आमिर खान और गौरी स्प्रैट की शादी पर विक्की कौशल ने दी प्रतिक्रिया, बोले- ‘दोनों के लिए बहत खुश…’
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Aamir Khan Third Wedding: आमिर खान और गौरी स्प्रैट 5 जुलाई को शादी करने वाले हैं। आमिर की तीसरी शादी को लेकर विक्की कौशल ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
गौरी-आमिर और विक्की कौशल
– फोटो : सोशल मीडिया
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अभिनेता विक्की कौशल ने सुपरस्टार आमिर खान और उनकी मंगेतर गौरी स्प्रैट को शादी के लिए बधाई दी है। मुंबई में एक इवेंट के दौरान विक्की ने आमिर की तीसरी शादी को लेकर यह खास बात कही है।
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Aamir Khan Third Wedding: आमिर खान और गौरी स्प्रैट 5 जुलाई को शादी करने वाले हैं। आमिर की तीसरी शादी को लेकर विक्की कौशल ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
गौरी-आमिर और विक्की कौशल – फोटो : सोशल मीडिया
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अभिनेता विक्की कौशल ने सुपरस्टार आमिर खान और उनकी मंगेतर गौरी स्प्रैट को शादी के लिए बधाई दी है। मुंबई में एक इवेंट के दौरान विक्की ने आमिर की तीसरी शादी को लेकर यह खास बात कही है।
इंटरनेट डेस्क। छोटे पर्दे की मशहूर अदाकारा संचिता उगले ने आज सुसाइड कर लिया। इस अभिनेत्री का शव सीलिंग फैन से लटका मिला। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। टीवी सीरियल ;कुमकुम भाग्यऔर ;वागले की दुनियामें संचिता उगले का शानदार अभिनय देखने को मिला है। पुलिस को कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। सुसाइड नोट भी बरामद नहीं हुआ है। खबरों के अनुसार, घटना के समय वे घर पर अकेली थीं। पिता ने बेटी की मौत के लिए किसी को जिम्मेदार भी नहीं ठहराया।
आपको बात दें टीवी की स्टार अभिनेत्री संचिता के निधन से कुछ घंटों पहले ही उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट से एक रील पोस्ट हुई थी। इसमें वह 'डफली वाले, डफली बजा' गाने पर लिपसिंक करती नजर आई। इसके कैप्शन में अभिनेत्री ने लिखा था, ;मैं नाचूं, तू नचा।
PC:jagran
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इंटरनेट डेस्क। छोटे पर्दे की मशहूर अदाकारा संचिता उगले ने आज सुसाइड कर लिया। इस अभिनेत्री का शव सीलिंग फैन से लटका मिला। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। टीवी सीरियल ;कुमकुम भाग्यऔर ;वागले की दुनियामें संचिता उगले का शानदार अभिनय देखने को मिला है। पुलिस को कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। सुसाइड नोट भी बरामद नहीं हुआ है। खबरों के अनुसार, घटना के समय वे घर पर अकेली थीं। पिता ने बेटी की मौत के लिए किसी को जिम्मेदार भी नहीं ठहराया।
आपको बात दें टीवी की स्टार अभिनेत्री संचिता के निधन से कुछ घंटों पहले ही उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट से एक रील पोस्ट हुई थी। इसमें वह 'डफली वाले, डफली बजा' गाने पर लिपसिंक करती नजर आई। इसके कैप्शन में अभिनेत्री ने लिखा था, ;मैं नाचूं, तू नचा।
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TV star actress, Sanchita Ugale, suicide, Hindi news">टीवी की स्टार अभिनेत्री Sanchita Ugale ने किया सुसाइड, सीलिंग फैन से लटका मिला शव
इंटरनेट डेस्क। छोटे पर्दे की मशहूर अदाकारा संचिता उगले ने आज सुसाइड कर लिया। इस अभिनेत्री का शव सीलिंग फैन से लटका मिला। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। टीवी सीरियल ;कुमकुम भाग्यऔर ;वागले की दुनियामें संचिता उगले का शानदार अभिनय देखने को मिला है। पुलिस को कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। सुसाइड नोट भी बरामद नहीं हुआ है। खबरों के अनुसार, घटना के समय वे घर पर अकेली थीं। पिता ने बेटी की मौत के लिए किसी को जिम्मेदार भी नहीं ठहराया।
आपको बात दें टीवी की स्टार अभिनेत्री संचिता के निधन से कुछ घंटों पहले ही उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट से एक रील पोस्ट हुई थी। इसमें वह 'डफली वाले, डफली बजा' गाने पर लिपसिंक करती नजर आई। इसके कैप्शन में अभिनेत्री ने लिखा था, ;मैं नाचूं, तू नचा।
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TV star actress, Sanchita Ugale, suicide, Hindi news
28 साल की सिंगापुरी युवती एला से दोस्ती करने के लिए दुनिया भर के हजारों पुरुष बेताब थे। एला ने इन सबको चूना लगाया। जानिए कैसे ऑनलाइन ठगी करते हैं म्यांमार के स्कैम सेंटर्स। ALSO READ: क्या भविष्य में बचा रहेगा इंडिया गठबंधन?
केरल का सफीर जिस कमरे में काम करता था, वहां यह निर्देश साफ लिखा था: “तुम्हारे पास हर शख्स को प्यार में फंसाने के लिए चार दिन हैं।”
कबूतरबाजों ने केरल के सफीर मोहम्मद को विदेश में नौकरी का झांसा देकर म्यामांर के एक स्कैम सेंटर के हवाले कर दिया। लोगों को ठगने वाले इस अड्डे में सफीर ने मार पीट से बचने के लिए अपनी नई ऑनलाइन पहचान बनाई, 28 साल की एक सिंगापुरी महिला की। सफीर का ऑनलाइन नाम था एला। हर दिन की शिफ्ट में सफीर 100 से ज्यादा लोगों से ऑनलाइन चैट करता था। इस दौरान सुपरवाइजर बिजली का झटका देने वाली छड़ी के साथ सफीर समेत बाकी कामगारों के सिर पर सवार रहता था।
स्कैमर्स का अंतराष्ट्रीय प्रेम जाल
एक ही महीने में सफीर ने 17 देशों के करीब 50,000 लोगों से संपर्क साध लिया। अमेरिकी समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस को मिले रिकॉर्ड्स से पता चला है कि सफीर के झांसे में आने वाले लोगों में कुर्दिस्तान का एक विधुर दर्जी, तुर्की का एक पेस्ट्री बेकर, किर्गिस्तान का एक भेड़ पालक किसान, रूस का इंजीनियर और इराक के सैनिक भी थे। इसी दौरान एला नाम से चैटिंग कर रहे सफीर ने जर्मनी के पेंटर, अर्जेंटीना के बंदरगाह अधिकारी, इंडोनेशिया के छात्र, पोलैंड के सिक्योरिटी गार्ड और जॉर्जिया के डेयरी किसान के साथ भी घर बसाने जैसी बातें कर दी।
सफीर ये सब अमेरिकी टेक कंपनियों के AI मॉडलों के सहारे कर रहा था। वह एक कमांड के जरिए अपनी बात को दर्जनों भाषाओं में ट्रांसलेट करता था और फिर हर देश के नागरिक के साथ उसी की भाषा में चैट करता था। AI टूल्स की मदद से हर विक्टिम का खास प्रोफाइल भी बनाया जा चुका था। ALSO READ: अयोध्या में बनने वाली मस्जिद का क्या हाल है?
एपी की जांच में क्या क्या पता चला
जांच के दौरान पता चला कि ऑनलाइन फर्जीवाड़ा करने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के सहारे संभावित शिकारों की पहचान करते हैं। इसके बाद वे दूसरे AI टूल्स का सहारा लेकर पीड़ितों के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाते हैं। सैटेलाइट डिश की मदद से जालसाज इंटरनेट पर लगाए गए प्रतिबंधों को भी पार कर जाते हैं। एपी के मुताबिक, अमेरिकी टेक कंपनियां खुद भले ही कोई अपराध न कर रही हों, लेकिन जालसाज उनके टूल्स का दुरुपयोग कर रहे हैं।
अमेरिकी AI मॉडल्स, चैटजीपीटी और जेमेनाई का इस्तेमाल कर स्कैमर्स ने खास किस्म के सॉफ्टवेयर बनाए और फिर एक साथ कई भाषाओं में आसानी से काम किया। कॉन्जेंट कंम्युनिकेशन, AT&T, डिजिटल ओशन और ओरैकल जैसी सेवाओं का भी खूब इस्तेमाल किया गया।
हिंसा और सैन्य शासन से जूझ रहे म्यामांर के बॉर्डर का बड़ा हिस्सा खुली सीमा है। अमेरिकी खरबपति इलॉन मस्क की कंपनी स्टारलिंक, वहां सबसे बड़ी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर है। आईपी एड्रेस और सैटेलाइट तस्वीरो की जांच से पता चला कि इनमें से कम से कम 13 स्टारलिंक का इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे थे।
बढ़ते दबाव के बीच कैसा है अमेरिकी टेक कंपनियों का रुख
एक्सपर्ट कहते हैं कि अमेरिकी टेक कंपनियां चाहें तो इस धोखाधड़ी को रोक सकती हैं। लेकिन इसके लिए कोई कानूनी ढांचा नहीं है और कंपनियों को बिजनेस कम होने की आशंका भी रहती है। अपराधों की जांच से जुड़े अमेरिका के संघीय आयोग के मुताबिक, 2024 में अमेरिकियों को ऐसी जालसाजी से करीब 200 अरब डॉलर का नुकसान हुआ। ALSO READ: भीषण गर्मी के चलते पेरिस के मुर्दाघरों में जगह कम पड़ी
ओपन एआई और गूगल का कहना है कि वे पूरी कोशिश कर रहे हैं कि स्कैमर्स उनके टूल्स का दुरुपयोग न कर पाएं। वहीं स्टारलिंक ने इस मामले में एपी को कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। ओपन एआई के मुताबिक, यूजर्स के व्यहार को ट्रैक करके वे धोखाधड़ी का पता लगाने में सफल हो रही है। कंपनी के मुताबिक, 95 फीसदी सटीकता के साथ वह हर महीने एक लाख स्कैम अकाउंट बंद कर रही है।
इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडरों का कहना है कि वे यह नहीं देख सकते कि उनके यूजर किस तरह का कंटेट शेयर कर रहे हैं। निजता संबंधी नियम कायदे और कानून उन्हें ऐसा करने से रोकते हैं। सभी इंटरनेट कंपनियों के मुताबिक, शिकायत मिलने पर उन्होंने हमेशा कानून का पालन कराने वाली एजेंसियों के साथ सहयोग किया है।
बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दवाब के बीच अक्टूबर 2025 में म्यांमार की सैन्य सरकार ने कई स्कैम सेंटरों को ध्वस्त भी किया। सेना ने इस कार्रवाई के वीडियो भी रिलीज किए। लेकिन जनवरी 2026 में ध्वस्तीकरण वाली जगह से 30 किलोमीटर दूर फिर नए स्कैम सेंटर बनने लगे। जांचकर्ताओं के मुताबिक, अक्टूबर की कार्रवाई के बाद से म्यांमार में कम से कम 25 नई जगहों से ऐसी ऑनलाइन ठगी हो रही है। न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक, सैटेलाइट तस्वीरों से भी इन दावों की पुष्टि हो रही है। और इन नए मामलों में भी एक चीज कॉमन है: स्टारलिंक का इंटरनेट। ALSO READ: पिछड़े देशों में पलायन से अमीर देशों को हुआ खूब फायदा
केरल से कैसे म्यांमार पहुंचे सफीर
दक्षिण भारत के केरल राज्य से ताल्लुक रखने वाले सफीर ने एक दिन इंटरनेट पर थाइलैंड में टूरिज्म से जुड़ी एक नौकरी देखी। दोनों ने उस पर क्लिक किया। फिर उन्हें नियमित रूप से निर्देश मिलने लगे। कुछ ही महीनों पर बाद दोनों बैंकॉक हवाई अड्डे पर उतरे। वहां उनके लिए एक काले रंग की कार खड़ी थी। दोनों कार में सवार हुए, गाड़ी रात भर चली। सफीर के मुताबिक अगली सुबह वे हथियारबंद लोगों से घिरे हुए थे।
दोनों दोस्तों को म्यामांर बॉर्डर के पास मोई नदी पार कराई गई और ताई चांग के स्कैम सेंटर में ठूंस दिया गया।
शुरुआत में जब दोनों से लोगों को ठगने से इनकार किया तो उन्हें पीट पीटकर बेहाल कर दिया गया। कुछ तस्वीरों में सफीर का चोट से लाल शरीर और सूजन से भरा चेहरा दिखाई दे रहा था। बाद में स्कैमिंग के दौरान भी मार पीट होती रहती थी। सफीर के मुताबिक, “जब वे मेरे कंप्यूटर के पास आते थे तो मेरे हाथ कांपने लगते थे, मुझे पसीना आने लगता था।”
डर के मारे दोनों दोस्त एक तंग गलियारे में साथ में सोया करते थे। 2025 में किसी तरह बाहरी दुनिया से संपर्क करके सफीर ने अपनी लोकेशन और आपबीती बताई। फिर हर एक के लिए पांच लाख भारतीय रुपये चुका कर सफीर और उनके दोस्त समेत 21 भारतीय इस चंगुल से निकल सके।
अमेरिकी जांचकर्ताओं के मुताबिक म्यांमार, कंबोडिया और नाइजीरिया में चल रहे ऐसे स्कैम सेंटरों में कम से कम 19 देशों के नागरिक काम कर चुके हैं।
Myanmar Scam Centers, Romance Scam, AI Romance Scam, Ella Singapore Scam, Safir Mohammad Kerala, Myanmar Cyber Scam, Online Love Scam, ChatGPT Scam, Gemini AI Scam, Starlink Myanmar, AI Cyber Fraud, Myanmar Scam Compound, Online Fraud News Hindi, International Scam Network, Love Scam AI, म्यांमार स्कैम सेंटर्स, एआई, एला">
28 साल की सिंगापुरी युवती एला से दोस्ती करने के लिए दुनिया भर के हजारों पुरुष बेताब थे। एला ने इन सबको चूना लगाया। जानिए कैसे ऑनलाइन ठगी करते हैं म्यांमार के स्कैम सेंटर्स। ALSO READ: क्या भविष्य में बचा रहेगा इंडिया गठबंधन?
केरल का सफीर जिस कमरे में काम करता था, वहां यह निर्देश साफ लिखा था: “तुम्हारे पास हर शख्स को प्यार में फंसाने के लिए चार दिन हैं।”
कबूतरबाजों ने केरल के सफीर मोहम्मद को विदेश में नौकरी का झांसा देकर म्यामांर के एक स्कैम सेंटर के हवाले कर दिया। लोगों को ठगने वाले इस अड्डे में सफीर ने मार पीट से बचने के लिए अपनी नई ऑनलाइन पहचान बनाई, 28 साल की एक सिंगापुरी महिला की। सफीर का ऑनलाइन नाम था एला। हर दिन की शिफ्ट में सफीर 100 से ज्यादा लोगों से ऑनलाइन चैट करता था। इस दौरान सुपरवाइजर बिजली का झटका देने वाली छड़ी के साथ सफीर समेत बाकी कामगारों के सिर पर सवार रहता था।
स्कैमर्स का अंतराष्ट्रीय प्रेम जाल
एक ही महीने में सफीर ने 17 देशों के करीब 50,000 लोगों से संपर्क साध लिया। अमेरिकी समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस को मिले रिकॉर्ड्स से पता चला है कि सफीर के झांसे में आने वाले लोगों में कुर्दिस्तान का एक विधुर दर्जी, तुर्की का एक पेस्ट्री बेकर, किर्गिस्तान का एक भेड़ पालक किसान, रूस का इंजीनियर और इराक के सैनिक भी थे। इसी दौरान एला नाम से चैटिंग कर रहे सफीर ने जर्मनी के पेंटर, अर्जेंटीना के बंदरगाह अधिकारी, इंडोनेशिया के छात्र, पोलैंड के सिक्योरिटी गार्ड और जॉर्जिया के डेयरी किसान के साथ भी घर बसाने जैसी बातें कर दी।
सफीर ये सब अमेरिकी टेक कंपनियों के AI मॉडलों के सहारे कर रहा था। वह एक कमांड के जरिए अपनी बात को दर्जनों भाषाओं में ट्रांसलेट करता था और फिर हर देश के नागरिक के साथ उसी की भाषा में चैट करता था। AI टूल्स की मदद से हर विक्टिम का खास प्रोफाइल भी बनाया जा चुका था। ALSO READ: अयोध्या में बनने वाली मस्जिद का क्या हाल है?
एपी की जांच में क्या क्या पता चला
जांच के दौरान पता चला कि ऑनलाइन फर्जीवाड़ा करने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के सहारे संभावित शिकारों की पहचान करते हैं। इसके बाद वे दूसरे AI टूल्स का सहारा लेकर पीड़ितों के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाते हैं। सैटेलाइट डिश की मदद से जालसाज इंटरनेट पर लगाए गए प्रतिबंधों को भी पार कर जाते हैं। एपी के मुताबिक, अमेरिकी टेक कंपनियां खुद भले ही कोई अपराध न कर रही हों, लेकिन जालसाज उनके टूल्स का दुरुपयोग कर रहे हैं।
अमेरिकी AI मॉडल्स, चैटजीपीटी और जेमेनाई का इस्तेमाल कर स्कैमर्स ने खास किस्म के सॉफ्टवेयर बनाए और फिर एक साथ कई भाषाओं में आसानी से काम किया। कॉन्जेंट कंम्युनिकेशन, AT&T, डिजिटल ओशन और ओरैकल जैसी सेवाओं का भी खूब इस्तेमाल किया गया।
हिंसा और सैन्य शासन से जूझ रहे म्यामांर के बॉर्डर का बड़ा हिस्सा खुली सीमा है। अमेरिकी खरबपति इलॉन मस्क की कंपनी स्टारलिंक, वहां सबसे बड़ी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर है। आईपी एड्रेस और सैटेलाइट तस्वीरो की जांच से पता चला कि इनमें से कम से कम 13 स्टारलिंक का इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे थे।
बढ़ते दबाव के बीच कैसा है अमेरिकी टेक कंपनियों का रुख
एक्सपर्ट कहते हैं कि अमेरिकी टेक कंपनियां चाहें तो इस धोखाधड़ी को रोक सकती हैं। लेकिन इसके लिए कोई कानूनी ढांचा नहीं है और कंपनियों को बिजनेस कम होने की आशंका भी रहती है। अपराधों की जांच से जुड़े अमेरिका के संघीय आयोग के मुताबिक, 2024 में अमेरिकियों को ऐसी जालसाजी से करीब 200 अरब डॉलर का नुकसान हुआ। ALSO READ: भीषण गर्मी के चलते पेरिस के मुर्दाघरों में जगह कम पड़ी
ओपन एआई और गूगल का कहना है कि वे पूरी कोशिश कर रहे हैं कि स्कैमर्स उनके टूल्स का दुरुपयोग न कर पाएं। वहीं स्टारलिंक ने इस मामले में एपी को कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। ओपन एआई के मुताबिक, यूजर्स के व्यहार को ट्रैक करके वे धोखाधड़ी का पता लगाने में सफल हो रही है। कंपनी के मुताबिक, 95 फीसदी सटीकता के साथ वह हर महीने एक लाख स्कैम अकाउंट बंद कर रही है।
इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडरों का कहना है कि वे यह नहीं देख सकते कि उनके यूजर किस तरह का कंटेट शेयर कर रहे हैं। निजता संबंधी नियम कायदे और कानून उन्हें ऐसा करने से रोकते हैं। सभी इंटरनेट कंपनियों के मुताबिक, शिकायत मिलने पर उन्होंने हमेशा कानून का पालन कराने वाली एजेंसियों के साथ सहयोग किया है।
बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दवाब के बीच अक्टूबर 2025 में म्यांमार की सैन्य सरकार ने कई स्कैम सेंटरों को ध्वस्त भी किया। सेना ने इस कार्रवाई के वीडियो भी रिलीज किए। लेकिन जनवरी 2026 में ध्वस्तीकरण वाली जगह से 30 किलोमीटर दूर फिर नए स्कैम सेंटर बनने लगे। जांचकर्ताओं के मुताबिक, अक्टूबर की कार्रवाई के बाद से म्यांमार में कम से कम 25 नई जगहों से ऐसी ऑनलाइन ठगी हो रही है। न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक, सैटेलाइट तस्वीरों से भी इन दावों की पुष्टि हो रही है। और इन नए मामलों में भी एक चीज कॉमन है: स्टारलिंक का इंटरनेट। ALSO READ: पिछड़े देशों में पलायन से अमीर देशों को हुआ खूब फायदा
केरल से कैसे म्यांमार पहुंचे सफीर
दक्षिण भारत के केरल राज्य से ताल्लुक रखने वाले सफीर ने एक दिन इंटरनेट पर थाइलैंड में टूरिज्म से जुड़ी एक नौकरी देखी। दोनों ने उस पर क्लिक किया। फिर उन्हें नियमित रूप से निर्देश मिलने लगे। कुछ ही महीनों पर बाद दोनों बैंकॉक हवाई अड्डे पर उतरे। वहां उनके लिए एक काले रंग की कार खड़ी थी। दोनों कार में सवार हुए, गाड़ी रात भर चली। सफीर के मुताबिक अगली सुबह वे हथियारबंद लोगों से घिरे हुए थे।
दोनों दोस्तों को म्यामांर बॉर्डर के पास मोई नदी पार कराई गई और ताई चांग के स्कैम सेंटर में ठूंस दिया गया।
शुरुआत में जब दोनों से लोगों को ठगने से इनकार किया तो उन्हें पीट पीटकर बेहाल कर दिया गया। कुछ तस्वीरों में सफीर का चोट से लाल शरीर और सूजन से भरा चेहरा दिखाई दे रहा था। बाद में स्कैमिंग के दौरान भी मार पीट होती रहती थी। सफीर के मुताबिक, “जब वे मेरे कंप्यूटर के पास आते थे तो मेरे हाथ कांपने लगते थे, मुझे पसीना आने लगता था।”
डर के मारे दोनों दोस्त एक तंग गलियारे में साथ में सोया करते थे। 2025 में किसी तरह बाहरी दुनिया से संपर्क करके सफीर ने अपनी लोकेशन और आपबीती बताई। फिर हर एक के लिए पांच लाख भारतीय रुपये चुका कर सफीर और उनके दोस्त समेत 21 भारतीय इस चंगुल से निकल सके।
अमेरिकी जांचकर्ताओं के मुताबिक म्यांमार, कंबोडिया और नाइजीरिया में चल रहे ऐसे स्कैम सेंटरों में कम से कम 19 देशों के नागरिक काम कर चुके हैं।
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28 साल की सिंगापुरी युवती एला से दोस्ती करने के लिए दुनिया भर के हजारों पुरुष बेताब थे। एला ने इन सबको चूना लगाया। जानिए कैसे ऑनलाइन ठगी करते हैं म्यांमार के स्कैम सेंटर्स। ALSO READ: क्या भविष्य में बचा रहेगा इंडिया गठबंधन?
केरल का सफीर जिस कमरे में काम करता था, वहां यह निर्देश साफ लिखा था: “तुम्हारे पास हर शख्स को प्यार में फंसाने के लिए चार दिन हैं।”
कबूतरबाजों ने केरल के सफीर मोहम्मद को विदेश में नौकरी का झांसा देकर म्यामांर के एक स्कैम सेंटर के हवाले कर दिया। लोगों को ठगने वाले इस अड्डे में सफीर ने मार पीट से बचने के लिए अपनी नई ऑनलाइन पहचान बनाई, 28 साल की एक सिंगापुरी महिला की। सफीर का ऑनलाइन नाम था एला। हर दिन की शिफ्ट में सफीर 100 से ज्यादा लोगों से ऑनलाइन चैट करता था। इस दौरान सुपरवाइजर बिजली का झटका देने वाली छड़ी के साथ सफीर समेत बाकी कामगारों के सिर पर सवार रहता था।
स्कैमर्स का अंतराष्ट्रीय प्रेम जाल
एक ही महीने में सफीर ने 17 देशों के करीब 50,000 लोगों से संपर्क साध लिया। अमेरिकी समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस को मिले रिकॉर्ड्स से पता चला है कि सफीर के झांसे में आने वाले लोगों में कुर्दिस्तान का एक विधुर दर्जी, तुर्की का एक पेस्ट्री बेकर, किर्गिस्तान का एक भेड़ पालक किसान, रूस का इंजीनियर और इराक के सैनिक भी थे। इसी दौरान एला नाम से चैटिंग कर रहे सफीर ने जर्मनी के पेंटर, अर्जेंटीना के बंदरगाह अधिकारी, इंडोनेशिया के छात्र, पोलैंड के सिक्योरिटी गार्ड और जॉर्जिया के डेयरी किसान के साथ भी घर बसाने जैसी बातें कर दी।
सफीर ये सब अमेरिकी टेक कंपनियों के AI मॉडलों के सहारे कर रहा था। वह एक कमांड के जरिए अपनी बात को दर्जनों भाषाओं में ट्रांसलेट करता था और फिर हर देश के नागरिक के साथ उसी की भाषा में चैट करता था। AI टूल्स की मदद से हर विक्टिम का खास प्रोफाइल भी बनाया जा चुका था। ALSO READ: अयोध्या में बनने वाली मस्जिद का क्या हाल है?
एपी की जांच में क्या क्या पता चला
जांच के दौरान पता चला कि ऑनलाइन फर्जीवाड़ा करने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के सहारे संभावित शिकारों की पहचान करते हैं। इसके बाद वे दूसरे AI टूल्स का सहारा लेकर पीड़ितों के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाते हैं। सैटेलाइट डिश की मदद से जालसाज इंटरनेट पर लगाए गए प्रतिबंधों को भी पार कर जाते हैं। एपी के मुताबिक, अमेरिकी टेक कंपनियां खुद भले ही कोई अपराध न कर रही हों, लेकिन जालसाज उनके टूल्स का दुरुपयोग कर रहे हैं।
अमेरिकी AI मॉडल्स, चैटजीपीटी और जेमेनाई का इस्तेमाल कर स्कैमर्स ने खास किस्म के सॉफ्टवेयर बनाए और फिर एक साथ कई भाषाओं में आसानी से काम किया। कॉन्जेंट कंम्युनिकेशन, AT&T, डिजिटल ओशन और ओरैकल जैसी सेवाओं का भी खूब इस्तेमाल किया गया।
हिंसा और सैन्य शासन से जूझ रहे म्यामांर के बॉर्डर का बड़ा हिस्सा खुली सीमा है। अमेरिकी खरबपति इलॉन मस्क की कंपनी स्टारलिंक, वहां सबसे बड़ी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर है। आईपी एड्रेस और सैटेलाइट तस्वीरो की जांच से पता चला कि इनमें से कम से कम 13 स्टारलिंक का इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे थे।
बढ़ते दबाव के बीच कैसा है अमेरिकी टेक कंपनियों का रुख
एक्सपर्ट कहते हैं कि अमेरिकी टेक कंपनियां चाहें तो इस धोखाधड़ी को रोक सकती हैं। लेकिन इसके लिए कोई कानूनी ढांचा नहीं है और कंपनियों को बिजनेस कम होने की आशंका भी रहती है। अपराधों की जांच से जुड़े अमेरिका के संघीय आयोग के मुताबिक, 2024 में अमेरिकियों को ऐसी जालसाजी से करीब 200 अरब डॉलर का नुकसान हुआ। ALSO READ: भीषण गर्मी के चलते पेरिस के मुर्दाघरों में जगह कम पड़ी
ओपन एआई और गूगल का कहना है कि वे पूरी कोशिश कर रहे हैं कि स्कैमर्स उनके टूल्स का दुरुपयोग न कर पाएं। वहीं स्टारलिंक ने इस मामले में एपी को कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। ओपन एआई के मुताबिक, यूजर्स के व्यहार को ट्रैक करके वे धोखाधड़ी का पता लगाने में सफल हो रही है। कंपनी के मुताबिक, 95 फीसदी सटीकता के साथ वह हर महीने एक लाख स्कैम अकाउंट बंद कर रही है।
इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडरों का कहना है कि वे यह नहीं देख सकते कि उनके यूजर किस तरह का कंटेट शेयर कर रहे हैं। निजता संबंधी नियम कायदे और कानून उन्हें ऐसा करने से रोकते हैं। सभी इंटरनेट कंपनियों के मुताबिक, शिकायत मिलने पर उन्होंने हमेशा कानून का पालन कराने वाली एजेंसियों के साथ सहयोग किया है।
बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दवाब के बीच अक्टूबर 2025 में म्यांमार की सैन्य सरकार ने कई स्कैम सेंटरों को ध्वस्त भी किया। सेना ने इस कार्रवाई के वीडियो भी रिलीज किए। लेकिन जनवरी 2026 में ध्वस्तीकरण वाली जगह से 30 किलोमीटर दूर फिर नए स्कैम सेंटर बनने लगे। जांचकर्ताओं के मुताबिक, अक्टूबर की कार्रवाई के बाद से म्यांमार में कम से कम 25 नई जगहों से ऐसी ऑनलाइन ठगी हो रही है। न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक, सैटेलाइट तस्वीरों से भी इन दावों की पुष्टि हो रही है। और इन नए मामलों में भी एक चीज कॉमन है: स्टारलिंक का इंटरनेट। ALSO READ: पिछड़े देशों में पलायन से अमीर देशों को हुआ खूब फायदा
केरल से कैसे म्यांमार पहुंचे सफीर
दक्षिण भारत के केरल राज्य से ताल्लुक रखने वाले सफीर ने एक दिन इंटरनेट पर थाइलैंड में टूरिज्म से जुड़ी एक नौकरी देखी। दोनों ने उस पर क्लिक किया। फिर उन्हें नियमित रूप से निर्देश मिलने लगे। कुछ ही महीनों पर बाद दोनों बैंकॉक हवाई अड्डे पर उतरे। वहां उनके लिए एक काले रंग की कार खड़ी थी। दोनों कार में सवार हुए, गाड़ी रात भर चली। सफीर के मुताबिक अगली सुबह वे हथियारबंद लोगों से घिरे हुए थे।
दोनों दोस्तों को म्यामांर बॉर्डर के पास मोई नदी पार कराई गई और ताई चांग के स्कैम सेंटर में ठूंस दिया गया।
शुरुआत में जब दोनों से लोगों को ठगने से इनकार किया तो उन्हें पीट पीटकर बेहाल कर दिया गया। कुछ तस्वीरों में सफीर का चोट से लाल शरीर और सूजन से भरा चेहरा दिखाई दे रहा था। बाद में स्कैमिंग के दौरान भी मार पीट होती रहती थी। सफीर के मुताबिक, “जब वे मेरे कंप्यूटर के पास आते थे तो मेरे हाथ कांपने लगते थे, मुझे पसीना आने लगता था।”
डर के मारे दोनों दोस्त एक तंग गलियारे में साथ में सोया करते थे। 2025 में किसी तरह बाहरी दुनिया से संपर्क करके सफीर ने अपनी लोकेशन और आपबीती बताई। फिर हर एक के लिए पांच लाख भारतीय रुपये चुका कर सफीर और उनके दोस्त समेत 21 भारतीय इस चंगुल से निकल सके।
अमेरिकी जांचकर्ताओं के मुताबिक म्यांमार, कंबोडिया और नाइजीरिया में चल रहे ऐसे स्कैम सेंटरों में कम से कम 19 देशों के नागरिक काम कर चुके हैं।
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