एसपी(ईओडब्ल्यू) रामेश्वर यादव के अनुसार मामला कनाड़िया रोड़ स्थित केनरा बैंक की शाखा का है। मेसर्स एवी ग्राफिक्स एंड ट्रेडिंग के प्रोप्राइटर विमलेश चत …और पढ़ें
HighLights
- ईओडब्ल्यू ने केनरा बैंक के तत्कालीन मैनेजर-सेक्शन हेड को भी आरोपित बनाया
- एसपी(ईओडब्ल्यू) के अनुसार मामला कनाड़िया रोड़ स्थित केनरा बैंक की शाखा का है।
- मेसर्स एवी ग्राफिक्स एंड ट्रेडिंग के प्रोप्राइटर विमलेश चतुर्वेदी ने घोटाले का षड़यंत्र रचा था।
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। केनरा बैंक में करीब 1.70 करोड़ रुपये का लोन घोटाला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने तत्कालीन ब्रांच मैनेजर सहित पांच के विरुद्ध धोखाधड़ी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों और नियमों की अनदेखी कर विवादित भूखंड पर करोड़ों रुपये का लोन स्वीकृत कर बैंक को भारी नुकसान पहुंचाया गया। शिकायत के बाद जांच हुई तो लाभार्थी सहित मैनेजर,सेक्शन हेड,प्रोसेसिंग अधिकारी और मंडल प्रबंधक भी गड़बड़ी में लिप्त मिले।
एसपी(ईओडब्ल्यू) रामेश्वर यादव के अनुसार मामला कनाड़िया रोड़ स्थित केनरा बैंक की शाखा का है। मेसर्स एवी ग्राफिक्स एंड ट्रेडिंग के प्रोप्राइटर विमलेश चतुर्वेदी ने घोटाले का षड़यंत्र रचा था।
उसने मनीष बाग क्षेत्र स्थित एक विवादित भूखंड के जाली दस्तावेज तैयार कर उसकी कीमत कृत्रिम रूप से बढ़ाकर केनरा संपत्ति बैंक में गिरवी रख दी। इसके आधार पर करीब 1.95 करोड़ रुपये के लोन के लिए आवेदन किया गया।
एसपी के मुताबिक बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक तरुण सुभाषचंद्र भार्गव निवासी जय नारायण व्यास कालोनी बीकानेर(राजस्थान), मंडल प्रबंधक शर्मिष्ठासिंह निवासी उपरी नायली बंगाना हिमाचल प्रदेश,प्रोसेसिंग अधिकारी खुशबू सिलावट निवासी बालाजी नगर बड़ोदरा(गुजरात) सेक्शन हेड कौशिक कुमार घोटाले में मिले थे।
आरोपित विमलेश चतुर्वेदी निवासी स्कीम-78 ने उक्त भूखंड को 1 करोड़ 25 लाख रुपये में क्रय करना दर्शाया और फर्जी रजिस्ट्री बना ली। उसमें एचडीएफसी बैंक के फर्जी चेक का उल्लेख किया गया था। 21 दिसंबर 2023 को आरोपित ने कलर प्रिंटिंग मशीने खरीदने के लिए 175 करोड़ का टर्म लोन,20 लाख की सीसी लिमिट की मांग की।
आरोपित तरुण भार्गव ने लेप्स एप के माध्यम से लोन आवेदन स्वीकृत कर लिया और व्यक्तिगर आइडी से जानकारी अपलोड कर दी। जबकि 1 करोड़ से अधिक लोन के लिए संयुक्त निरीक्षण अनिवार्य है। 29 दिसंबर को प्रोसेसिंग अधिकारी खुशबू ने भी बगैर वास्तविक निरीक्षण के यूनिट निरीक्षण की फर्जी रिपोर्ट लगा दी।नियमों के विरुद्ध बगैर एमएसएमई सुलभ शाखा कार्यालय के सीधे स्वयं की शाखा से ही टर्म लोन का भुगतान कर दिया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि उस संपत्ति की बाजार कीमत मात्र 23 लाख रुपये थी। इंदौर विंग ने इस घोटाले की जांच की और जिम्मेदार अफसरों को भी मुलजिम बनाया है।
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