		
			#WATCH | ईरान के सुप्रीम लीडर के निधन के बाद भारत के प्रतिनिधित्व से जुड़े सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “तेहरान में आयोजित समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व भारत सरकार की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और उनके साथ… pic.twitter.com/dzombrKKpe— डीडी न्यूज़ (@DDNewsHindi) July 3, 2026
	ईरान के सुप्रीम लीडर के निधन के बाद भारत के प्रतिनिधित्व से जुड़े सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि तेहरान में आयोजित समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व भारत सरकार की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और उनके साथ राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा कर रहे हैं। इसके अलावा कई और लोग भी गए हैं।																								
																														
																																																		
																																																																		
																																	
																																														
																															
																																																														

								
															
						
			 
				
				
					 
						
															 
									
									 
									     							
									 लेखक के बारे में
									 सुधीर शर्मा
										
									
																				 
						   
                           सुधीर शर्मा विश्व के प्रथम हिन्दी न्यूज पोर्टल वेबदुनिया में सीनियर सब एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। इनके पास मीडिया और डिजिटल कंटेंट के क्षेत्र में 20 से अधिक वर्षों का व्यापक अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नईदुनिया से प्रूफ रीडर के रूप में की। 2012 से….						   और पढ़ें 
								
							
							
					
			    
			
			
			
							
				
						Ali Khamenei funeral, Mojtaba Khamenei, Iran Supreme Leader funeral, Indian delegation to Iran, India Iran relations, Tehran news, Iran latest news, Middle East news, Ayatollah Khamenei funeral, India delegation Iran 2026, global news, Iran funeral ceremony, अयातुल्ला अली खामेनेई, खामेनेई अंतिम संस्कार, मोजतबा खामेनेई, ईरान समाचार, भारत का प्रतिनिधिमंडल ईरान, ईरान-भारत संबंध, खामेनेई फ्यूनरल, तेहरान समाचार, ईरान ताजा खबर, मध्य पूर्व समाचार, भारत ईरान डेलिगेशन, विश्व समाचार

ईरान के सुप्रीम लीडर के निधन के बाद भारत के प्रतिनिधित्व से जुड़े सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि तेहरान में आयोजित समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व भारत सरकार की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और उनके साथ राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा कर रहे हैं। इसके अलावा कई और लोग भी गए हैं।

लेखक के बारे में

सुधीर शर्मा

सुधीर शर्मा विश्व के प्रथम हिन्दी न्यूज पोर्टल वेबदुनिया में सीनियर सब एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। इनके पास मीडिया और डिजिटल कंटेंट के क्षेत्र में 20 से अधिक वर्षों का व्यापक अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नईदुनिया से प्रूफ रीडर के रूप में की। 2012 से…. और पढ़ें
Ali Khamenei funeral, Mojtaba Khamenei, Iran Supreme Leader funeral, Indian delegation to Iran, India Iran relations, Tehran news, Iran latest news, Middle East news, Ayatollah Khamenei funeral, India delegation Iran 2026, global news, Iran funeral ceremony, अयातुल्ला अली खामेनेई, खामेनेई अंतिम संस्कार, मोजतबा खामेनेई, ईरान समाचार, भारत का प्रतिनिधिमंडल ईरान, ईरान-भारत संबंध, खामेनेई फ्यूनरल, तेहरान समाचार, ईरान ताजा खबर, मध्य पूर्व समाचार, भारत ईरान डेलिगेशन, विश्व समाचार">अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल क्यों नहीं होंगे मोजतबा, जानिए भारत से कौन-कौन पहुंचा ईरान
अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल क्यों नहीं होंगे मोजतबा, जानिए भारत से कौन-कौन पहुंचा ईरान
								

		
		
		
		
				


					
							
																								
											
								
								
																			
																	
																	
																ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शुक्रवार से शुरू हुए  कार्यक्रम में दुनिया के करीब 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। 86 वर्षीय अली खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमले में मौत हो गई थी। यह हमला उनके आवास पर किया गया था और इसे अमेरिका-इजराइल तथा ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध का पहला बड़ा सैन्य अभियान माना गया। 																								
																														
																																												
	इस बीच, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई सुरक्षा कारणों से अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि आयतुल्ला हकीम इलाही ने बताया कि इज़राइल की ओर से संभावित खतरे और निगरानी की आशंका को देखते हुए उनकी सार्वजनिक मौजूदगी को जोखिम भरा माना गया है।																									
																
																
																														
																														
																																																											
																														
																																			बताया गया कि मोजतबा खामेनेई इससे पहले अपनी पत्नी ज़हरा हद्दाद-अदेल के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हुए थे। उनकी पत्नी की भी 28 फरवरी के उसी अमेरिकी-इज़राइली हवाई हमले में मौत हुई थी। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 4 जुलाई से 9 जुलाई तक ईरान और इराक के विभिन्न शहरों में आयोजित किए जाएंगे।																								
																														
																																			
	 
	भारत से कौन-कौन होगा शामिल 

	ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारत सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शुक्रवार को ईरान पहुंच गए हैं। भारत सरकार की ओर से बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्रा मार्गेरिटा अंतिम संस्कार समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। वहीं कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ईरान जाएंगे। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती भी अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ईरान पहुंच गई हैं।
	
		
			#WATCH | ईरान के सुप्रीम लीडर के निधन के बाद भारत के प्रतिनिधित्व से जुड़े सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “तेहरान में आयोजित समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व भारत सरकार की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और उनके साथ… pic.twitter.com/dzombrKKpe— डीडी न्यूज़ (@DDNewsHindi) July 3, 2026
	ईरान के सुप्रीम लीडर के निधन के बाद भारत के प्रतिनिधित्व से जुड़े सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि तेहरान में आयोजित समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व भारत सरकार की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और उनके साथ राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा कर रहे हैं। इसके अलावा कई और लोग भी गए हैं।																								
																														
																																																		
																																																																		
																																	
																																														
																															
																																																														

								
															
						
			 
				
				
					 
						
															 
									
									 
									     							
									 लेखक के बारे में
									 सुधीर शर्मा
										
									
																				 
						   
                           सुधीर शर्मा विश्व के प्रथम हिन्दी न्यूज पोर्टल वेबदुनिया में सीनियर सब एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। इनके पास मीडिया और डिजिटल कंटेंट के क्षेत्र में 20 से अधिक वर्षों का व्यापक अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नईदुनिया से प्रूफ रीडर के रूप में की। 2012 से….						   और पढ़ें 
								
							
							
					
			    
			
			
			
							
				
						Ali Khamenei funeral, Mojtaba Khamenei, Iran Supreme Leader funeral, Indian delegation to Iran, India Iran relations, Tehran news, Iran latest news, Middle East news, Ayatollah Khamenei funeral, India delegation Iran 2026, global news, Iran funeral ceremony, अयातुल्ला अली खामेनेई, खामेनेई अंतिम संस्कार, मोजतबा खामेनेई, ईरान समाचार, भारत का प्रतिनिधिमंडल ईरान, ईरान-भारत संबंध, खामेनेई फ्यूनरल, तेहरान समाचार, ईरान ताजा खबर, मध्य पूर्व समाचार, भारत ईरान डेलिगेशन, विश्व समाचार

ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शुक्रवार से शुरू हुए  कार्यक्रम में दुनिया के करीब 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। 86 वर्षीय अली खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमले में मौत हो गई थी। यह हमला उनके आवास पर किया गया था और इसे अमेरिका-इजराइल तथा ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध का पहला बड़ा सैन्य अभियान माना गया। 

इस बीच, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई सुरक्षा कारणों से अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि आयतुल्ला हकीम इलाही ने बताया कि इज़राइल की ओर से संभावित खतरे और निगरानी की आशंका को देखते हुए उनकी सार्वजनिक मौजूदगी को जोखिम भरा माना गया है।

बताया गया कि मोजतबा खामेनेई इससे पहले अपनी पत्नी ज़हरा हद्दाद-अदेल के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हुए थे। उनकी पत्नी की भी 28 फरवरी के उसी अमेरिकी-इज़राइली हवाई हमले में मौत हुई थी। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 4 जुलाई से 9 जुलाई तक ईरान और इराक के विभिन्न शहरों में आयोजित किए जाएंगे।

 

भारत से कौन-कौन होगा शामिल 

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारत सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शुक्रवार को ईरान पहुंच गए हैं। भारत सरकार की ओर से बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्रा मार्गेरिटा अंतिम संस्कार समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। वहीं कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ईरान जाएंगे। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती भी अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ईरान पहुंच गई हैं।
ईरान के सुप्रीम लीडर के निधन के बाद भारत के प्रतिनिधित्व से जुड़े सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि तेहरान में आयोजित समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व भारत सरकार की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और उनके साथ राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा कर रहे हैं। इसके अलावा कई और लोग भी गए हैं।

लेखक के बारे में

सुधीर शर्मा

सुधीर शर्मा विश्व के प्रथम हिन्दी न्यूज पोर्टल वेबदुनिया में सीनियर सब एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। इनके पास मीडिया और डिजिटल कंटेंट के क्षेत्र में 20 से अधिक वर्षों का व्यापक अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नईदुनिया से प्रूफ रीडर के रूप में की। 2012 से…. और पढ़ें
Ali Khamenei funeral, Mojtaba Khamenei, Iran Supreme Leader funeral, Indian delegation to Iran, India Iran relations, Tehran news, Iran latest news, Middle East news, Ayatollah Khamenei funeral, India delegation Iran 2026, global news, Iran funeral ceremony, अयातुल्ला अली खामेनेई, खामेनेई अंतिम संस्कार, मोजतबा खामेनेई, ईरान समाचार, भारत का प्रतिनिधिमंडल ईरान, ईरान-भारत संबंध, खामेनेई फ्यूनरल, तेहरान समाचार, ईरान ताजा खबर, मध्य पूर्व समाचार, भारत ईरान डेलिगेशन, विश्व समाचार
तीसरी शादी के बाद आमिर खान इस खास बॉलीवुड क्लब में शामिल, जानिए किन सितारों की लिस्ट में जुड़ा नाम  India.Com">Google Newsतीसरी शादी के बाद आमिर खान इस खास बॉलीवुड क्लब में शामिल, जानिए किन सितारों की लिस्ट में जुड़ा नाम  India.Com

आशिकाना में दिए इंटीमेट सीन्स

जानकारी के लिए आपको बता दें की खुशी दुबे टीवी इंडस्ट्री पर अपने बोल्ड रोल्स की वजह से काफी ज्यादा पसंद की गई। ‘आशिकाना’ सीरियल में भी उन्होंने अपने को एक्टर जैन इबाद खान के साथ में काफी सारे इंटीमेट सीन दिए थे।

खुशी दुबे और इबाद खान के इंटीमेट सीन ने टेलीविजन पर पूरी तरीके से तहलका मचा दिया था। ऐसा इसीलिए क्योंकि अभी तक टीवी सीरियल्स में इस तरीके के बोल्ड सीन फिल्माए नहीं गए हैं।

बोल्ड सीन को कैसे चुनती हैं ख़ुशी

अब हाल ही में खुशी दुबे ने अपने बोल्ड और इंटिमेट सीन्स को लेकर बात की है। जब अभिनेत्री से सवाल किया गया कि क्या उन्होंने इंटिमेट सीन्स के लिए कोई भी लिमिट तय की है? क्या स्किन शो ऑफ करने में वह कंफर्टेबल है?

टेलीटॉक के साथ बातचीत के दौरान खुशी दुबे ने इस पर खुलासा किया कि “मैंने कभी भी नहीं सोचा कि स्क्रीन पर कितनी ज्यादा स्किन दिखानी है और कितनी नहीं दिखानी है। मैंने कभी भी इस सोच के साथ में रोल नहीं लिया था।”

आगे बात करते हुए खुशी ने कहा कि “जब भी मुझे कोई रोल ऑफर होता है तो मैं यहीं देखती हूं कि आर्टिस्ट के तौर पर मेरा कितना रोल है। मैंने फिल्मों में देखा है कि बहुत ज्यादा बोल्ड और इंटिमेट सीन फिल्माए जाते हैं।”

इंटीमेट सीन देने पर नहीं कोई पछतावा

बोल्ड सीन को लेकर बात करते हुए खुशी ने कहा कि “अगर किसी शो या फिर फिल्म में जबरदस्ती इंटीमेट सीन डाल दिया जा रहा है तो वह काफी वल्गर नजर आता है।” खुशी ने यह भी बताया कि उन्हें ‘आशिकाना’ शो में बोल्ड सीन करने का कोई भी पछतावा नहीं है क्योंकि वह आज जो भी है उसी शो की वजह से हैं।

">को-एक्टर संग टीवी शो में दिए भर-भरकर बोल्ड सीन, 25 साल की हसीना बोलीं- जबरदस्ती… Khushi Dubey On Intimate Scenes: खुशी दुबे टीवी इंडस्ट्री की एक जानी-मानी अभिनेत्री है और आपको बताते चलें कि उन्होंने ‘नागिन’ में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी। लेकिन जल्दी ही वह ‘पापा कहते हैं’ शो में नजर आने वाली हैं।           आशिकाना में दिए इंटीमेट सीन्स जानकारी के लिए आपको बता दें की खुशी दुबे टीवी इंडस्ट्री पर अपने बोल्ड रोल्स की वजह से काफी ज्यादा पसंद की गई। ‘आशिकाना’ सीरियल में भी उन्होंने अपने को एक्टर जैन इबाद खान के साथ में काफी सारे इंटीमेट सीन दिए थे।    खुशी दुबे और इबाद खान के इंटीमेट सीन ने टेलीविजन पर पूरी तरीके से तहलका मचा दिया था। ऐसा इसीलिए क्योंकि अभी तक टीवी सीरियल्स में इस तरीके के बोल्ड सीन फिल्माए नहीं गए हैं।  बोल्ड सीन को कैसे चुनती हैं ख़ुशी अब हाल ही में खुशी दुबे ने अपने बोल्ड और इंटिमेट सीन्स को लेकर बात की है। जब अभिनेत्री से सवाल किया गया कि क्या उन्होंने इंटिमेट सीन्स के लिए कोई भी लिमिट तय की है? क्या स्किन शो ऑफ करने में वह कंफर्टेबल है?  टेलीटॉक के साथ बातचीत के दौरान खुशी दुबे ने इस पर खुलासा किया कि “मैंने कभी भी नहीं सोचा कि स्क्रीन पर कितनी ज्यादा स्किन दिखानी है और कितनी नहीं दिखानी है। मैंने कभी भी इस सोच के साथ में रोल नहीं लिया था।”  आगे बात करते हुए खुशी ने कहा कि “जब भी मुझे कोई रोल ऑफर होता है तो मैं यहीं देखती हूं कि आर्टिस्ट के तौर पर मेरा कितना रोल है। मैंने फिल्मों में देखा है कि बहुत ज्यादा बोल्ड और इंटिमेट सीन फिल्माए जाते हैं।”  इंटीमेट सीन देने पर नहीं कोई पछतावा बोल्ड सीन को लेकर बात करते हुए खुशी ने कहा कि “अगर किसी शो या फिर फिल्म में जबरदस्ती इंटीमेट सीन डाल दिया जा रहा है तो वह काफी वल्गर नजर आता है।” खुशी ने यह भी बताया कि उन्हें ‘आशिकाना’ शो में बोल्ड सीन करने का कोई भी पछतावा नहीं है क्योंकि वह आज जो भी है उसी शो की वजह से हैं।

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