महिला व बाल विकास विभाग में संयुक्त संचालक लक्ष्मीनारायण कंडवाल आठ माह बाद रिटायर होने वाले थे, लेकिन उससे पहले लोकायुक्त विभाग ने छापा मारकर उनकी काली कमाई उजागर कर डाली। कंडवाल का परिवार इंदौर में ही रहता है। इसके चलते उन्होंने रियायरमेंट के पहले जोड़-तोड़ कर अपना तबादला इंदौर में करवा लिया था और बेटे, बहू और रिश्तेदारों के नाम खरीदी जमीनें खरीदी थी।
संयुक्त संचालक कंडवाल ने इंदौर के समीप सोनवाय गांव में 0.097 हेक्टेयर कृषि भूमि खरीदी, जिसकी कीमत साढ़े छह लाख रुपये है। इसके अलावा पीथमपुर के समीप 2.560 हेक्टेयर कृषि भूमि तथा स्कीम-103 में भूखंड क्रमांक 149-सी खरीदा और उस पर जी+3 का 13 हजार वर्गफीट से अधिक निर्माण कराया।
इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक 140 स्थित भूखंड क्रमांक 220 एएम को 21 लाख रुपये में खरीदा। इसके अलावा इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक 140, सेक्टर ए-टाइप में भूखंड क्रमांक 378 भी 15 लाख रुपये में खरीदा। ग्राम बनेडिया, जिला धार में 0.879 हेक्टेयर कृषि भूमि ली। तारपुरा, तहसील सागौर, जिला धार में 2.195 हेक्टेयर कृषि भूमि भी खरीदी। ग्राम बेकल्या, तहसील पीथमपुर, जिला धार में 1.740 हेक्टेयर कृषि भूमि ली। आरोपी ने ज्यादातर पैसा संपत्ति खरीदने में ही लगाया। इसके अलावा बैंक ऑफ इंडिया की सांठा बाजार शाखा में एक बैंक लॉकर भी मिला है, जिसे गुरुवार को खोला जाएगा।
पांच दिन पहले ही इंदौर में पदस्थापना
कंडवाल की पांच दिन पहले ही इंदौर में पदस्थापना हुई थी और लोकायुक्त का छापा पड़ गया। उनका परिवार इंदौर में ही रहता था और ऐशो-आराम की जिंदगी जीता था। कंडवाल झाबुआ, नीमच, रतलाम, रीवा, शहडोल, उज्जैन और देवास में भी पदस्थ रहे।
जिम और डिपार्टमेंटल स्टोर भी खोला
छापे के दौरान अधिकारियों को दो मंजिला आलीशान जिम भी मिला, जिसमें आधुनिक मशीनें हैं। इसके अलावा एक डिपार्टमेंटल स्टोर भी मिला, जिसका संचालन कंडारिया के परिवार के सदस्य करते हैं।
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