शहर की ऐतिहासिक धरोहर रानी सराय धंसने लगी है। 119 वर्ष पुरानी यह धरोहर मेट्रो प्रोजेक्ट की भारी मशीनों को सहन नहीं कर पा रही है। खोदाई और कंपन के कारण…और पढ़ें
HighLights
- शहर की ऐतिहासिक धरोहर रानी सराय धंसने लगी है, खोदाई और कंपन के कारण जगह जगह दरारें पड़ गई हैं
- 119 वर्ष पुरानी यह धरोहर मेट्रो प्रोजेक्ट की भारी मशीनों को सहन नहीं कर पा रही है
- कुछ जगह तो जमीन धंस गई। पुलिस कर्मचारी पत्थर-ईंट से गड्ढे दबा रहे हैं
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : शहर की ऐतिहासिक धरोहर रानी सराय धंसने लगी है। 119 वर्ष पुरानी यह धरोहर मेट्रो प्रोजेक्ट की भारी मशीनों को सहन नहीं कर पा रही है। खोदाई और कंपन के कारण जगह जगह दरारें पड़ गई। कुछ जगह तो जमीन धंस गई। पुलिस कर्मचारी पत्थर-ईंट से गड्ढे दबा रहे हैं।
रीगल तिराहे के समीप बने नियंत्रण कक्ष पर मेट्रो के लिए अंडर ग्राउंड स्टेशन बनना प्रस्तावित है और दिन रात चौबीसों घंटे कंपन हो रहा है। भारी मशीनों के कारण कंपन होता है और 1907 में बनी रानी सराय की दीवारों और विशाल पत्थरों के जोड़ों में दरारें दिखाई देने लगी हैं। परिसर में चल रही खोदाई से मुगर शैली में बनी दो मंजिला इमारत (नियंत्रण कक्ष) का बुनियादी ढांचा धंसने की आशंका बढ़ गई है।
जोन-1 के डीसीपी नरेंद्रसिंह रावत के आफिस के समीप तो जमीन धंसने से गड्ढा बन गया है। इसके पहले मेट्रो ट्रेक के लिए परिसर में लगे वर्षों पुराने पेड़ों को काटने पर विरोध हुआ था। इस इमारत को महाराजा शिवाजीराव होलकर की पत्नी महारानी वाराणसी बाई ने यात्रियों के ठहरने के लिए बनाया था। 1907 में बनी इस इमारत की उस वक्त करीब डेढ़ लाख रुपये कीमत आई थी।
इमारत में चलता है तीन डीसीपी और दो एडीसीपी का आफिस
आयुक्त प्रणाली के पूर्व इस इमारत में डीआइजी कार्यालय संचालित होता था। नियंत्रण कक्ष पलासिया शिफ्ट होने के बाद डीसीपी जोन-1 नरेंद्रसिंह रावत,डीसीपी जोन-3 अभिषेक रंजन और डीसीपी(अपराध)राजेश त्रिपाठी के साथ एडीसीपी ओमप्रकाश व राजेश दंडोतिया का आफिस है। अपराध शाखा के एसीपी और निरीक्षक भी इसी इमारत में बैठते है। भारी मशीनों के कारण कईं जगह दरारे पड़ने लगी है।
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