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इंदौर में गैस पाइप लाइन ब्लास्ट: शासन के रवैये पर कोर्ट नाराज, कहा- दोषियों के खिलाफ अब तक क्यों नहीं की कार्रवाई

इंदौर में गैस पाइप लाइन ब्लास्ट: शासन के रवैये पर कोर्ट नाराज, कहा- दोषियों के खिलाफ अब तक क्यों नहीं की कार्रवाई

विजय नगर क्षेत्र के सुमन नगर में 23 जून 2026 को हुए गैस पाइप लाइन ब्लास्ट मामले में कोर्ट ने पुलिस के रवैये पर नाराजगी जताई है। कोर्ट में उपस्थित जांच…और पढ़ें

Publish Date: Tue, 14 Jul 2026 11:14:07 AM (IST)Updated Date: Tue, 14 Jul 2026 11:14:07 AM (IST)

गैस पाइप लाइन ब्लास्ट मामले में प्रशासन के रवैये को लेकर कोर्ट नाराज। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. 21 जुलाई को फिर होगी सुनवाई, जांच अधिकारी से कहा अगली सुनवाई पर एसीपी को साथ लाना
  2. कोर्ट ने नाराजगी जताई और कहा कि ऐसा लगता है पुलिस इस मामले की जांच को लेकर गंभीर नहीं है
  3. सुमन नगर में हुए हादसे को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका एडवोकेट रितेश ईनाणी ने दायर की है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। विजय नगर क्षेत्र के सुमन नगर में 23 जून 2026 को हुए गैस पाइप लाइन ब्लास्ट मामले में कोर्ट ने पुलिस के रवैये पर नाराजगी जताई है। कोर्ट में उपस्थित जांच अधिकारी से जब कोर्ट ने पूछा कि दस दिन में जांच कहां तक पहुंची तो जांच अधिकारी बोले कि मैं पांच दिन छुट्टी पर था।

कोर्ट ने पूछा कि ड्रायवर और बोरिंग मशीन मालिक से हुई पूछताछ में पार्षद सहित जो नाम सामने आए हैं, उन लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की। इस पर जांच अधिकारी बगले झांकने लगे। वे सिर्फ इतना ही कह सके कि पार्षद को एक दिन पहले ही नोटिस दिया है।

कोर्ट ने नाराजगी जताई और कहा कि ऐसा लगता है पुलिस इस मामले की जांच को लेकर गंभीर नहीं है। मामले में 21 जुलाई को अगली सुनवाई होगी। कोर्ट ने जांच अधिकारी से कहा कि वे अगली सुनवाई पर एसीपी के साथ उपस्थित रहें।

सुमन नगर में हुए हादसे को लेकर हाई कोर्ट में चल रही यह जनहित याचिका एडवोकेट रितेश ईनाणी ने दायर की है। याचिका में उन्होंने जिम्मेदारों पर आपराधिक केस दर्ज करने और घायलों को निश्शुल्क उपचार उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है। याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट हादसे में झुलसे लोगों का निश्शुल्क उपचार करने और गंभीर रूप से झुलसी युवती को उपचार के लिए अहमदाबाद भेजने के आदेश दे चुकी है।

कोर्ट ने नगर निगम और पुलिस से कहा था कि मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। पिछली सुनवाई पर नगर निगम इस पूरे मामले से खुद को अलग करते हुए कह चुका है कि निगम ने बोरिंग की अनुमति नहीं दी थी, न ही मौके पर बोरिंग मशीन भेजी थी। बोरिंग मशीन पार्षद सोनी ने मौके पर बुलवाई थी। इस पर कोर्ट ने पुलिस से कहा था कि वह सोमवार 13 जुलाई को होने वाली सुनवाई में बताए कि जांच कहां तक पहुंची।

सोमवार को जांच अधिकारी उपस्थित हुए। जब कोर्ट ने उनसे पूछा कि जांच कहां तक पहुंची तो उन्होंने छुट्टी पर जाने की बात कह दी। इस पर न्यायमूर्तिगण ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सिर्फ बोरिंग मशीन के ड्रायवर और मालिक के खिलाफ कार्रवाई से कुछ नहीं होगा। मशीन खुद वहां नहीं गई होगी। पार्षद बालमुकुंद सोनी का नाम सामने आया है तो पुलिस बताए कि उनसे पूछताछ क्यों नहीं की गई। पुलिस को दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने में क्या दिक्कत है।

आरोपितों को क्यों नहीं पकड़ा

एडवोकेट ईनाणी ने बताया कि सुनवाई के दौरान दोषियों की गिरफ्तारी का मुद्दा भी उठा। हमने कोर्ट को बताया कि पुलिस और निगम वास्तविक दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। जांच में जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उनसे पूछताछ तक नहीं की जा रही। सुनवाई के दौरान निजी अस्पतालों द्वारा हादसे में झुलसे लोगों से उपचार के नाम पर पैसा लेने की बात भी सामने आई थी। झुलसे लोगों के स्वजन ने याचिका में इंटरविनर बनकर अपनी बात रखी है।

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