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खेलों को बढ़ावा देने के दावे हवा में, इंदौर के सरकारी स्कूलों में नहीं लगे ग्रीष्मकालीन शिविर

खेलों को बढ़ावा देने के दावे हवा में, इंदौर के सरकारी स्कूलों में नहीं लगे ग्रीष्मकालीन शिविर

इंदौर जिले में शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण इस बार हजारों विद्यार्थी ग्रीष्मकालीन शिविरों से वंचित रह गए। करीब 90 प्रतिशत स्कूलों में शिविर शुरू ह …और पढ़ें

Publish Date: Fri, 29 May 2026 10:30:47 AM (IST)Updated Date: Fri, 29 May 2026 10:30:47 AM (IST)

स्कूलों में नहीं लगे खेल शिविर। (एआई जनरेट)

HighLights

  1. शिक्षा विभाग की लापरवाही से हजारों बच्चे खेल और रचनात्मक गतिविधियों से रहे दूर
  2. जिले के करीब 90 प्रतिशत स्कूलों में यह शिविर शुरू ही नहीं हो सके
  3. कई जगह सिर्फ एक-दो दिन आयोजित कर औपचारिकता पूरी की

विनय यादव, नईदुनिया, इंदौर। एक ओर सरकार बच्चों को खेलों से जोड़ने और नई शिक्षा नीति के तहत शारीरिक एवं रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर इंदौर जिले में शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण इस बार हजारों विद्यार्थी ग्रीष्मकालीन शिविरों से वंचित रह गए।

लोक शिक्षा संचालनालय द्वारा अप्रैल माह में स्पष्ट आदेश जारी किए गए थे कि एक मई से एक जून तक शासकीय स्कूलों में ग्रीष्मकालीन शिविर आयोजित किए जाएं, लेकिन जिले के करीब 90 प्रतिशत स्कूलों में यह शिविर शुरू ही नहीं हो सके। जिन स्कूलों में आयोजित हुए वहां भी सिर्फ एक-दो दिन आयोजित कर औपचारिकता पूरी की। जबकि शिविर पूरे माह आयोजित किया जाना था।

इन शिविरों का उद्देश्य बच्चों को गर्मी की छुट्टियों के दौरान खेल, योग, कला, संगीत, चित्रकला और अन्य रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना था, ताकि उनकी प्रतिभा को निखारा जा सके। खासतौर पर ऐसे बच्चों को इसका लाभ मिलना था, जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण निजी समर कैंप या खेल अकादमियों में हिस्सा नहीं ले पाते। लेकिन शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण बच्चों को वंचित रहना पड़ा।

शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आयोजित होने थे शिविर

लोक शिक्षा संचालनालय के संचालक केके द्विवेदी द्वारा 24 अप्रैल को जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र जारी किया था। जिसमें लिखा था कि एक मई से एक जून तक विद्यार्थियों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए शिविर आयोजित करवाए। शिविर में आने वाले विद्यार्थियों से 25 रूपये रजिस्ट्रेशन शुल्क लिया जाए। इस शुल्क से प्रशिक्षण देने वाले शिक्षकों को मानदेय दिया जाए। जिला शिक्षा अधिकारी शांता स्वामी द्वारा भी सभी स्कूलों के प्राचार्य को इस संबंध में निर्देश दिए। लेकिन इसके बावजूद स्कूलों में कोई खेल गतिविधि नहीं हुई।

बच्चों को शिविर तक की जानकारी नहीं दी

जानकारी अनुसार शासकीय स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों तक को शिविर के संबंध में जानकारी तक नहीं पहुंचाई। अभिभावकों ने बताया कि हमें जानकारी ही नहीं मिली कि ग्रीष्मकालीन शिविर आयोजित होने वाले हैं। शिविर आयोजित होते तो बच्चों को मोबाइल और टीवी से दूर रखकर सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ा जा सकता है। हमारे बच्चों ने निजी शिविर में जाने के लिए रूचि दिखाई थी, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उसे भेज नहीं पाए। स्कूल के प्राचार्यो को हम तक इस संबंध में जानकारी पहुंचाना चाहिए थी।

शिक्षकों की जनगणना में ड्यूटी लगना भी कारण

स्कूलों के प्राचार्यो ने बताया कि इस अव्यवस्था का एक कारण शिक्षकों की जनगणना कार्य में ड्यूटी लगना रहा। बड़ी संख्या में शिक्षक प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त रहे, जिसके कारण स्कूल स्तर पर शिविरों की तैयारी ही नहीं हो सकी। विशेषज्ञों के मुताबिक गर्मी की छुट्टियां बच्चों की प्रतिभा को निखारने का सबसे बेहतर समय होती हैं। इस दौरान बच्चे नई गतिविधियां सीखते हैं और खेलों के माध्यम से अनुशासन, आत्मविश्वास तथा टीम भावना विकसित होती है। निजी स्कूलों और अकादमियों में समर कैंप के लिए हजारों रुपये शुल्क लिया जाता है, जो हर परिवार के लिए संभव नहीं होता।

ज्यादा गर्मी के कारण बंद किए

ग्रीष्मकालीन शिविर कुछ स्कूलों ने शुरू किए थे, लेकिन ज्यादा गर्मी के कारण बंद कर दिए है। अभी सांदीपनी स्कूलों में शिविर आयोजित हो रहे हैं। यदि शिविर आयोजित नहीं हो रहे हैं तो मैं इसे दिखवाती हूं। – शांता स्वामी, जिला शिक्षा अधिकारी

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