प्रणय चौहान, नईदुनिया, इंदौर। केसरबाग रोड स्थित देवी अहिल्याबाई होलकर स्मारक का निर्माण कार्य लालबाग से लगी हुई रामपुर कोठी पुराने आरटीओ भवन में चल रहा है। इसको अपने पुराने मूल स्वरूप में लौटाने के लिए लाइम वर्क पद्धति के तहत चूने का उपयोग कर एक प्राचीन और पारंपरिक तकनीक से निर्माण किया जा रहा है।
ट्रस्ट अध्यक्ष पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के आग्रह पर मप्र शासन ने लालबाग से लगी पुराने आरटीओ भवन सहित साढ़े तीन एकड़ जमीन देवी अहिल्याबाई होलकर स्मारक प्रतिष्ठान को प्रदान की गई। देवी अहिल्याबाई होलकर स्मारक प्रतिष्ठान ट्रस्ट के सचिव अशोक डागा बताते है कि स्मारक का निर्माण लगभग डेढ़ साल में 150 करोड़ रुपए की लागत से किया जाएगा। इसे तीन चरणों में पूरा किया जाएगा।
इसके प्रथम चरण में संपूर्ण भवन का नवीनीकरण किया जाएगा। साथ ही बाहरी दीवारों को पुराने स्वरूप में लौटाने के लिए निर्माण कार्य किया जा रहा है। छत पर वाटर प्रूफिंग की जा रही है। चंपा बावड़ी और अहिल्या देवी द्वारा निर्मित शिव मंदिर की ओर से इसका प्रवेश द्वार होगा। इसके लिए तल मंजिल की खोदाई चल रही है। साथ ही एक मंजिला भवन बनाया जा रहा है। स्मारक का मुख्य प्रवेश द्वार इसी तरह से होगा।
देवी अहिल्याबाई के गौरवशाली कालखंड की जीवंत अनुभूति होगी
इसके अलावा कई नवीन कार्य किए जाएंगे। कार्य प्रारंभ करने के पूर्व अनेक इतिहासकारों से दिल्ली, पुणे, जलगांव, इंदौर के अनेक आर्किटेक्ट्स से प्रसिद्ध सिनेमोग्राफर से संवाद किया। इस स्मारक में अहिल्याबाई के जन्म से लेकर अंतिम क्षण तक के जीवन को स्मारक में मिनरल्स, भित्ति चित्रों, लाइट एंड साउंड, थ्रीडी प्रोजेक्ट जैसे कलात्मक और तकनीकी माध्यमों से देवी अहिल्याबाई के गौरवशाली कालखंड की जीवंत अनुभूति होगी।
सचिव डागा बताते है कि इस संपूर्ण कार्य को मूर्तरूप देने के लिए ट्रस्टी सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, उद्योगपति विनोद अग्रवाल, वैष्णव विद्यापीठ के कुलपति पुरुषोत्तमदास पसारी, समाजसेवी मिलिंद महाजन, सुधीर देड़गे के साथ संभागायुक्त सुदाम खाड़े, कलेक्टर शिवम वर्मा देवी अहिल्याबाई होलकर स्मारक प्रतिष्ठान ट्रस्ट का संचालन कर रहे हैं। साथ ही आर्किटेक्ट हिमांशु दुधरवड़कर, श्रेया भार्गव के साथ पूरी टीम का मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। पूरे प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर के रूप में कर्नल नवीन भटनागर कार्य देख रहे हैं।
डेढ़ साल में काम होगा पूरा
ठेकेदार जयसिंह सोलंकी बताते है कि चंपा बाउडी की तरफ एक नए भवन बनाया जा रहा है। दर्शकों के लिए प्रवेश मार्ग इसी तरफ से होगा। रामपुर कोठी में पिछले चार महीने से लाइम वर्क पद्धति के तहत चूना, गुड़, मैथीदाना, बेलफल, उड़द, जूट, सुर्खी, ईंट का पाउडर, रेती, सरस मिलाकर दीवारों पर प्लास्टर कर रहे है। जैसे वर्षाें पहले इस रामपुर कोठी का स्वरूप था, वैसे ही मूलस्वरूप में लाया जा रहा है। फिलहाल बाहर और अंदर की दीवारों का जीर्णोद्धार कर रहे है। छत पर वाटर प्रूफिंग कर रहे है। इसके बाद लाइटिंग, फ्लोरिंग, दरवाजे फिटिंग और पेंटिंग (घुटई) की जाएगी।
देवी अहिल्याबाई की जीवन गाथा और इतिहास की जानकारी
सचिव डागा बताते है कि लोकमता अहिल्याबाई होलकर का स्मरण आते ही मस्तक श्रद्धा एवं गर्व से भर जाता है। उन्होंने अपनी प्रजा और पशु-पक्षियों के लिए जो कार्य किए, वे आज 300 वर्ष बाद भी पूरे भारत में पुण्य श्लोक अहिल्याबाई को वंदनीय बनाते हैं। नई पीढ़ी और इंदौर आने वाले लोग हमेशा जिज्ञासा प्रकट करते हैं अहिल्याबाई कौन थी? उनके द्वारा किए गए कार्य क्या थे? उनके जीवन गाथा और इतिहास क्या है?
इन जिज्ञासाओं के समाधान के लिए यह विचार बना की मां अहिल्या की नगरी इंदौर में ऐसा दर्शनीय स्मारक होना चाहिए, जो उनके व्यक्तित्व और कृतित्व का जीवंत यश गान कर सकें। इन्हीं सभी बातों को लेकर पूर्व लोकसभा स्पीकर महाजन अनेक वर्षों से इस बारे में विचार कर रही थी। शहर के प्रमुख लोगों के साथ अनेक बार चिंतन किया। इतिहासकारों की बैठक बुलाई और एक ट्रस्ट का निर्माण किया। अनेक स्थानों के चयन के बाद अंतिम रूप में पुराने आरटीओ भवन लालबाग से लगा हुई जगह चिन्हित की गई।
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