नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर शहर में योग को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की जा रही है। इसी क्रम में पार्कों और सामुदायिक भवनों में निश्शुल्क योग शिविरों का आयोजन भी किया जा रहा है। खास बात यह है कि इन शिविरों में युवाओं की संख्या ज्यादा है। इसमें वे विभिन्न आसनों के साथ प्राणायाम और ध्यान भी सिखाया जा रहा है। इसके साथ ही कुंडलिनी जागरण और ध्यान की भी ट्रेनिंग दी जा रही है। कई जिम जाने वाले युवा भी अब योग से जुड़ रहे हैं।
शिविरों में कॉलेज विद्यार्थियों से लेकर निजी कंपनियों में काम करने वाले युवा, कारोबारी, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थी नियमित रूप से पहुंच रहे हैं। प्रशिक्षकों के अनुसार, पहले जहां लोग केवल शारीरिक फिटनेस के लिए योग सीखने आते थे, वहीं अब मानसिक शांति, तनाव कम करने और ध्यान की विधियां सीखने में भी युवाओं की रुचि बढ़ी है।
सूर्य नमस्कार का प्रशिक्षण दिया जा रहा
योग प्रशिक्षकों के अनुसार, शिविर में कुछ आसान चिह्नित किए गए हैं, जो नियमित रूप से करवाए जा रहे हैं। अच्छी बात यह है कि युवा भी इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं। खास तौर पर सूर्य नमस्कार का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह एक फुल बाडी वर्कआउट की तरह होता है। इससे कम समय में पूरे शरीर की कसरत होती है और ऊर्जा का स्तर भी बढ़ता है।
अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम
इसके साथ ही शीर्षासन और सर्वांगासन को लेकर युवाओं में क्रेज है। चेहरे पर ग्लो बढ़ाने, बालों के झड़ने की समस्या को रोकने और फोकस सुधारने के लिए इन आसनों को विशेष रूप से सिखाया जा रहा है। वहीं, अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम जैसे योग भी करवाए जा रहे हैं।
40 प्रतिशत युवा ले रहे रुचि
योग प्रशिक्षक शिवानंद शर्मा के अनुसार, युवाओं में कुंडलिनी जागरण और ध्यान को लेकर रुझान भी बढ़ा है। इसका एक कारण इंटरनेट मीडिया भी है। इसके साथ ही युवा रील से प्रभावित होकर भी यह अभ्यास करते हैं। शिविरों में आने वाले युवाओं में से लगभग 40 से 45 प्रतिशत युवा ऐसे हैं जो योग के अलावा मेडिटेशन और कुंडलिनी जागरण की शुरुआती विधियों को सीखने के लिए आ रहे हैं।
योग से हो रहे ये लाभ
- कई युवाओं में सिगरेट, शराब या अत्यधिक चाय-काफी पीने की लत में कमी आई।
- योग शिविर का वह एक-डेढ़ घंटा डिजिटल डिटाक्स का काम कर रहा।
- युवाओं में मानसिक खालीपन और चिड़चिड़ापन दूर हो रहा है।
खान-पान में भी कर रहे बदलाव
योग प्रशिक्षक हेतुत चौरसिया के अनुसार, शिविरों में आने वाले युवाओं ने अब अपने खान-पान में भी बदलाव किया है। कुछ युवाओं ने योग से जुड़ने के बाद फास्ट फूड, जंक फूड और अत्यधिक तैलीय खाने से परहेज किया है और अपनी डाइट में सब्जियां, अंकुरित अनाज, मौसमी फल और छाछ-लस्सी जैसी चीजों को शामिल किया है।
योग से युवाओं का नींद का पैटर्न भी सुधरा है। योग के लिए सुबह जल्दी शिविर में आने के लिए वे रात को जल्दी सोने की आदत डाल रहे हैं, जिससे उनकी नींद की क्वालिटी बेहतर हुई है।
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