धोबी घाट पर मुहर्रम के मेले की अनुमति को लेकर महापौर और निगमायुक्त आमने-सामने हो गए हैं। दो दिन पहले महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मेले की अनुमति देने स…और पढ़ें
HighLights
- धोबी घाट पर मुहर्रम के मेले की अनुमति को लेकर महापौर और निगमायुक्त आमने-सामने हो गए हैं
- पहले महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मेले की अनुमति देने से इंकार कर दिया था, लेकिन गुरुवार दोपहर निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने अनुमति पत्र जारी कर दिया
- वर्चुअली हुई महापौर परिषद की बैठक में निगमायुक्त के निर्णय को पलटते हुए मेले की अनुमति वापस ले ली गई
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। धोबी घाट पर मुहर्रम के मेले की अनुमति को लेकर महापौर और निगमायुक्त आमने-सामने हो गए हैं। दो दिन पहले महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मेले की अनुमति देने से इंकार कर दिया था, लेकिन गुरुवार दोपहर निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने अनुमति पत्र जारी कर दिया।
देर शाम जब यह खबर महापौर को लगी तो उन्होंने तुरंत महापौर परिषद की बैठक बुलवा ली। वर्चुअली हुई इस बैठक में निगमायुक्त के निर्णय को पलटते हुए मेले की अनुमति वापस ले ली गई। मुहर्रम के मौके पर शुक्रवार से लगने वाले तीन दिनी मेले को देर रात तक असमंजस जारी था। इंदौर जिला वक्फ कमेटी अध्यक्ष रेहान शेख ने कहा कि हमने मेले की तैयारी शुरू कर दी थी। एमआईसी के निर्णय के बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है।
मोहर्रम के मेले को लेकर पिछले कई दिनों से असमंजस की स्थिति चल रही थी। तीन दिन पहले महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मेले की अनुमति देने से इंकार करते हुए कहा था कि धोबी घाट की जमीन निगम के स्वामित्व की है। जिला कोर्ट ने सितंबर 2024 में ही इस पर मुहर लगा दी है।
कोर्ट ने फैसले में स्पष्ट है कि सिर्फ 0.02 एकड़ जमीन पर ताजिए ठंडे करने की अनुमति है। बाकी जमीन निगम की है। निगम अब तक मेले की अनुमति देता था, लेकिन इस बार हमने कई कारणों से तय किया कि मेले के लिए जमीन देना सही नहीं है। महापौर के इस बयान के बाद माना जा रहा था कि इस बार मोहर्रम का मेला नहीं लगेगा, लेकिन गुरुवार दोपहर निगमायुक्त कार्यालय से मेले की अनुमति जारी हो गई।
नगर निगम ने मो. अब्दुल हमीद नियारगर अध्यक्ष वक्फ इंतेजामिया कमेटी के नाम से इसे जारी किया था। महापौर गुरुवार को शहर से बाहर थे। अनुमति की जानकारी जब उन तक पहुंची तो उन्होंने नाराजगी जताते हुए तुरंत वर्चुअली एमआईसी बैठक आहूत कर ली। निगमायुक्त भी इस बैठक में शामिल हुए। तय किया गया कि मेले की अनुमति वापस ले ली जाए।
यह बताया अनुमति निरस्त करने का कारण
एमआईसी बैठक में निर्णय लिया गया कि पिछले साल धोबी घाट पर ताजिए ठंडा करने के साथ मेला लगाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन आयोजकों को जिन शर्तों पर अनुमति दी गई थी उनका पालन नहीं किया गया। मेले से संबंधित जो राशि जो निगम में जमा कराना थी वह भी जमा नहीं कराई गई। ऐसी स्थिति में धोबी घाट पर सिर्फ ताजिए ठंडा करने की अनुमति दी जाए। मेला लगाने की जो अनुमति दी गई है उसे निरस्त किया जाता है।
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