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इंदौर में मलबे के ढेर और धूल के गुबार बन गए छावनी की पहचान, व्यापारियों, रहवासियों ने लगाए पोस्टर- आज हमारी तो कल तुम्हारी बारी

इंदौर में मलबे के ढेर और धूल के गुबार बन गए छावनी की पहचान, व्यापारियों, रहवासियों ने लगाए पोस्टर- आज हमारी तो कल तुम्हारी बारी

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। व्यापार के केंद्र छावनी में इन दिनों मलबे के ढेर और धूल के गुबार उठ रहे हैं। सड़क चौड़ीकरण के नाम पर निगम द्वारा की गई तोड़फोड़ को एक सप्ताह होने को आया है, लेकिन मलबा अब तक नहीं उठा। आवागमन पूरी तरह से बंद है। व्यापार ठप है। व्यापारी और रहवासी कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।

निगम की बेरूखी से हताशा रहवासियों और व्यापारियों का दर्द बुधवार को छलक गया। उन्होंने घरों के बाहर पोस्टर लगाए। इन पर लिखा छावनी का तमाशा देखने वालों आपका स्वागत है। आज हमारी कल तुम्हारी बारी है। कार्रवाई के दौरान निगम का एक अमानवीय चेहरा भी देखने को मिला।

22 मई को तोड़फोड़ के दौरान निगमकर्मी की लापरवाही से बिजली का पोल गिर गया जो सीधे एक डाक्टर के सिर पर जाकर लगा। वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उनकी मेजर सर्जरी भी हुई, उपचार अब भी जारी है। कार्रवाई के दौरान घायल हुए व्यक्ति का उपचार कराना तो दूर निगम के किसी जिम्मेदार ने उनकी स्थिति जानने तक की कोशिश नहीं की।

नगर निगम ने 21 मई को जिंसी क्षेत्र में और 22 मई को छावनी में तोड़फोड़ की थी। मास्टर प्लान में शामिल जिंसी और छावनी दोनों सड़कों को नगर निगम 60 फीट चौड़ा कर रह है। रहवासियों का आरोप है कि कार्रवाई के एक रात पहले नगर निगम ने मकानों पर लगाए गए निशान बदल दिए।

दो माह पहले नप्ती के बाद लगाए गए निशानों को मिटाकर नए निशान लगाए। इसके बाद पहले जो मकान कम तोड़े जाना था उन्हें ज्यादा तोड़ा गया। कार्रवाई के दौरान निगम के कर्मचारियों ने रहवासियों से बदसलूकी भी की। विवाद के चलते कुछ रहवासियों की तबीयत भी बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

लोग देखने आ रहे थे इसलिए लगाना पड़े पोस्टर

छावनी व्यापारी संघ के उपाध्यक्ष विक्रम राठौर ने बताया कि पूरे शहर से लोग छावनी में हुई तोड़फोड़ देखने के लिए आ रहे हैं। जिस तरह से लोग मिल की झांकी देखने जाते हैं वैसे ही वे छावनी में तोड़फोड़ देखने आ रहे हैं। उन्हें लग रहा है यहां तोड़फोड़ इसलिए की गई है कि विकास हो रहा है। हमने पोस्टर लगाकर अपना दर्द लोगों के सामने रखा है। उन्हें बताया कि है कि छावनी का तमाशा देखने वालों आपका स्वागत है। आज हमारी कल तुम्हारी बारी है।

सिर पर गिरा पोल, मेजर सर्जरी हुई, कोई देखने तक नहीं आया

22 मई को हुई कार्रवाई में छावनी निवासी डा. कपिल दीक्षित गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बिजली का पोल उनके सिर पर जा लगा और सिर फूट गया। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाना पड़ा जहां उनकी मेजर सर्जरी हुई। नईदुनिया से चर्चा में डा. दीक्षित ने बताया कि घटना सुबह करीब 9.30 बजे की है।

निगम का पोकलेन चालक लापरवाही से मशीन चला रहा था। उसने इलेक्ट्रीक वायरों को तोड़ने के उद्देश्य से पंजा मारा। हमने उसे मना भी किया कि ये पुराने कापर के वायर हैं नहीं टूटेंगे, लेकिन वह नहीं माना। उसने बार-बार वायर तोड़ने की कोशिश की तो पूरा पोल ही उखड़ गया और मेरे सिर पर आकर लग गया। इसके बाद मुझे कुछ याद नहीं। डा. दीक्षित को तुरंत अस्पताल ले जाना पड़ा। उनके सिर की हड्डी धंस गई थी, जिसे मेजर आपरेशन कर निकाला गया। उपचार अब भी चल रहा है। डा. दीक्षित ने बताया कि निगम ने उनकी सुध तक नहीं ली। न किसी ने स्वजन से मुलाकात कर हाल जाना न कोई अस्पताल में देखने आया।

निगम कर्मचारियों से हुए विवाद के बाद सदमे में चली गई जान

21 मई को हुई कार्रवाई के दौरान जिंसी निवासी ओमप्रकाश जोशी का निगम कर्मचारियों से विवाद हो गया था। जोशी ने पूरे जीवनभर की पूंजी एकत्रित कर मकान बनाया था। निगम से नियमानुसार नक्शा भी स्वीकृत कराया था, बावजूद इसके उनके मकान को चौड़ीकरण में बाधक बता दिया गया।

कार्रवाई के दौरान जोशी निगम के अधिकारियों के सामने गुहार लगाते रहे कि उन्होंने नक्शे के हिसाब से निर्माण किया है। उनका मकान बाधक नहीं हो सकता, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। कार्रवाई के दौरान जैसे ही मशीन का पंजा जोशी के मकान पर लगा उनकी तबीयत बिगड़ गई। निगम की कार्रवाई से उन्हें ऐसा सदमा लगा कि हार्ट अटैक आ गया और उनकी मृत्यु हो गई।

इंदौर निगम ने छावनी-जिंसी सड़क की चौड़ाई तो घटा दी, पर मास्टर प्लान में अब भी 80 फीट; नक्शे और TDR पर उलझे रहवासी

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