नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) ने अपनी परीक्षाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक को अपनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। आयोग कार्यालय में कंट्रोल कमांड सेंटर स्थापित किया गया है, जहां से प्रदेशभर के परीक्षा केंद्रों की लाइव निगरानी की जाएगी। यह नई व्यवस्था राज्य सेवा एवं वन सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 से लागू की जा रही है, जो रविवार को आयोजित होगी।
आयोग के चेयरमैन राजेश लाल सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को इस कमांड सेंटर का उद्घाटन किया। इस केंद्र के माध्यम से अधिकारियों को 54 जिलों के 365 परीक्षा केंद्रों पर एक साथ नजर रखने की सुविधा मिलेगी। परीक्षा के दौरान यदि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है तो कमांड सेंटर से सीधे संबंधित केंद्राध्यक्ष को निर्देश दिए जाएंगे।
पहली बार ऐसा निगरानी सिस्टम लागू
परीक्षा में पहली बार त्रिस्तरीय जांच प्रणाली लागू की गई है। यह नकल रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसमें बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, प्रवेश पत्र की स्कैनिंग और हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर (एचएचएमडी) से तलाशी शामिल है। खास बात यह है कि अभ्यर्थियों की पहचान के लिए आंखों की पुतलियों (आइरिस) का मिलान भी किया जाएगा, जिससे फर्जी अभ्यर्थियों की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।
प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर बायोमेट्रिक कक्ष भी कमांड सेंटर से जुड़ा रहेगा। यदि किसी अभ्यर्थी का बायोमेट्रिक मिलान नहीं होता है तो इसकी जानकारी तुरंत कमांड सेंटर को दी जाएगी और आगे की कार्रवाई वहीं से तय होगी।
30 सेकंड से ज्यादा ठहरने पर अलर्ट
पूरी परीक्षा प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) का उपयोग किया जा रहा है। इसके माध्यम से अभ्यर्थियों और पर्यवेक्षकों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी। प्रत्येक कक्ष में अधिकतम 24 अभ्यर्थियों को बैठाया जाएगा और उनके साथ दो पर्यवेक्षक तैनात रहेंगे।
यदि कोई पर्यवेक्षक किसी अभ्यर्थी के पास 30 सेकंड से अधिक समय तक रुकता है, तो कमांड सेंटर से तुरंत अलर्ट भेजा जाएगा और संबंधित पर्यवेक्षक को स्पष्टीकरण देना होगा। इसी प्रकार यदि किसी अभ्यर्थी की गतिविधि संदिग्ध पाई जाती है, तो कक्ष में मौजूद पर्यवेक्षक को तुरंत निर्देश दिए जाएंगे। यह व्यवस्था परीक्षा प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने में सहायक होगी।
प्रवेश और जांच व्यवस्था सख्त
-आयोग ने परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश के लिए भी सख्त नियम लागू किए हैं। अभ्यर्थियों को परीक्षा शुरू होने से 90 मिनट पहले केंद्र पर पहुंचना अनिवार्य किया गया है, क्योंकि जांच प्रक्रिया में अधिक समय लग सकता है। पहले यह समय 45 मिनट था, जिसे अब बढ़ाया गया है।
-प्रवेश के दौरान दो स्तर पर फ्रिस्किंग जांच की जाएगी। पुरुष अभ्यर्थियों की जांच पुरुष कर्मचारियों द्वारा और महिला अभ्यर्थियों की जांच महिला कर्मचारियों द्वारा की जाएगी। ट्रांसजेंडर अभ्यर्थियों को अपनी सुविधा के अनुसार विकल्प दिया गया है।
54 जिले और 365 परीक्षा केंद्र
- 1.35 लाख अभ्यर्थी होंगे शामिल
- 600 से अधिक पर्यवेक्षक तैनात
- 100 से अधिक सेवानिवृत्त अधिकारी आब्जर्वर
- 24 अभ्यर्थी और 2 पर्यवेक्षक हर कक्ष में
परीक्षा कक्ष में क्या ले जा सकेंगे, क्या नहीं
परीक्षा के दौरान सभी इलेक्ट्रानिक उपकरण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। इसमें मोबाइल फोन, स्मार्ट व डिजिटल घड़ियां, ब्लूटूथ, कैलकुलेटर, पेन ड्राइव और अन्य गैजेट शामिल हैं। अभ्यर्थी केवल प्रवेश पत्र, वैध पहचान पत्र, बाल पेन और पारदर्शी पानी की बोतल ही साथ ले जा सकेंगे।
दो सत्रों में होगी परीक्षा
राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 दो सत्रों में आयोजित की जाएगी। आयोग के अधिकारियों के अनुसार, नई तकनीक के साथ परीक्षा की निगरानी व्यवस्था को भविष्य की सभी परीक्षाओं में भी लागू किया जाएगा।
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