कुंभ से चर्चा में आईं वायरल गर्ल ने इंदौर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर पिता पर जन्म प्रमाणपत्र में हेरफेर करने का आरोप लगाया है। कोर्ट ने त्रुटियां सु …और पढ़ें
HighLights
- इंदौर हाई कोर्ट पहुंचीं वायरल गर्ल मोनालिसा
- बर्थ सर्टिफिकेट में हेरफेर करने का गंभीर आरोप
- कोर्ट ने त्रुटियां सुधारने के लिए 10 दिन का समय दिया
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इलाहाबाद कुंभ के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुई लड़की और उनके पति फरमान की याचिका पर शुक्रवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। वायरल गर्ल ने याचिका में आरोप लगाया था कि उनके पिता ने उनके दस्तावेजों में हेरफेर कर उनकी वैध शादी को अवैध घोषित करवाने के लिए षडयंत्र किया। इसके खिलाफ स्वतंत्र जांच की जाए।
सरकार के वकील ने याचिका में गलतियां बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता वायरल गर्ल को त्रुटियां सुधारने के लिए समय देते हुए सुनवाई को 23 जून तक के लिए टाल दिया।
केरल में फिल्म शूटिंग के दौरान हुई थी फरमान से मुलाकात
खरगोन में रहने वाली वायरल गर्ल पिछले वर्ष महाकुंभ के दौरान रुद्राक्ष की माला बेचते हुए सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। उसके बाद उन्हें फिल्मों में भी रोल मिले थे। अभिभाषक बाबूलाल नागर और द्रविनी दुबे के अनुसार केरल में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान उसकी मुलाकात फरमान से हुई थी। मार्च 2026 में उन्होंने विवाह किया।
उम्र को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने जताया अंदेशा
इसके बाद मामला विवादों में तब तब्दील हुआ, जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने वायरल गर्ल की उम्र विवाह के समय लगभग 16 वर्ष होने की बात कहते हुए शादी के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल होने का अंदेशा जताया। इसके चलते खरगोन पुलिस ने फरमान के खिलाफ पॉक्सो कानून के तहत मामला दर्ज किया था।
भाई के दस्तावेजों को अपना बताकर नाबालिग दिखाने का आरोप
वायरल गर्ल की ओर से आरोप लगाया गया कि वायरल गर्ल के पिता ने विवाह के खिलाफ साजिश के तहत उनके जन्म रिकॉर्ड में हेरफेर किया और उन्हें नाबालिग दिखाने की कोशिश की है। उसके छोटे भाई के दस्तावेजों को उसका बताकर उसे नाबालिग बताया जा रहा है, जबकि वो बालिग है। उसके जन्म प्रमाणपत्र में गलत तरीके से बदलाव किए गए और उनका असली जन्म प्रमाणपत्र बिना किसी नोटिस और कानूनी प्रक्रिया के सरकारी पोर्टल से रद्द कर दिया गया।
उनके खिलाफ एफआईआर इसी कथित साजिश के तहत दर्ज कराई गई ताकि विवाह को आपराधिक रंग दिया जा सके। यह एफआईआर कोई वास्तविक आपराधिक शिकायत नहीं है, बल्कि वैध विवाह के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई है।
विवाह को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास करने का दावा
वायरल गर्ल के पिता और अन्य लोगों ने सोशल मीडिया पर फरमान के खिलाफ प्रचार किया और लव जिहाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर विवाह को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास किया। दंपति ने अदालत से मांग की है कि उनके जन्म प्रमाणपत्र को बहाल किया जाए, सरकारी रिकॉर्ड में कथित जालसाजी की जांच करवाई जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच सुनिश्चित की जाए।
कोर्ट ने कमियों को दूर करने के लिए दिया 10 दिन का समय
शुक्रवार को इस याचिका पर सुनवाई के दौरान वायरल गर्ल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वरिष्ठ वकील पीवी दिनेश वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। सरकार की ओर से याचिका में गड़बड़ी बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई गई थी।
साथ ही वायरल गर्ल द्वारा जमा किए गए अपने जन्म प्रमाण पत्र की प्रतिलिपि को लेकर भी आपत्ति ली गई थी। हालांकि सुनवाई के दौरान उनके जन्म प्रमाण पत्र की ओरिजनल कॉपी हाईकोर्ट के समक्ष रखी गई। जिसके बाद कोर्ट ने वायरल गर्ल की ओर से पेश हुए वकीलों को याचिका में मौजूद कमियों को दूर करने और जन्म प्रमाण पत्र की साफ प्रतिलिपि रिकॉर्ड में लगाने के लिए 10 दिन का समय दे दिया। कोर्ट अब 10 दिन बाद इस याचिका पर सुनवाई करेगी।
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