नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर से उज्जैन को जोड़ने वाली प्रस्तावित 40 किमी लंबी भांग्या-शकरखेड़ी रोड की योजना फिलहाल अटक गई है। करीब 150 करोड़ रुपये लागत वाले इस प्रोजेक्ट का प्रस्ताव सरकार ने पुन: परीक्षण के लिए लोक निर्माण विभाग को लौटा दिया है।
मुख्यालय ने पूछा है कि जब इंदौर-उज्जैन सिक्सलेन हाईवे का उन्नयन जारी है। इंदौर-देवास-उज्जैन के लिए पहले से हाईवे उपलब्ध है, तब तीसरे मार्ग की आवश्यकता क्या है। अब विभाग नए सिरे से इसकी उपयोगिता बताते हुए प्रस्ताव दोबारा भेजेगा।
लोक निर्माण विभाग ने पिछले वर्ष एमआर-10 स्थित चंद्रगुप्त मौर्य चौराहे से देवास-उज्जैन हाईवे तक दो लेन सड़क का प्रस्ताव भेजा था। विभाग का तर्क है कि यह मार्ग मौजूदा दोनों प्रमुख हाईवे से अलग कॉरिडोर के रूप में काम करेगा और आसपास के ग्रामीण व स्थानीय यातायात को सीधा लाभ देगा। नए प्रस्ताव में इसी आवश्यकता को प्रमुखता से रखा जाएगा।
बड़े फ्लायओवर, रेलवे ओवरब्रिज की जरूरत नहीं
पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 150 करोड़ रुपये हैं। इसमें करीब 30 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण मुआवजे, लगभग 10 करोड़ रुपये बिजली एवं अन्य लाइन शिफ्टिंग व शेष 100 करोड़ रुपये सड़क निर्माण पर खर्च किए जाएंगे। मार्ग कई छोटे गांवों से होकर गुजरेगा, इसलिए बड़े फ्लायओवर, रेलवे ओवरब्रिज या बड़े नदी पुल की जरूरत नहीं होगी। शिप्रा नदी पर पहले से पुल मौजूद है।
सड़क के लिए एक महीने में दोबारा स्वीकृति का प्रयास
लोक निर्माण विभाग डिविजन-2 के कार्यपालन यंत्री सूर्यनारायण सोनी के अनुसार विभाग अगले एक माह में इस प्रोजेक्ट की स्वीकृति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया और भूमि अधिग्रहण शुरू किया जाएगा। दो लेन सड़क होने के कारण निजी जमीन का अधिग्रहण सीमित रहेगा। निर्माण एजेंसी को 18 से 20 माह की अवधि दी जाएगी। विभाग को उम्मीद है कि आगामी सिंहस्थ से पहले यह सड़क उपयोग के लिए तैयार हो सकेगी।
इन गांवों को मिलेगा सीधा संपर्क
चंद्रगुप्त मौर्य चौराहे से शुरू होकर जस्सा, कराड़िया, बजरंग पालिया, धनखेड़ी, मुंडला हुसैन, शाहना, गुरान, जामोदी, सिमरोड़ और हिरली होते हुए देवास-उज्जैन रोड पर बोलासा के पास जुड़ेगी। यहां से चंदेसरी के रास्ते करीब 20 किमी में उज्जैन पहुंचा जा सकेगा। देवास-उज्जैन रोड पहले ही एनएचएआई द्वारा छह लेन बनाई जा चुकी है।
40 किमी में 75% हिस्से में सड़क मौजूद, 25% जमीन लेनी होगी
प्रस्तावित 40 किमी मार्ग में 75% सड़क पहले से मौजूद है। शेष 25% भाग कांकड़ मार्ग या अधिग्रहित की जाने वाली जमीन से होकर निकलेगा। सड़क दो लेन की होगी, जिसमें 7 मीटर चौड़ा कैरिज-वे और फुटपाथ भी बनाया जाएगा। कुल चौड़ाई करीब 30 फीट रहेगी।
सड़क बनी तो यह फायदा होगा
इंदौर और उज्जैन के बीच तीसरा सड़क संपर्क विकसित होगा। मौजूदा हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा।
मार्ग के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। लोगों को वाया इंदौर होते हुए नहीं जाना होगा।
सिंहस्थ के दौरान वैकल्पिक यातायात कॉरिडोर उपलब्ध हो सकेगा। इंदौर-उज्जैन रोड पर ट्रैफिक सुगम होगा।
सीमित भूमि अधिग्रहण के कारण परियोजना की लागत नियंत्रित रहने का दावा। यानि कम खर्च में बनेगी।
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