संबल योजना की दो लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत कराने के एवज में रिश्वत मांगने वाली नगर निगम की वार्ड प्रभारी संध्या पथरोड़ और वार्ड प्रभारी सहायक ह…और पढ़ें
HighLights
- निगमायुक्त ने वेतन आहरण पर भी लगाई रोक
- लोकायुक्त ने पथरोड और सलूजा को गुरुवार को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था
- इसके बाद से कयास लगाए जा रहे थे कि आरोपितों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : संबल योजना की दो लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत कराने के एवज में रिश्वत मांगने वाली नगर निगम की वार्ड प्रभारी संध्या पथरोड़ और वार्ड प्रभारी सहायक हरभजनसिंह सलूजा की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
निगमायुक्त ने दोनों रिश्वतखोरों के वेतन आहरण पर भी रोक लगा दी है। लोकायुक्त ने पथरोड और सलूजा को गुरुवार को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। इसके बाद से कयास लगाए जा रहे थे कि आरोपितों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। शुक्रवार सुबह ही निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने दोनों आरोपितों की सेवाएं समाप्त करने के आदेश जारी कर दिए।
यह है मामला
लिंबोदी निवासी आशीष चौधरी ने 17 जुलाई को लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि उसके पिता जितेंद्र चौधरी की मृत्यु के बाद संबल योजना के तहत मिलने वाली दो लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत कराने के लिए आरोपित संध्या पथरोड और हरभजनसिंह सलूजा 20 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहे थे। बाद में सौदा तीन किस्तों में 15 हजार रुपये देने की बात पर तय हो गया।
गुरुवार को लोकायुक्त की टीम ने भंवरकुआ क्षेत्र स्थित डीडी गार्डन के पीछे ट्रैप कार्रवाई कर आरोपित संध्या पथरोड को शिकायतकर्ता से पांच हजार रुपये लेते ही रंगे हाथ पकड़ा था। दोनों आरोपितों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 तथा बीएनएस की धारा 61(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।
जोन और मुख्यालय के बीच झुलती रहती है फाइलें
मुख्यमंत्री संबल योजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के सदस्य की मृत्यु पर दो लाख रुपये सहायता का प्रविधान है। सहायता राशि प्राप्त करने के लिए फाइल नगर निगम के जोनल कार्यालय से आगे बढ़ती है। जानकारी के मुताबिक वर्तमान में इस योजना के अंतर्गत 100 से ज्यादा फाइलें निगम मुख्यालय और जोन कार्यालय के बीच लंबित हैं। आरोप यह भी हैं कि कर्मचारी 10 से 20 प्रतिशत रिश्वत की मांग करते हैं।
जब तक रिश्वत की बात तय नहीं हो जाती तब तक फाइलें आगे नहीं बढ़ती। इस बारे में सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायतें होती हैं, लेकिन इन शिकायतों को इस टीप के साथ समाप्त कर दिया जाता है कि फाइल नगर निगम में लंबित है। वार्ड प्रभारी और सहायक द्वारा रिश्वत मांगे जाने का मामला सामने आने के बाद निगमायुक्त ने योजना से जुड़ी लंबित फाइलों की जानकारी बुलवाई है। उन्होंने लंबित फाइलें जल्द से जल्द निराकृत करने के निर्देश भी दिए।
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