देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने ट्रांसक्रिप्ट के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा दी, लेकिन सॉफ्टवेयर कैप्चा कोड स्वीकार नहीं कर रहा।
HighLights
- सबमिशन के चरण में फॉर्म सबमिट नहीं हो रहे
- इससे छात्रों को ऑफलाइन आवेदन करना पड़ रहा है
- जून से सितंबर के बीच विदेशी प्रवेश प्रक्रिया होती है
कपिल नीले, नईदुनिया, इंदौर। विदेशी विश्वविद्यालयों में प्रवेश और कंपनियों में नौकरी के लिए आवेदन करने वाले विद्यार्थियों की राह में कैप्चा कोड बड़ी बाधा बन गया है। विदेश जाने वाले युवाओं की ट्रांसक्रिप्ट के लिए देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) ने ऑनलाइन आवेदन की सुविधा दी है, लेकिन विद्यार्थी अपना आवेदन सबमिट नहीं कर पा रहे हैं।
प्रक्रिया पूरी करने के बाद सबमिशन के चरण में सॉफ्टवेयर कैप्चा कोड स्वीकार नहीं कर रहा है। इसके चलते विद्यार्थियों के आवेदन सबमिट नहीं हो रहे हैं। इससे उन्हें ऑफलाइन आवेदन करना पड़ रहा है। दरअसल, जून से लेकर सितंबर के बीच विदेशी विश्वविद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया चलती है। ऐसे में जिन विद्यार्थियों को आवेदन करना है, उन्हें माइग्रेशन, ट्रांसक्रिप्ट और डिग्री की आवश्यकता पड़ती है।
ट्रांसक्रिप्ट के लिए परेशान हो रहे छात्र
विश्वविद्यालय ने इसके लिए छह माह पहले मोबाइल एप्लीकेशन लांच किया। जहां माइग्रेशन, डुप्लीकेट अंकसूची, अंकसूची सुधार और डिग्री के लिए ऑनलाइन फार्म भरे जा रहे हैं, लेकिन ट्रांसक्रिप्ट के लिए छात्रों को परेशान होना पड़ रहा है। विद्यार्थियों का कहना है कि ट्रांसक्रिप्ट के लिए ऑनलाइन आवेदन के दौरान जानकारी दर्ज करने के बाद सबमिट करते समय कैप्चा कोड की समस्या आ जाती है।
कैप्चा के शब्द लिखने के बावजूद फार्म सबमिट नहीं होता है। सहायक कुलसचिव डॉ. विष्णु मिश्रा का कहना है कि ट्रांसक्रिप्ट के ऑनलाइन आवेदन जमा नहीं होने की शिकायत मिली है। इसके बारे में तकनीकी टीम को बताया गया है, जो दो से तीन दिन में सॉफ्टवेयर व मोबाइल एप्लीकेशन में सुधार करेगी।
यह है ट्रांसक्रिप्ट का महत्व
विदेशी संस्थाओं में अंकसूची से ज्यादा ट्रांसक्रिप्ट को अहमियत दी जाती है। उसके आधार पर संस्थाएं आवेदकों की शैक्षणिक योग्यता का आकलन करती हैं।
ट्रिपल जीरो हटाना भूले
ट्रांसक्रिप्ट के लिए फार्म भरने के बाद विद्यार्थियों को कैप्चा कोड डालना होता है। मगर स्क्रीन पर दर्शाए गए कोड को डालने के बावजूद फार्म सबमिट नहीं होता है। इसकी शिकायत मिलने के बाद विश्वविद्यालय की तकनीकी टीम ने जांच की तो पाया कि टेस्टिंग के दौरान कैप्चा के लिए बनाया गया सामान्य कोड (ट्रिपल जीरो) हटाया नहीं गया। जबकि स्क्रीन पर नजर आने वाले कोड को सॉफ्टवेयर मान्य नहीं करता है।
50 आवेदन रोजाना
ऑनलाइन आवेदन नहीं होने से विद्यार्थियों को विदेशी संस्थानों में प्रवेश निरस्त होने का डर सताने लगा है। इन दिनों रोजाना 40 से 50 आवेदन विश्वविद्यालय को प्राप्त हो रहे हैं। इन्हें बनाने में तीन से पांच दिन का समय लग रहा है। अधिकारियों ने दो दिनों के भीतर ट्रांसक्रिप्ट जारी करने के निर्देश दिए हैं।
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