एबी रोड पर ढाई महीने पहले की गई बैरिकेडिंग के बावजूद मौके पर काम बंद जैसा है। बारिश में पीक ऑवर्स के दौरान जाम लग रहा है। घंटों वाहन रेंग रहे हैं। अब …और पढ़ें
HighLights
- एलिवेटेड कॉरिडोर : ढाई महीने से सिर्फ बैरिकेडिंग, बारिश में टेस्टिंग के नाम पर घेरी जगह
- एबी रोड पर ढाई महीने पहले की गई बैरिकेडिंग के बावजूद मौके पर काम बंद जैसा है
- बारिश में पीक ऑवर्स के दौरान जाम लग रहा है। घंटों वाहन रेंग रहे हैं
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। एलआईजी से नवलखा तक बन रहे 7.40 किमी लंबे एलीवेटेड कॉरिडोर की धीमी रफ्तार आम जनता के लिए परेशानी साबित हो रही है।
एबी रोड पर ढाई महीने पहले की गई बैरिकेडिंग के बावजूद मौके पर काम बंद जैसा है। बारिश में पीक ऑवर्स के दौरान जाम लग रहा है। घंटों वाहन रेंग रहे हैं। अब जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की गई है। सुझाव है कि जहां तत्काल काम नहीं होना है, वहां से बैरिकेडिंग तुरंत हटाई जाए ताकि वाहन चालकों को राहत मिले।
काम के नाम पर केवल टेस्टिंग, बढ़ेगी जवाबदेही
करीब 350 करोड़ रुपए का यह प्रोजेक्ट कई महीनों से सड़क का बड़ा हिस्सा ब्लॉक किए हुए है। अधिकांश स्थानों पर केवल शुरुआती टेस्टिंग हुई है, वास्तविक निर्माण शुरू नहीं हो सका। इसे लेकर सांसद शंकर लालवानी ने कलेक्टर को पत्र लिखा है।
उन्होंने कहा कि सड़क घिरी रहने से समय, ईंधन और पर्यावरण का नुकसान हो रहा है। चरणबद्ध बैरिकेडिंग का पुराना सुझाव भी अफसरों ने नहीं माना। अब कलेक्टर से समीक्षा कर केवल काम वाले हिस्से में बैरिकेडिंग रखने और जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय करने का आग्रह किया है।
फैक्ट फाइल
- कुल लंबाई : 7.40 किमी
- लागत : करीब ₹350 करोड़
- लक्ष्य : फरवरी 2028 तक निर्माण पूरा
- दावा : 60% ट्रैफिक एलीवेटेड रोड पर शिफ्ट होगा
- वर्तमान स्थिति : ढाई महीने में केवल शुरुआती फाउंडेशन कार्य, जबकि बैरिकेडिंग से ट्रैफिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
सड़क संकरी होने और जलभराव से थम जाता है ट्रैफिक
बारिश के बाद एबी रोड की स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है। एलआईजी, चंदननगर, पलासिया और डीएनएस अस्पताल के आसपास पीक ऑवर्स में लंबी कतारें लग रही हैं। सड़क संकरी होने और जलभराव से ट्रैफिक थम जाता है। अस्पतालों और धार्मिक स्थलों के कारण इस हिस्से में सामान्य से अधिक दबाव रहता है। हालांकि, कॉरिडोर बनने के बाद 60% ट्रैफिक ऊपरी मार्ग पर शिफ्ट होने और सात प्रमुख चौराहों को जाम से राहत मिलने का दावा है, लेकिन काम की धीमी रफ्तार ही सबसे बड़ी परेशानी है।
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