इंदौर के चोरल रेंज के रसकुड़िया वनक्षेत्र में वनकर्मियों पर हमले के बाद वन विभाग ने अतिक्रमण हटाने की रणनीति बदल दी है।
HighLights
- इंदौर वनमंडल में अतिक्रमण को लेकर स्थिति बेहद चिंताजनक
- चारों रेंज में मिलकर 300 हेक्टेयर वनभूमि पर कब्जा है
- 40 से ज्यादा लोगों ने अलग-अलग जगह अतिक्रमण कर रखा है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। चोरल रेंज के रसकुड़िया वनक्षेत्र में वनकर्मियों पर हमला होने के बाद इंदौर वनमंडल अतिक्रमण हटाने को लेकर गंभीर हो गया है। वनभूमि से ग्रामीणों का कब्जा हटाने को लेकर नए सिरे से रणनीति बनाई जा रही है। इसका जिम्मा टास्क फोर्स को दिया जा सकता है।
वनमंडलाधिकारी लाल सुधाकर सिंह ने घटनाक्रम को लेकर कलेक्टर शिवम वर्मा और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से चर्चा कर टास्क फोर्स से कार्रवाई कराने पर जोर दिया है। उधर, ग्रामीणों की तरफ से जयस ने मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने वन विभाग पर आरोप लगाते हुए ग्रामीणों को वनभूमि से हटाने का आरोप लगाया है।
पट्टे के लालच में अतिक्रमण
जिले में पांच साल पहले पट्टे बांटे गए थे, जिसमें चोरल, महू और मानपुर से लगे जंगल भी शामिल थे। पट्टे की जमीन दिए जाने को लेकर कुछ रेंजरों ने आपत्ति भी उठाई थी। जांच में वे सही नहीं पाए गए थे। बावजूद इसके राजनीतिक दबाव के चलते ग्रामीणों को वनभूमि पर भी पट्टे दिए गए।
नियमानुसार अधिकतम चार हेक्टेयर जमीन मिलती है। इस वजह से ग्रामीण पट्टे की जमीन से लगे क्षेत्र पर अतिक्रमण करते हैं। इसके लिए पेड़ों की कटाई से लेकर जंगल में आग लगाने की घटनाएं होती हैं। 2021 में चोरल रेंज में अतिक्रमण हटाया गया था, जिसमें ग्रामीण पदम ने चार से बढ़ाकर 40 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा कर लिया था।
300 हेक्टेयर जंगल पर कब्जा
इंदौर वनमंडल में अतिक्रमण को लेकर स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि चारों रेंज में मिलकर 300 हेक्टेयर वनभूमि पर कब्जा है। इंदौर रेंज में भी 40 से ज्यादा लोगों ने अलग-अलग जगह अतिक्रमण कर रखा है, जिसमें सुपर कारिडोर से लगा बिजासन रमणा क्षेत्र भी शामिल है।
सूत्रों के मुताबिक, वर्षों से पदस्थ रहे वनकर्मियों ने भी अतिक्रमण रोकने की कोशिश नहीं की है। वहीं, महू और मानपुर में अतिक्रमण की कार्रवाई से पहले ही राजनीतिक दबाव बनाया जाता है। जबकि चोरल में कब्जा हटाने के दौरान कई बार वनकर्मियों पर हमला भी हुआ है।
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अधिकारियों से मिलकर करेंगे बैठक
चोरल की घटना के बाद जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की गई है। आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए टास्क फोर्स के समक्ष प्रकरण रखा जाएगा। वहीं, अतिक्रमण से जुड़े सभी प्रकरणों की समीक्षा की जाएगी। उसके बाद 80बी का नोटिस देकर कब्जा हटाया जाएगा। – लाल सुधाकर सिंह, डीएफओ, इंदौर वनमंडल
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