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बदलते मौसम में यदि आप शहर की भागदौड़ से दूर प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताना चाहते हैं, तो इंदौर के पास पहाड़ी पर बना सालासर बालाजी मंदिर एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभर रहा है। यह स्थान न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि एडवेंचर के शौकीनों के लिए ट्रेकिंग और राइडिंग का एक नया रोमांचक ठिकाना भी बनता जा रहा है। गर्मी के इस मौसम में दिन के समय भले ही ठंडक मिलना मुश्किल हो, लेकिन यहां की शाम पर्यटकों को शब-ए-मालवा के असली सुकून का अहसास कराती है। इस यात्रा का आनंद लेने के लिए पर्यटकों को अपनी गाड़ी और पैदल चलने का हौसला रखने वाले दोस्तों के साथ की जरूरत होती है।

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दोस्तों के साथ ग्रुप के प्रमुख ज्ञानदीप श्रीवास्तव (मध्य)।
– फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
राजस्थान के सालासर धाम जैसा अनुभव
आमतौर पर सालासर बालाजी का नाम आते ही राजस्थान के सुप्रसिद्ध हनुमान मंदिर की छवि मन में उभरती है। आस्था, विश्वास और भक्ति के उस दिव्य धाम के दर्शन के लिए हर कोई आतुर रहता है लेकिन इंदौर के समीप भी एक ऐसा ही दिव्य धाम स्थित है, जहां आस्था और विश्वास के साथ रोमांच का अनूठा संगम देखने को मिलता है। इस स्थान की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि यहां विकास के साथ-साथ प्राकृतिक मौलिकता को भी बचाकर रखा गया है। यह स्थान इंदौर शहर से ज्यादा दूर नहीं है और इसकी कुल दूरी लगभग 35 किलोमीटर है।
पहाड़ी का जटिल रास्ता बढ़ाता है रोमांच
राइडर्स ग्रुप के जानकारों के मुताबिक यह धार्मिक और पर्यटन स्थल देवगुराड़िया से महज 29 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। देवगुराड़िया से डबलचौकी होते हुए राधोगढ़ मार्ग पर आगे बढ़ना होता है। इसके बाद दाहिनी ओर मुड़कर जब करीब तीन किलोमीटर का सफर तय किया जाता है, तो पहाड़ी पर स्थित सालासर बालाजी का सुंदर मंदिर दिखाई देने लगता है। इस स्थान को जो बात सबसे ज्यादा रोमांचक बनाती है, वह है पहाड़ी पर चढ़ने वाला कच्चा और संकरा रास्ता। यह मार्ग इतना जटिल है कि सामान्य दिनों में दोपहिया वाहन से भी ऊपर तक जाना बेहद चुनौतीपूर्ण काम हो जाता है।

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राइडर्स के लिए भी यह जगह बेहद खास है।
– फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
हनुमान जन्मोत्सव पर लगता है विशेष मेला
हनुमान जी को समर्पित यह मंदिर आकार में भले ही बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन इसकी सुंदरता और आसपास फैली हरियाली हर किसी का मन मोह लेती है। मंदिर परिसर के पास ही एक छोटा मकान बना हुआ है जिसमें यहां के पुजारी निवास करते हैं। स्थानीय ग्रामीणों और पुजारी के अनुसार मंदिर तक पहुंचने वाले इस दुर्गम मार्ग पर जल्द ही सड़क का निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। हालांकि रास्ता संकरा होने के कारण भविष्य में भी यहां केवल दोपहिया वाहन ही ले जाए जा सकेंगे। इसके साथ ही पहाड़ी पर अन्य विकास कार्य भी जारी हैं। वर्तमान में यहां स्थानीय ग्रामीणों की आवाजाही अधिक रहती है और हर साल हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर यहां एक विशाल मेले का आयोजन किया जाता है।
शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम
यह पर्यटन स्थल अभी आम जनता के बीच बहुत ज्यादा लोकप्रिय नहीं हुआ है, जिसके कारण यहां अन्य प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों की तरह भारी भीड़ देखने को नहीं मिलती। भीड़भाड़ न होने की वजह से इस पूरे क्षेत्र में अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां से आसपास के खेतों, हाईवे और प्रकृति के मनोरम दृश्यों का आनंद लिया जा सकता है। विशेष रूप से यहां से दिखने वाला सूर्यास्त का नजारा पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। सुरक्षा के लिहाज से भी यह जगह पूरी तरह सुरक्षित है और यहां हिंसक वन्य जीवों का कोई खतरा नहीं है। हालांकि यहां जाने वाले पर्यटकों को अपने साथ खानपान की सामग्री अनिवार्य रूप से ले जानी होगी। साथ ही कच्चे और पथरीले रास्ते को देखते हुए स्पोर्ट्स शूज और आरामदायक कपड़े पहनकर जाने की सलाह दी जाती है ताकि पहाड़ी पर पैदल चढ़ने में कोई परेशानी न हो।
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