देवास नाका चौराहे पर 60 करोड़ की लागत से बन रहे फ्लाईओवर के निर्माण कार्य (एप्रोच रोड और गर्डर लॉन्चिंग) के लिए शुक्रवार से नया ट्रैफिक डायवर्शन लागू …और पढ़ें
HighLights
- फ्लाईओवर निर्माण के लिए निरंजनपुर मंडी से चौराहे तक का 400 मीटर हिस्सा अगले 2 महीने के लिए ब्लॉक
- शुक्रवार से नया ट्रैफिक डायवर्शन लागू किया जा रहा है
- विजयनगर से निपानिया जाने वाले वाहनों का रूट भी यथावत रहेगा
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर । देवास नाका चौराहे पर 60 करोड़ की लागत से बन रहे फ्लाईओवर के निर्माण कार्य (एप्रोच रोड और गर्डर लॉन्चिंग) के लिए शुक्रवार से नया ट्रैफिक डायवर्शन लागू किया जा रहा है। निरंजनपुर मंडी के पास खालसा चौक से चौराहे तक के 400 मीटर हिस्से को अगले 2 महीने के लिए पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया है।
चल रहा है काम
देवास नाका चौराहे पर जिस हिस्से में पिछले माह दुकानें हटाई गई थीं, वहां एमपीआरडीसी द्वारा एप्रोच रोड, गर्डर लॉन्चिंग, स्लैब कास्टिंग और सर्विस रोड का काम किया जाना है। फ्लाईओवर की डेडलाइन खत्म हुए 5 महीने बीत चुके हैं। विजयनगर तरफ का काम लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन मांगलिया साइड का काम बाकी था।
गुरुवार को पुलिस अधिकारियों ने मार्ग का दौरा कर रास्ते में खड़े ट्रकों को हटाने और खालसा चौक व चौराहे पर सांकेतिक बोर्ड (साइन बोर्ड) लगाने के निर्देश दिए हैं।
इस रूट का इस्तेमाल करना होगा
- विजयनगर / सत्यसाईं से मांगलिया जाने वाले: देवास नाका चौराहे से सीधे जाने के बजाय निरंजनपुर की तरफ मुड़ें, फिर न्यू लोहा मंडी रोड से होते हुए MR-11 के रास्ते वापस एबी रोड पर निकलें।
- निरंजनपुर या निपानिया से मांगलिया जाने वाले: सीधे चौराहे पर आने के बजाय घूमकर MR-11 वाले रूट का इस्तेमाल कर मांगलिया या निपानिया जाएं।
यहां पुराना रूट चालू रहेगा
- मांगलिया से इंदौर आने वाले वाहन सीधे आ सकेंगे।
- विजयनगर से निपानिया जाने वाले वाहनों का रूट भी यथावत रहेगा।
गड्ढ़ों की हो मरम्मत
लेखक मुकेश इंदौरी का कहना है कि शहर में विकास के नाम पर बड़े-बड़े फ्लाईओवरों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है, जो भविष्य में यातायात को सुगम बनाने के लिए आवश्यक हैं, लेकिन इन निर्माण कार्यों के कारण शहर की अनेक सड़कों पर गहरे गड्ढ़े बन गए हैं, जिनकी समय पर मरम्मत या उचित व्यवस्था नहीं की गई।
थोड़ी-सी वर्षा होते ही इन गड्ढ़ों में पानी भर जाता है और वे किसी छोटे तालाब जैसे दिखाई देने लगते हैं। इससे वाहन चालकों और पैदल चलने वालों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार लोग गड्ढ़ों की गहराई का अनुमान नहीं लगा पाते, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। प्रशासन को चाहिए कि निर्माण स्थलों की नियमित निगरानी करे, गड्ढ़ों को शीघ्र भरवाए और जल निकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन मिल सके।
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