नईदुनिया प्रतिनिधि,इंदौर। सेवानिवृत्त रेलवे मंडल संरक्षा अधिकारी को डिजिटल अरेस्ट कर 45 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के एक सदस्य हीरल कंसारा को राज्य साइबर सेल ने अहमदाबाद(गुजरात) से गिरफ्तार कर लिया है।
आरोपित की कईं कंपनियां है और उनके खातों में गैंग के सदस्यों द्वारा ठगी की रकम जमा करवाई जाती है। पुलिस इस मामले में 15 लाख रुपये की राशि रिफंड करवा चुकी थी।
एसपी(साइबर) सव्यसाची सराफ के अनुसार पिछले साल 9 अगस्त को सेवानिवृत्त अधिकारी द्वारा शिकायत दर्ज करवाई थी। उनके बच्चे विदेश में रहते है।
उन्होंने पुलिस को बताया कि Call करने वाले ने खुद को टेलीकाम रेगुलेटरी अथारिटी (ट्राई) का अधिकारी बताया और कहा कि उनके मोबाइल नंबर आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहे हैं।
इसके बाद उन्हें कथित गिरफ्तारी वारंट का डर दिखाकर स्काइप वीडियो काल पर लगभग 24 घंटे तक लगातार निगरानी में रखा गया। इस दौरान उनसे उनकी चल-अचल संपत्ति की पूरी जानकारी ली गई और धमकाकर 45 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए गए।
शिकायत मिलने पर राज्य साइबर सेल सक्रियहुई और गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल और हेल्पलाइन-1930 के माध्यम से संदिग्ध बैंक खातों को तत्काल फ्रीज कराया।
बैंक लेन-देन की जांच के बाद करीब 15 लाख रुपये पीड़ित को वापस दिलाए गए। मामले में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम(आइटी एक्ट) की संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
जांच के दौरान पुलिस ने अहमदाबाद निवासी हीरल कंसारा को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक आरोपित ने अपने नाम से कई कंपनियां पंजीकृत कर रखी थीं!
उनके माध्यम से बैंक खातों का संचालन किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में उसके खिलाफ अहमदाबाद, वडोदरा और हरियाणा में भी साइबर धोखाधड़ी तथा डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों में संलिप्तता सामने आई है।
स्टेट साइबर सेल ने लोगों से अपील की है कि किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा फोन या वीडियो Call पर डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती।
यदि कोई व्यक्ति इस तरह की धमकी देकर पैसे मांगता है तो तुरंत कॉल काटें, परिवार या पुलिस को सूचना दें और साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
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